मुख्य›MPPSC Mains (हिन्दी)›सामान्य अध्ययन चतुर्थ प्रश्नपत्र›खण्ड-अ: दर्शनशास्त्र, मनोविज्ञान, लोक प्रशासन एवं केस स्टडी›इकाई-1 भारतीय षड्दर्शन, दार्शनिक/विचारक, समाज सुधारक›स्वामी दयानंद सरस्वती, स्वामी विवेकानंद, महर्षि अरविन्द, सर्वपल्ली राधाकृष्णन, डॉ. भीमराव आम्बेडकर, पंडित दीनदयाल उपाध्याय›एकात्म-मानववाद की व्याख्या।

एकात्म-मानववाद की व्याख्या।

20156M
आदर्श उत्तर

पंडित दीनदयाल उपाध्याय का 'एकात्म मानववाद' (Integral Humanism):

  1. समग्र मानवीय दृष्टिकोण: मनुष्य केवल एक भौतिक या आर्थिक इकाई नहीं है; मानव जीवन शरीर, मन, बुद्धि और आत्मा का एकात्म समन्वय है, जिसे धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष (पुरुषार्थ चतुष्टय) के संतुलन से ही पूर्णता मिलती है।
  2. व्यष्टि से परमेष्ठी का संबंध: व्यक्ति → परिवार → समाज → राष्ट्र → संपूर्ण मानवता → प्रकृति (परमेष्ठी) के मध्य जैविक एकात्मता।
  3. अंत्योदय: आर्थिक विकास का मुख्य लक्ष्य समाज के सबसे अंतिम और निर्धन व्यक्ति का सर्वांगीण उत्थान होना चाहिए।

In English (Question & Model Answer)

Explain the Ekatma-Manavavada (Integral Humanism).

Exposition of Pt. Deendayal Upadhyaya's 'Integral Humanism':

  1. Holistic Human Cosmology: Human beings are multidimensional entities requiring balanced fulfillment of Body, Mind, Intellect, and Soul through the Purusharthas (Dharma, Artha, Kama, Moksha).
  2. Organic Concentric Harmony: Organic unitive continuity extending from the Individual → Family → Society → Nation → Humanity → Nature.
  3. Antyodaya Paradigm: Anchoring state welfare in the holistic elevation of the most impoverished citizen at the grassroots.
इस प्रश्न को संदर्भ में देखें →
निशुल्क एंड्रॉइड ऐप

स्टेट PYQ ऐप पर बेहतर अभ्यास करें

⚡ एरर डायरी · ⏱ मेन्स आंसर पेसर टाइमर · 📴 ऑफलाइन रिवीजन वॉल्ट

डाउनलोड करेंGoogle Play