निम्नलिखित विषय पर लगभग 250 शब्दों में निबंध लिखिए : "भारतीय नारी : तब और अब"
भारतीय नारी : तब और अब: वैदिक गरिमा, मध्यकालीन अंधकार एवं 21वीं सदी में 'नारी शक्ति' का युगांतरकारी जागरण
"यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः।
यत्रैतास्तु न पूज्यन्ते सर्वास्तत्राफलाः क्रियाः॥" — मनुस्मृति
"नारी अब 'अबला' नहीं, बल्कि 'सबला' बनकर आकाश से लेकर पाताल तक राष्ट्र निर्माण का नेतृत्व करने वाली 'नारी शक्ति' है।"
1. प्रस्तावना एवं ऐतिहासिक यात्रा:
भारतीय समाज में नारी की स्थिति का इतिहास अत्यंत गौरवशाली, उतार-चढ़ाव भरा और प्रेरणादायी रहा है। वैदिक काल की सर्वोच्च विदुषी प्रतिष्ठा से लेकर मध्यकाल के रूढ़िवादी बंधनों को तोड़ते हुए आज 21वीं सदी में भारतीय नारी ने 'महिला विकास' (Women Development) से आगे बढ़कर 'महिला-नेतृत्व वाले विकास' (Women-Led Development) का परचम लहराया है।
2. ऐतिहासिक अतीत ('तब' - विदुषी से परतंत्रता का दौर):
- वैदिक काल का स्वर्णिम युग: नारी को 'विदुषी' और 'सहधर्मिणी' का दर्जा। गार्गी (जिन्होंने महर्षि याज्ञवल्क्य को शास्त्रार्थ की चुनौती दी), मैत्रेयी, लोपामुद्रा और घोषा जैसी विदुषियों को शिक्षा और उपनयन संस्कार का पूर्ण अधिकार था।
- मध्यकालीन पतन: विदेशी आक्रमणों और सामंती मानसिकता के कारण पर्दा प्रथा, सती प्रथा, बाल विवाह और अशिक्षा की बेड़ियों में नारी को चारदीवारी में कैद कर 'अबला' बना दिया गया।
- स्वतंत्रता संग्राम की क्रांति: महारानी लक्ष्मीबाई, सावित्रीबाई फुले और सरोजिनी नायडू ने समाज सुधार और स्वाधीनता की अलख जगाई।
3. समकालीन वर्तमान ('अब' - आत्मनिर्भर और सशक्त नारी शक्ति):
- संवैधानिक एवं राजनीतिक शिखर: 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' (106वां संविधान संशोधन) द्वारा संसद व विधानसभाओं में 33% आरक्षण; माननीया द्रौपदी मुर्मू जी का देश के सर्वोच्च पद (राष्ट्रपति) पर आसीन होना; तथा मध्य प्रदेश की पंचायतों में 50% महिला आरक्षण।
- अग्रिम मोर्चों पर शौर्य एवं विज्ञान: राफेल और सुखोई जैसे लड़ाकू विमान उड़ाने वाली महिला फाइटर पायलट, युद्धपोतों की कमान, तथा इसरो (ISRO) में चंद्रयान-3 की सफलता में नारी वैज्ञानिकों ('रॉकेट वुमन') का नेतृत्व।
- आर्थिक स्वावलंबन एवं लखपति दीदी: स्वयं सहायता समूहों (SHGs) की लाखों 'लखपति दीदियां' तथा मध्य प्रदेश की ऐतिहासिक 'मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना' जिसने नारी को परिवार में आर्थिक रूप से स्वाभिमानी बनाया।
4. निष्कर्ष:
आज की भारतीय नारी परंपरा और आधुनिकता का अद्भुत संगम है। जब देश की आधी आबादी को समान सम्मान, सुरक्षा और अवसर प्राप्त होंगे, तभी समाज का सर्वांगीण विकास होगा और 'नारी शक्ति' के इस दिव्य तेज से भारत पुनः विश्वगुरु बनकर 'विकसित भारत @2047' के स्वप्न को साकार करेगा।
In English (Question & Model Answer)
निम्नलिखित विषय पर लगभग 250 शब्दों में निबंध लिखिए : "भारतीय नारी : तब और अब"
[Note for English Medium Aspirants]: As per official MPPSC Examination Rules, Paper 6 (Hindi Essay and Administrative Drafting / हिन्दी निबंध एवं प्रारूप लेखन) must be attempted exclusively in Hindi (Devanagari script) by all candidates regardless of their opted medium for GS1–GS4. Answers written in English are not evaluated in the actual examination. The authentic Hindi model answer is provided below for your preparation.
भारतीय नारी : तब और अब: वैदिक गरिमा, मध्यकालीन अंधकार एवं 21वीं सदी में 'नारी शक्ति' का युगांतरकारी जागरण
"यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः।
यत्रैतास्तु न पूज्यन्ते सर्वास्तत्राफलाः क्रियाः॥" — मनुस्मृति
"नारी अब 'अबला' नहीं, बल्कि 'सबला' बनकर आकाश से लेकर पाताल तक राष्ट्र निर्माण का नेतृत्व करने वाली 'नारी शक्ति' है।"
1. प्रस्तावना एवं ऐतिहासिक यात्रा:
भारतीय समाज में नारी की स्थिति का इतिहास अत्यंत गौरवशाली, उतार-चढ़ाव भरा और प्रेरणादायी रहा है। वैदिक काल की सर्वोच्च विदुषी प्रतिष्ठा से लेकर मध्यकाल के रूढ़िवादी बंधनों को तोड़ते हुए आज 21वीं सदी में भारतीय नारी ने 'महिला विकास' (Women Development) से आगे बढ़कर 'महिला-नेतृत्व वाले विकास' (Women-Led Development) का परचम लहराया है।
2. ऐतिहासिक अतीत ('तब' - विदुषी से परतंत्रता का दौर):
- वैदिक काल का स्वर्णिम युग: नारी को 'विदुषी' और 'सहधर्मिणी' का दर्जा। गार्गी (जिन्होंने महर्षि याज्ञवल्क्य को शास्त्रार्थ की चुनौती दी), मैत्रेयी, लोपामुद्रा और घोषा जैसी विदुषियों को शिक्षा और उपनयन संस्कार का पूर्ण अधिकार था।
- मध्यकालीन पतन: विदेशी आक्रमणों और सामंती मानसिकता के कारण पर्दा प्रथा, सती प्रथा, बाल विवाह और अशिक्षा की बेड़ियों में नारी को चारदीवारी में कैद कर 'अबला' बना दिया गया।
- स्वतंत्रता संग्राम की क्रांति: महारानी लक्ष्मीबाई, सावित्रीबाई फुले और सरोजिनी नायडू ने समाज सुधार और स्वाधीनता की अलख जगाई।
3. समकालीन वर्तमान ('अब' - आत्मनिर्भर और सशक्त नारी शक्ति):
- संवैधानिक एवं राजनीतिक शिखर: 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' (106वां संविधान संशोधन) द्वारा संसद व विधानसभाओं में 33% आरक्षण; माननीया द्रौपदी मुर्मू जी का देश के सर्वोच्च पद (राष्ट्रपति) पर आसीन होना; तथा मध्य प्रदेश की पंचायतों में 50% महिला आरक्षण।
- अग्रिम मोर्चों पर शौर्य एवं विज्ञान: राफेल और सुखोई जैसे लड़ाकू विमान उड़ाने वाली महिला फाइटर पायलट, युद्धपोतों की कमान, तथा इसरो (ISRO) में चंद्रयान-3 की सफलता में नारी वैज्ञानिकों ('रॉकेट वुमन') का नेतृत्व।
- आर्थिक स्वावलंबन एवं लखपति दीदी: स्वयं सहायता समूहों (SHGs) की लाखों 'लखपति दीदियां' तथा मध्य प्रदेश की ऐतिहासिक 'मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना' जिसने नारी को परिवार में आर्थिक रूप से स्वाभिमानी बनाया।
4. निष्कर्ष:
आज की भारतीय नारी परंपरा और आधुनिकता का अद्भुत संगम है। जब देश की आधी आबादी को समान सम्मान, सुरक्षा और अवसर प्राप्त होंगे, तभी समाज का सर्वांगीण विकास होगा और 'नारी शक्ति' के इस दिव्य तेज से भारत पुनः विश्वगुरु बनकर 'विकसित भारत @2047' के स्वप्न को साकार करेगा।