निम्नलिखित में से किन्हीं पाँच के उत्तर दीजिए : (A) 'चन्द्र + उदय' की संधि कीजिए। (B) 'धनुष्टंकार' शब्द का संधि-विच्छेद कीजिए। (C) 'नीलकंठ' शब्द में कौन सा समास है ? (D) 'बारहमासा' में कौन सा समास है ? (E) 'आविर्भाव' का विलोम शब्द बताइये। (F) 'कर्पट' तथा 'चतुष्काठ' तत्सम शब्दों के तद्भव शब्द बताइये। (G) 'ठाँव' तथा 'पहचान' तद्भव शब्दों के तत्सम शब्द बताइये। (H) 'पाणि', 'भगिनी' तथा 'कालकूट' के दो-दो पर्यायवाची शब्द बताइये। (I) 'लाघव विराम' के चिह्न का प्रयोग क्यों करते हैं ? उदाहरण के साथ स्पष्ट कीजिए। (J) 'अंजर-पंजर' किस प्रकार का शब्द है ?
व्याकरण संबंधी सभी 10 प्रश्नों के प्रामाणिक उत्तर:
- (A) 'चन्द्र + उदय' की संधि: चन्द्रोदय (गुण स्वर संधि: अ + उ = ओ)।
- (B) 'धनुष्टंकार' का संधि-विच्छेद: धनुः + टंकार (विसर्ग संधि)।
- (C) 'नीलकंठ' में समास: बहुव्रीहि समास (विग्रह: नीला है कंठ जिसका अर्थात् भगवान शिव; विशेषण-विशेष्य के रूप में कर्मधारय भी मान्य)।
- (D) 'बारहमासा' में समास: द्विगु समास (विग्रह: बारह मासों/महीनों का समाहार/गीत)।
- (E) 'आविर्भाव' का विलोम शब्द: तिरोभाव (अथवा अवसान)।
- (F) 'कर्पट' तथा 'चतुष्काठ' के तद्भव रूप:
- कर्पट (तत्सम) ➔ कपड़ा (तद्भव)
- चतुष्काठ (तत्सम) ➔ चौखट (तद्भव)
- (G) 'ठाँव' तथा 'पहचान' के तत्सम रूप:
- ठाँव (तद्भव) ➔ स्थान (तत्सम)
- पहचान (तद्भव) ➔ प्रत्यभिज्ञान (तत्सम)
- (H) पर्यायवाची शब्द (दो-दो):
- पाणि: हस्त, हाथ, कर।
- भगिनी: बहन, सहोदरा, दीदी।
- कालकूट: हलाहल, विष, गरल।
- (I) लाघव चिह्न (० / .) का प्रयोग एवं उदाहरण:
प्रयोजन: किसी बड़े और प्रसिद्ध शब्द को संक्षिप्त रूप में लिखने के लिए उसके प्रथम अक्षर के आगे लाघव चिह्न लगाया जाता है।
उदाहरण: मध्य प्रदेश ➔ म.प्र. (अथवा म०प्र०), डॉक्टर ➔ डॉ. (अथवा डॉ०)। - (J) 'अंजर-पंजर' शब्द की प्रकृति:
यह एक युग्म शब्द / अनुकरणमूलक (सहचर) शब्द है (जिसका अर्थ 'शरीर के अंग-प्रत्यंग या जोड़' होता है)।
In English (Question & Model Answer)
निम्नलिखित में से किन्हीं पाँच के उत्तर दीजिए : (A) 'चन्द्र + उदय' की संधि कीजिए। (B) 'धनुष्टंकार' शब्द का संधि-विच्छेद कीजिए। (C) 'नीलकंठ' शब्द में कौन सा समास है ? (D) 'बारहमासा' में कौन सा समास है ? (E) 'आविर्भाव' का विलोम शब्द बताइये। (F) 'कर्पट' तथा 'चतुष्काठ' तत्सम शब्दों के तद्भव शब्द बताइये। (G) 'ठाँव' तथा 'पहचान' तद्भव शब्दों के तत्सम शब्द बताइये। (H) 'पाणि', 'भगिनी' तथा 'कालकूट' के दो-दो पर्यायवाची शब्द बताइये। (I) 'लाघव विराम' के चिह्न का प्रयोग क्यों करते हैं ? उदाहरण के साथ स्पष्ट कीजिए। (J) 'अंजर-पंजर' किस प्रकार का शब्द है ?
[Note for English Medium Aspirants]: As per official MPPSC Examination Rules, Paper 5 (General Hindi & Grammar / सामान्य हिन्दी एवं व्याकरण) must be attempted exclusively in Hindi (Devanagari script). The authentic Hindi model answer is provided below.
व्याकरण संबंधी सभी 10 प्रश्नों के प्रामाणिक उत्तर:
- (A) 'चन्द्र + उदय' की संधि: चन्द्रोदय (गुण स्वर संधि: अ + उ = ओ)।
- (B) 'धनुष्टंकार' का संधि-विच्छेद: धनुः + टंकार (विसर्ग संधि)।
- (C) 'नीलकंठ' में समास: बहुव्रीहि समास (विग्रह: नीला है कंठ जिसका अर्थात् भगवान शिव; विशेषण-विशेष्य के रूप में कर्मधारय भी मान्य)।
- (D) 'बारहमासा' में समास: द्विगु समास (विग्रह: बारह मासों/महीनों का समाहार/गीत)।
- (E) 'आविर्भाव' का विलोम शब्द: तिरोभाव (अथवा अवसान)।
- (F) 'कर्पट' तथा 'चतुष्काठ' के तद्भव रूप:
- कर्पट (तत्सम) ➔ कपड़ा (तद्भव)
- चतुष्काठ (तत्सम) ➔ चौखट (तद्भव)
- (G) 'ठाँव' तथा 'पहचान' के तत्सम रूप:
- ठाँव (तद्भव) ➔ स्थान (तत्सम)
- पहचान (तद्भव) ➔ प्रत्यभिज्ञान (तत्सम)
- (H) पर्यायवाची शब्द (दो-दो):
- पाणि: हस्त, हाथ, कर।
- भगिनी: बहन, सहोदरा, दीदी।
- कालकूट: हलाहल, विष, गरल।
- (I) लाघव चिह्न (० / .) का प्रयोग एवं उदाहरण:
प्रयोजन: किसी बड़े और प्रसिद्ध शब्द को संक्षिप्त रूप में लिखने के लिए उसके प्रथम अक्षर के आगे लाघव चिह्न लगाया जाता है।
उदाहरण: मध्य प्रदेश ➔ म.प्र. (अथवा म०प्र०), डॉक्टर ➔ डॉ. (अथवा डॉ०)। - (J) 'अंजर-पंजर' शब्द की प्रकृति:
यह एक युग्म शब्द / अनुकरणमूलक (सहचर) शब्द है (जिसका अर्थ 'शरीर के अंग-प्रत्यंग या जोड़' होता है)।