मुख्य›MPPSC Mains (हिन्दी)›सामान्य अध्ययन चतुर्थ प्रश्नपत्र›खण्ड-अ: दर्शनशास्त्र, मनोविज्ञान, लोक प्रशासन एवं केस स्टडी›इकाई-1 भारतीय षड्दर्शन, दार्शनिक/विचारक, समाज सुधारक›गुरुनानक, कबीर, तुलसीदास, संत रविदास›तुलसीदास के दार्शनिक विचार पर 150 शब्दों में संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।

तुलसीदास के दार्शनिक विचार पर 150 शब्दों में संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।

20156M
आदर्श उत्तर

गोस्वामी तुलसीदास के दार्शनिक विचार (विशिष्टाद्वैत एवं भक्ति दर्शन):

  1. ब्रह्म का सगुण-साकार स्वरूप: तुलसीदास निर्गुण ब्रह्म को स्वीकारते हुए भी जन-उद्धार हेतु सगुण-साकार 'मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम' की भक्ति को सुलभ व सर्वश्रेष्ठ साधन मानते हैं ("सगुनहि अगुनहि नहिं कछु भेदा")।
  2. दास्य भाव की भक्ति: सेवक-सेव्य भाव द्वारा अहंकार का पूर्ण विसर्जन।
  3. समन्वयवादी दर्शन: शैव-वैष्णव, ज्ञान-भक्ति और सगुण-निर्गुण का ऐतिहासिक समन्वय।
  4. रामराज्य की आदर्श सामाजिक परिकल्पना: नीति, धर्म और समता पर आधारित कल्याणकारी शासन व्यवस्था।

In English (Question & Model Answer)

Write a short note on Philosophical concept of Tulsidas in 150 words.

Philosophical Concepts of Goswami Tulsidas:

  1. Synthesis of Saguna and Nirguna Brahman: Reconciled non-qualified reality with loving devotion to Maryada Purushottam Rama ("Sagunahi Agunahi Nahin Kachhu Bheda").
  2. Philosophy of Dasya Bhakti: Selfless servant-master devotion annihilating human ego.
  3. Supreme Philosophic Harmonizer (Samanvaya): Unified Shaivism and Vaishnavism, Jnana and Bhakti.
  4. Vision of Ramrajya: Ethical, welfare-state cosmology free from sorrow and physical-environmental distress.
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