मुख्य›MPPSC Mains (हिन्दी)›सामान्य हिन्दी एवं व्याकरण›सामान्य हिन्दी एवं व्याकरण›अपठित गद्यांश›"पुस्तकालय सभ्यता के विकास का प्रत्यक्ष प्रमाण प्रस्तुत करता है। इसी

"पुस्तकालय सभ्यता के विकास का प्रत्यक्ष प्रमाण प्रस्तुत करता है। इसी के परिप्रेक्ष्य में भारत अपने अतीत पर गर्व कर सकता है। भारत के सन्दर्भ में पुस्तकालय कोई नई चीज नहीं है। लिपि के आविष्कार से लेकर आज तक लोग निरन्तर पुस्तकों का संग्रह करते रहे हैं। मुद्रणकला के आविष्कार से पहले पुस्तकों का संग्रह करना आसान नहीं था। आजकल साधारण स्थिति के पुस्तकालय में जितनी संपत्ति लगती है उतनी उन दिनों कभी-कभी एक पुस्तक को तैयार करने में लग जाया करती थी। इसके बावजूद भारत के पुस्तकालय अपने पुस्तक संग्रह के लिए विश्वविख्यात थे। यही कारण है कि चीन, फारस जैसे सुदूरवर्ती देशों से झुण्ड के झुण्ड विद्यानुरागी लम्बी यात्रायें करके भारत आया करते थे।" (A) ऊपर के गद्यांश का उचित शीर्षक दीजिए। (B) किसी भी सभ्यता के विकास का प्रत्यक्ष प्रमाण क्या है ? (C) मुद्रणकला के आविष्कार से पहले पुस्तकों का संग्रह अत्यंत कठिन क्यों था ? (D) पुस्तकालयों के कारण भारत को क्या गौरव प्राप्त था ? (E) भारत में पुस्तकों का संग्रह कब से होता रहा है ?

201515M
आदर्श उत्तर

गद्यांश 9(ब) के सभी 5 प्रश्नों के उत्तर:

  1. (A) ऊपर के गद्यांश का उचित शीर्षक:
    पुस्तकालय: सभ्यता के विकास का प्रत्यक्ष प्रमाण एवं ज्ञान-धरोहर।
  2. (B) किसी भी सभ्यता के विकास का प्रत्यक्ष प्रमाण क्या है?
    किसी भी सभ्यता के बौद्धिक, सांस्कृतिक एवं वैज्ञानिक विकास का प्रत्यक्ष एवं जीवंत प्रमाण उसके 'पुस्तकालय' (ग्रंथालय) हैं।
  3. (C) मुद्रणकला के आविष्कार से पहले पुस्तकों का संग्रह अत्यंत कठिन क्यों था?
    मुद्रणकला (छापेखाने) के अभाव में पुस्तकों को हाथ से (हस्तलिखित पांडुलिपियों के रूप में) तैयार करना पड़ता था, जिसमें अत्यधिक श्रम, समय और अपार धन लगता था।
  4. (D) पुस्तकालयों के कारण भारत को क्या गौरव प्राप्त था?
    प्राचीन भारत के समृद्ध पुस्तकालय (यथा नालंदा, तक्षशिला, वल्लभी) अपने दुर्लभ ग्रंथ-संग्रह के लिए विश्वविख्यात थे, जिससे चीन, फारस आदि सुदूर देशों से विद्यानुरागी ज्ञानार्जन हेतु भारत आते थे।
  5. (E) भारत में पुस्तकों का संग्रह कब से होता रहा है?
    भारत में पुस्तकों एवं ज्ञान का संग्रह लिपि के आविष्कार और वैदिक काल से ही निरंतर होता रहा है।

In English (Question & Model Answer)

"पुस्तकालय सभ्यता के विकास का प्रत्यक्ष प्रमाण प्रस्तुत करता है। इसी के परिप्रेक्ष्य में भारत अपने अतीत पर गर्व कर सकता है। भारत के सन्दर्भ में पुस्तकालय कोई नई चीज नहीं है। लिपि के आविष्कार से लेकर आज तक लोग निरन्तर पुस्तकों का संग्रह करते रहे हैं। मुद्रणकला के आविष्कार से पहले पुस्तकों का संग्रह करना आसान नहीं था। आजकल साधारण स्थिति के पुस्तकालय में जितनी संपत्ति लगती है उतनी उन दिनों कभी-कभी एक पुस्तक को तैयार करने में लग जाया करती थी। इसके बावजूद भारत के पुस्तकालय अपने पुस्तक संग्रह के लिए विश्वविख्यात थे। यही कारण है कि चीन, फारस जैसे सुदूरवर्ती देशों से झुण्ड के झुण्ड विद्यानुरागी लम्बी यात्रायें करके भारत आया करते थे।" (A) ऊपर के गद्यांश का उचित शीर्षक दीजिए। (B) किसी भी सभ्यता के विकास का प्रत्यक्ष प्रमाण क्या है ? (C) मुद्रणकला के आविष्कार से पहले पुस्तकों का संग्रह अत्यंत कठिन क्यों था ? (D) पुस्तकालयों के कारण भारत को क्या गौरव प्राप्त था ? (E) भारत में पुस्तकों का संग्रह कब से होता रहा है ?

[Note for English Medium Aspirants]: As per official MPPSC Examination Rules, Paper 5 (General Hindi & Grammar / सामान्य हिन्दी एवं व्याकरण) must be attempted exclusively in Hindi (Devanagari script). The authentic Hindi model answer is provided below.

गद्यांश 9(ब) के सभी 5 प्रश्नों के उत्तर:

  1. (A) ऊपर के गद्यांश का उचित शीर्षक:
    पुस्तकालय: सभ्यता के विकास का प्रत्यक्ष प्रमाण एवं ज्ञान-धरोहर।
  2. (B) किसी भी सभ्यता के विकास का प्रत्यक्ष प्रमाण क्या है?
    किसी भी सभ्यता के बौद्धिक, सांस्कृतिक एवं वैज्ञानिक विकास का प्रत्यक्ष एवं जीवंत प्रमाण उसके 'पुस्तकालय' (ग्रंथालय) हैं।
  3. (C) मुद्रणकला के आविष्कार से पहले पुस्तकों का संग्रह अत्यंत कठिन क्यों था?
    मुद्रणकला (छापेखाने) के अभाव में पुस्तकों को हाथ से (हस्तलिखित पांडुलिपियों के रूप में) तैयार करना पड़ता था, जिसमें अत्यधिक श्रम, समय और अपार धन लगता था।
  4. (D) पुस्तकालयों के कारण भारत को क्या गौरव प्राप्त था?
    प्राचीन भारत के समृद्ध पुस्तकालय (यथा नालंदा, तक्षशिला, वल्लभी) अपने दुर्लभ ग्रंथ-संग्रह के लिए विश्वविख्यात थे, जिससे चीन, फारस आदि सुदूर देशों से विद्यानुरागी ज्ञानार्जन हेतु भारत आते थे।
  5. (E) भारत में पुस्तकों का संग्रह कब से होता रहा है?
    भारत में पुस्तकों एवं ज्ञान का संग्रह लिपि के आविष्कार और वैदिक काल से ही निरंतर होता रहा है।
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