मुख्य›MPPSC Mains (हिन्दी)›सामान्य अध्ययन चतुर्थ प्रश्नपत्र›खण्ड-अ: दर्शनशास्त्र, मनोविज्ञान, लोक प्रशासन एवं केस स्टडी›इकाई-1 भारतीय षड्दर्शन, दार्शनिक/विचारक, समाज सुधारक›स्वामी दयानंद सरस्वती, स्वामी विवेकानंद, महर्षि अरविन्द, सर्वपल्ली राधाकृष्णन, डॉ. भीमराव आम्बेडकर, पंडित दीनदयाल उपाध्याय›भारतीय समाज के उत्थान में स्वामी दयानंद सरस्वती के योगदान का वर्णन

भारतीय समाज के उत्थान में स्वामी दयानंद सरस्वती के योगदान का वर्णन कीजिए ।

20166M
आदर्श उत्तर

भारतीय समाज के पुनरुत्थान में स्वामी दयानंद सरस्वती का योगदान:

  1. आर्य समाज की स्थापना (1875): वैदिक एकेश्वरवाद की पुनःस्थापना कर पाखंड, अंधविश्वास, छुआछूत और पुरोहिताई शोषण पर निर्णायक प्रहार किया।
  2. स्त्री शिक्षा एवं विधवा विवाह: कन्या गुरुकुलों की स्थापना की तथा महिलाओं को यज्ञोपवीत व शिक्षा का समान अधिकार दिलाया।
  3. जाति-भेद का खंडन: जन्म-आधारित जातिवाद को नकारकर 'गुण-कर्म-स्वभाव' आधारित व्यवस्था का समर्थन किया।
  4. राष्ट्रीय चेतना व स्वदेशी: सर्वप्रथम 'स्वराज' शब्द का प्रयोग किया और स्वदेशी वस्तुओं व स्वभाषा (हिंदी) के प्रयोग पर बल दिया।

In English (Question & Model Answer)

Describe Swami Dayanand Saraswati's contribution to upliftment of Indian society.

Contributions of Swami Dayananda Saraswati to the Upliftment of Indian Society:

  1. Founding of Arya Samaj (1875): Re-established pure Vedic monotheism, demolishing superstitious priestcraft, idolatry, and untouchability.
  2. Female Emancipation & Education: Pioneered Gurukuls for girls and legalized widow remarriage.
  3. Rejection of Birth-Based Caste: Propounded merit-based social stratification anchored in character and conduct (Guna-Karma).
  4. Father of 'Swaraj' & Swadeshi: First modern reformer to coin the political ideal of 'Swaraj' and promote indigenous manufacturing and Hindi.
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