निम्नलिखित विषय पर लगभग 250 शब्दों में निबंध लिखिए : "भारत की सांस्कृतिक विविधता में एकता"
भारत की सांस्कृतिक विविधता में एकता: बहुरंगी विरासत, तीर्थ परंपरा, सामासिक संस्कृति एवं 'एक भारत-श्रेष्ठ भारत'
"विविधता भारत की कमजोरी नहीं, बल्कि उसके सांस्कृतिक इंद्रधनुष की सबसे बड़ी शक्ति है; 'अनेकता में एकता' ही हमारी सभ्यता की अमर अंतरात्मा है।"
1. प्रस्तावना एवं सांस्कृतिक विविधता का स्वरूप:
भारत विश्व का वह अद्वितीय देश है जहाँ सैकड़ों भाषाएँ, विविध धर्म, खान-पान, वेशभूषा और भौगोलिक परिवेश एक साथ सह-अस्तित्व में खिलते हैं। उत्तर में कश्मीर से लेकर दक्षिण में कन्याकुमारी तक और पश्चिम में कच्छ से पूर्व में कामरूप तक की बाह्य भिन्नताओं के बावजूद भारत की अंतरात्मा में एक अखंड, अविभाज्य और सनातन सांस्कृतिक चेतना निरंतर प्रवाहित होती है।
2. विविधता में एकता को सींचने वाले प्रमुख तत्व:
- आदि शंकराचार्य की चार धाम परंपरा: उत्तर में बद्रीनाथ, दक्षिण में रामेश्वरम, पूर्व में पुरी और पश्चिम में द्वारका की तीर्थ यात्रा सदियों से उत्तर-दक्षिण व पूर्व-पश्चिम के नागरिकों को एक आध्यात्मिक सूत्र में बांधती आई है।
- सांस्कृतिक व साहित्यिक महासंगम: रामायण और महाभारत का प्रभाव देश के प्रत्येक अंचल और लोक-भाषा में समान रूप से है। शास्त्रीय संगीत और भरतमुनि का 'नाट्यशास्त्र' उत्तर के कत्थक से लेकर दक्षिण के भरतनाट्यम तक की साझी आत्मा है।
- फसल उत्सवों की राष्ट्रीय एकात्मता: मकर संक्रांति, पोंगल (तमिलनाडु), बिहू (असम), बैसाखी (पंजाब) और ओणम (केरल) एक ही समय अलग-अलग नामों से मनाए जाने वाले प्रकृति और कृषि के प्रति साझी कृतज्ञता के महापर्व हैं।
- संवैधानिक धर्मनिरपेक्षता एवं तिरंगा: संविधान के अनुच्छेद 14, 25-30 द्वारा प्रत्येक नागरिक को धार्मिक व भाषाई स्वतंत्रता देकर लोकतांत्रिक एकता को मजबूत करना।
3. निष्कर्ष:
विविधता को मिटाकर एकरूपता थोपना नहीं, बल्कि विविधता का आदर करते हुए राष्ट्रीय एकता को सुदृढ़ करना ही भारत की विशेषता है। 'एक भारत-श्रेष्ठ भारत' के पावन संकल्प के साथ अपनी 'विरासत पर गर्व' की अनुभूति करना ही भारत को 'विश्वगुरु' बनाएगा और 'विकसित भारत @2047' का निर्माण करेगा।
In English (Question & Model Answer)
निम्नलिखित विषय पर लगभग 250 शब्दों में निबंध लिखिए : "भारत की सांस्कृतिक विविधता में एकता"
[Note for English Medium Aspirants]: As per official MPPSC Examination Rules, Paper 6 (Hindi Essay and Administrative Drafting / हिन्दी निबंध एवं प्रारूप लेखन) must be attempted exclusively in Hindi (Devanagari script) by all candidates regardless of their opted medium for GS1–GS4. Answers written in English are not evaluated in the actual examination. The authentic Hindi model answer is provided below for your preparation.
भारत की सांस्कृतिक विविधता में एकता: बहुरंगी विरासत, तीर्थ परंपरा, सामासिक संस्कृति एवं 'एक भारत-श्रेष्ठ भारत'
"विविधता भारत की कमजोरी नहीं, बल्कि उसके सांस्कृतिक इंद्रधनुष की सबसे बड़ी शक्ति है; 'अनेकता में एकता' ही हमारी सभ्यता की अमर अंतरात्मा है।"
1. प्रस्तावना एवं सांस्कृतिक विविधता का स्वरूप:
भारत विश्व का वह अद्वितीय देश है जहाँ सैकड़ों भाषाएँ, विविध धर्म, खान-पान, वेशभूषा और भौगोलिक परिवेश एक साथ सह-अस्तित्व में खिलते हैं। उत्तर में कश्मीर से लेकर दक्षिण में कन्याकुमारी तक और पश्चिम में कच्छ से पूर्व में कामरूप तक की बाह्य भिन्नताओं के बावजूद भारत की अंतरात्मा में एक अखंड, अविभाज्य और सनातन सांस्कृतिक चेतना निरंतर प्रवाहित होती है।
2. विविधता में एकता को सींचने वाले प्रमुख तत्व:
- आदि शंकराचार्य की चार धाम परंपरा: उत्तर में बद्रीनाथ, दक्षिण में रामेश्वरम, पूर्व में पुरी और पश्चिम में द्वारका की तीर्थ यात्रा सदियों से उत्तर-दक्षिण व पूर्व-पश्चिम के नागरिकों को एक आध्यात्मिक सूत्र में बांधती आई है।
- सांस्कृतिक व साहित्यिक महासंगम: रामायण और महाभारत का प्रभाव देश के प्रत्येक अंचल और लोक-भाषा में समान रूप से है। शास्त्रीय संगीत और भरतमुनि का 'नाट्यशास्त्र' उत्तर के कत्थक से लेकर दक्षिण के भरतनाट्यम तक की साझी आत्मा है।
- फसल उत्सवों की राष्ट्रीय एकात्मता: मकर संक्रांति, पोंगल (तमिलनाडु), बिहू (असम), बैसाखी (पंजाब) और ओणम (केरल) एक ही समय अलग-अलग नामों से मनाए जाने वाले प्रकृति और कृषि के प्रति साझी कृतज्ञता के महापर्व हैं।
- संवैधानिक धर्मनिरपेक्षता एवं तिरंगा: संविधान के अनुच्छेद 14, 25-30 द्वारा प्रत्येक नागरिक को धार्मिक व भाषाई स्वतंत्रता देकर लोकतांत्रिक एकता को मजबूत करना।
3. निष्कर्ष:
विविधता को मिटाकर एकरूपता थोपना नहीं, बल्कि विविधता का आदर करते हुए राष्ट्रीय एकता को सुदृढ़ करना ही भारत की विशेषता है। 'एक भारत-श्रेष्ठ भारत' के पावन संकल्प के साथ अपनी 'विरासत पर गर्व' की अनुभूति करना ही भारत को 'विश्वगुरु' बनाएगा और 'विकसित भारत @2047' का निर्माण करेगा।