मुख्य›MPPSC Mains (हिन्दी)›सामान्य अध्ययन चतुर्थ प्रश्नपत्र›खण्ड-अ: दर्शनशास्त्र, मनोविज्ञान, लोक प्रशासन एवं केस स्टडी›इकाई-1 भारतीय षड्दर्शन, दार्शनिक/विचारक, समाज सुधारक›रवीन्द्रनाथ टैगोर, राजा राममोहन राय, देवी अहिल्याबाई होलकर, सावित्रीबाई फुले›राजा राममोहन राय एक समाज सुधारक के रूप में

राजा राममोहन राय एक समाज सुधारक के रूप में

20156M
आदर्श उत्तर

'भारतीय पुनर्जागरण के अग्रदूत' राजा राममोहन राय का योगदान:

  1. सती प्रथा निषेध (1829): लॉर्ड विलियम बेंटिंक के साथ मिलकर सती प्रथा को कानूनी रूप से गैर-कानूनी घोषित कराया।
  2. ब्रह्म समाज (1828): मूर्तिपूजा, पुरोहिताई पाखंड और बहुदेववाद का खंडन कर उपनिषदिक एकेश्वरवाद की स्थापना।
  3. नारी अधिकार एवं शिक्षा: बाल विवाह व बहुविवाह का विरोध, विधवा विवाह का समर्थन तथा हिंदू कॉलेज के माध्यम से आधुनिक वैज्ञानिक शिक्षा का प्रसार।
  4. प्रेस की स्वतंत्रता: 'संवाद कौमुदी' के माध्यम से भारतीय पत्रकारिता की स्वतंत्र नींव रखी।

In English (Question & Model Answer)

Raja Rammohan Roy as a social reformer

Raja Ram Mohan Roy as a Pioneering Social Reformer:

  1. Abolition of Sati (1829): Speared the crusade resulting in the historic anti-Sati Regulation XVII under Lord William Bentinck.
  2. Founding of Brahmo Samaj (1828): Championed rational monotheism, dismantling idolatry and ritualistic exploitation.
  3. Women's Rights & Scientific Education: Opposed polygamy and child marriage; promoted widow remarriage and Western scientific schooling (Hindu College).
  4. Pioneering Free Press: Defended freedom of expression via 'Sambad Kaumudi'.
इस प्रश्न को संदर्भ में देखें →
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