मुख्य›MPPSC Mains (हिन्दी)›सामान्य अध्ययन चतुर्थ प्रश्नपत्र›खण्ड-अ: दर्शनशास्त्र, मनोविज्ञान, लोक प्रशासन एवं केस स्टडी›इकाई-1 भारतीय षड्दर्शन, दार्शनिक/विचारक, समाज सुधारक›स्वामी दयानंद सरस्वती, स्वामी विवेकानंद, महर्षि अरविन्द, सर्वपल्ली राधाकृष्णन, डॉ. भीमराव आम्बेडकर, पंडित दीनदयाल उपाध्याय›दयानन्द सरस्वती के सिद्धान्त पर 150 शब्दों में संक्षिप्त टिप्पणी

दयानन्द सरस्वती के सिद्धान्त पर 150 शब्दों में संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।

20156M
आदर्श उत्तर

स्वामी दयानन्द सरस्वती के प्रमुख सिद्धान्त:

  1. 'वेदों की ओर लौटो' (Infallibility of Vedas): वेदों को ईश्वरीय ज्ञान का मूल स्रोत मानकर बाद की रूढ़ियों व अंधविश्वासों का खंडन।
  2. एकेश्वरवाद: केवल एक निराकार परमेश्वर (ओ३म्) की उपासना; मूर्तिपूजा व अवतारवाद का विरोध।
  3. गुण-कर्म आधारित सामाजिक व्यवस्था: जन्म-आधारित जातिवाद का विरोध कर योग्यता आधारित वर्ण व्यवस्था का समर्थन।
  4. स्त्री उद्धार एवं शिक्षा: बाल विवाह का विरोध, विधवा पुनर्विवाह व कन्याओं हेतु गुरुकुल शिक्षा।

In English (Question & Model Answer)

Write a short note on Theory of Dayananda Saraswati in 150 words.

Core Theories and Doctrines of Swami Dayananda Saraswati:

  1. 'Back to the Vedas': Established pristine Vedic texts as the foundational source of spiritual truth, rejecting superstitious accretions.
  2. Pure Monotheism: Worship of one formless Supreme Reality (Om); repudiating idolatry and animal sacrifice.
  3. Meritocratic Social Order: Rejected birth-based caste hierarchies in favor of Guna-Karma (individual virtue and skill).
  4. Female Education & Social Reform: Championed Gurukuls for women, widow remarriage, and universal education.
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