मुख्य›MPPSC Mains (हिन्दी)›सामान्य अध्ययन द्वितीय प्रश्नपत्र›खण्ड-अ: राजनीति विज्ञान›इकाई-1 संविधान एवं मौलिक अधिकार›भारतीय संविधान - निर्माण, विशेषताएँ, मूल ढाँचा एवं प्रमुख संशोधन›शक्ति-पृथक्करण का सिद्धान्त पर 20 शब्दों में संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।

शक्ति-पृथक्करण का सिद्धान्त पर 20 शब्दों में संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।

20163M
आदर्श उत्तर

शक्ति-पृथक्करण का सिद्धांत (Separation of Powers):

  • प्रवर्तक: फ्रांसीसी दार्शनिक मॉन्टेस्क्यू द्वारा अपनी प्रसिद्ध पुस्तक 'द स्पिरिट ऑफ लॉज' (1748) में प्रतिपादित।
  • सिद्धांत: शासन की निरंकुशता रोकने व नागरिक स्वतंत्रता की रक्षा हेतु शासन की तीनों शक्तियों—विधायिका, कार्यपालिका तथा न्यायपालिका को एक-दूसरे से स्वतंत्र एवं पृथक होना चाहिए (नियंत्रण एवं संतुलन)।

In English (Question & Model Answer)

Write a short note on Theory of separation of powers in 20 words.

Theory of Separation of Powers (शक्ति-पृथक्करण का सिद्धांत):

  • Philosophical Origin: Formulated by French philosopher Montesquieu in his treatise The Spirit of the Laws (1748).
  • Doctrine: State power must be divided into three independent branches—Legislature, Executive, and Judiciary—with mutual checks and balances to prevent tyranny and protect civil liberty.
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