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निम्नलिखित विषय पर लगभग 250 शब्दों में निबंध लिखिए : "बेरोजगारी की समस्या : कारण एवं निवारण"

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आदर्श उत्तर

बेरोजगारी की समस्या : कारण एवं निवारण: संरचनात्मक चुनौतियाँ, कौशल अंतराल एवं रोजगार सृजन की रणनीतियाँ

"बेरोजगारी केवल आर्थिक नुकसान नहीं है, बल्कि युवा शक्ति के सपनों का हनन और समाज में असंतोष की जननी है; युवाओं को हुनर और काम देना ही राष्ट्र-निर्माण का मूल आधार है।"

1. प्रस्तावना एवं जनसांख्यिकीय लाभांश:
बेरोजगारी उस स्थिति को कहते हैं जिसमें कोई सक्षम और इच्छुक व्यक्ति प्रचलित मजदूरी दर पर रोजगार प्राप्त करने में असमर्थ रहता है। भारत आज 65% युवा आबादी के साथ विश्व का सबसे युवा देश है। यह युवा ऊर्जा यदि उत्पादक कार्यों में लगे तो देश आर्थिक महाशक्ति बन सकता है, किन्तु रोजगार के अभाव में यही जनसांख्यिकीय लाभांश सामाजिक संकट बन सकता है।

2. बेरोजगारी के प्रमुख कारण:

  • कौशल का अभाव एवं दोषपूर्ण शिक्षा प्रणाली: महाविद्यालयीन डिग्रियों का केवल सैद्धांतिक होना और आधुनिक उद्योगों (AI, कोडिंग, डेटा साइंस, ऑटोमेशन) की मांग के अनुरूप व्यावहारिक कौशल न होना।
  • कृषि में प्रच्छन्न (छिपी हुई) बेरोजगारी: आवश्यकता से अधिक लोगों का कृषि पर निर्भर होना, जिससे उनकी सीमांत उत्पादकता शून्य रहती है।
  • श्रम-प्रधान विनिर्माण का धीमा विकास: कपड़ा, चमड़ा, खिलौना और खाद्य प्रसंस्करण जैसे अधिक रोजगार देने वाले उद्योगों का पर्याप्त विस्तार न होना।
  • स्वरोजगार हेतु पूंजी व जोखिम उठाने की क्षमता की कमी।

3. निवारण हेतु ठोस रणनीतिक उपाय (आगे की राह):

  • व्यावसायिक शिक्षा का अनिवार्य अंग (NEP 2020): स्कूली स्तर से ही वोकेशनल ट्रेनिंग और इंटर्नशिप को जोड़ना।
  • एमएसएमई (MSME) एवं 'मेक इन इंडिया' को प्रोत्साहन: छोटे और मध्यम उद्योगों को सस्ता ऋण व कर-छूट देकर स्थानीय स्तर पर लाखों रोजगार सृजित करना।
  • मध्य प्रदेश सरकार के अभिनव प्रयास:
    • मुख्यमंत्री सीखो-कमाओ योजना (MMSKY): उद्योगों में कार्य-प्रशिक्षण के साथ ₹8,000 से ₹10,000 मासिक मानदेय।
    • मुख्यमंत्री उद्यम क्रांति योजना: युवाओं को स्वरोजगार हेतु ₹50 लाख तक का कोलेटरल-फ्री ऋण व 3% ब्याज अनुदान।
    • एक जिला एक उत्पाद (ODOP): स्थानीय हस्तशिल्प और कृषि उत्पादों के क्लस्टर बनाकर ग्रामीण रोजगार को बढ़ावा।

4. निष्कर्ष:
'नौकरी मांगने वाले' से 'नौकरी देने वाले उद्यमी' का निर्माण करना ही बेरोजगारी का स्थायी समाधान है। जब प्रत्येक हाथ को हुनर और काम मिलेगा, तभी देश आत्मनिर्भर बनेगा और 'विकसित भारत @2047' का स्वप्न साकार होगा।

In English (Question & Model Answer)

निम्नलिखित विषय पर लगभग 250 शब्दों में निबंध लिखिए : "बेरोजगारी की समस्या : कारण एवं निवारण"

[Note for English Medium Aspirants]: As per official MPPSC Examination Rules, Paper 6 (Hindi Essay and Administrative Drafting / हिन्दी निबंध एवं प्रारूप लेखन) must be attempted exclusively in Hindi (Devanagari script) by all candidates regardless of their opted medium for GS1–GS4. Answers written in English are not evaluated in the actual examination. The authentic Hindi model answer is provided below for your preparation.

बेरोजगारी की समस्या : कारण एवं निवारण: संरचनात्मक चुनौतियाँ, कौशल अंतराल एवं रोजगार सृजन की रणनीतियाँ

"बेरोजगारी केवल आर्थिक नुकसान नहीं है, बल्कि युवा शक्ति के सपनों का हनन और समाज में असंतोष की जननी है; युवाओं को हुनर और काम देना ही राष्ट्र-निर्माण का मूल आधार है।"

1. प्रस्तावना एवं जनसांख्यिकीय लाभांश:
बेरोजगारी उस स्थिति को कहते हैं जिसमें कोई सक्षम और इच्छुक व्यक्ति प्रचलित मजदूरी दर पर रोजगार प्राप्त करने में असमर्थ रहता है। भारत आज 65% युवा आबादी के साथ विश्व का सबसे युवा देश है। यह युवा ऊर्जा यदि उत्पादक कार्यों में लगे तो देश आर्थिक महाशक्ति बन सकता है, किन्तु रोजगार के अभाव में यही जनसांख्यिकीय लाभांश सामाजिक संकट बन सकता है।

2. बेरोजगारी के प्रमुख कारण:

  • कौशल का अभाव एवं दोषपूर्ण शिक्षा प्रणाली: महाविद्यालयीन डिग्रियों का केवल सैद्धांतिक होना और आधुनिक उद्योगों (AI, कोडिंग, डेटा साइंस, ऑटोमेशन) की मांग के अनुरूप व्यावहारिक कौशल न होना।
  • कृषि में प्रच्छन्न (छिपी हुई) बेरोजगारी: आवश्यकता से अधिक लोगों का कृषि पर निर्भर होना, जिससे उनकी सीमांत उत्पादकता शून्य रहती है।
  • श्रम-प्रधान विनिर्माण का धीमा विकास: कपड़ा, चमड़ा, खिलौना और खाद्य प्रसंस्करण जैसे अधिक रोजगार देने वाले उद्योगों का पर्याप्त विस्तार न होना।
  • स्वरोजगार हेतु पूंजी व जोखिम उठाने की क्षमता की कमी।

3. निवारण हेतु ठोस रणनीतिक उपाय (आगे की राह):

  • व्यावसायिक शिक्षा का अनिवार्य अंग (NEP 2020): स्कूली स्तर से ही वोकेशनल ट्रेनिंग और इंटर्नशिप को जोड़ना।
  • एमएसएमई (MSME) एवं 'मेक इन इंडिया' को प्रोत्साहन: छोटे और मध्यम उद्योगों को सस्ता ऋण व कर-छूट देकर स्थानीय स्तर पर लाखों रोजगार सृजित करना।
  • मध्य प्रदेश सरकार के अभिनव प्रयास:
    • मुख्यमंत्री सीखो-कमाओ योजना (MMSKY): उद्योगों में कार्य-प्रशिक्षण के साथ ₹8,000 से ₹10,000 मासिक मानदेय।
    • मुख्यमंत्री उद्यम क्रांति योजना: युवाओं को स्वरोजगार हेतु ₹50 लाख तक का कोलेटरल-फ्री ऋण व 3% ब्याज अनुदान।
    • एक जिला एक उत्पाद (ODOP): स्थानीय हस्तशिल्प और कृषि उत्पादों के क्लस्टर बनाकर ग्रामीण रोजगार को बढ़ावा।

4. निष्कर्ष:
'नौकरी मांगने वाले' से 'नौकरी देने वाले उद्यमी' का निर्माण करना ही बेरोजगारी का स्थायी समाधान है। जब प्रत्येक हाथ को हुनर और काम मिलेगा, तभी देश आत्मनिर्भर बनेगा और 'विकसित भारत @2047' का स्वप्न साकार होगा।

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