स्पष्ट कीजिए कि सरकारी कामकाज में प्रारूप का क्या महत्त्व है ? प्रारूप तैयार करते समय किन बातों का ध्यान अपेक्षित है ?
आदर्श उत्तर
शासकीय कामकाज में 'प्रारूप लेखन' (Drafting) का महत्त्व एवं नियम:
1. प्रारूप का प्रशासनिक महत्त्व:
- त्रुटिहीनता एवं शुद्धता: किसी भी शासकीय पत्र के अंतिम निर्गमन (Issue) से पूर्व नियमों, तथ्यों, तिथियों और भाषा की प्रामाणिक जाँच प्रारूप के माध्यम से सुनिश्चित होती है।
- उच्चाधिकारियों का अनुमोदन: सक्षम अधिकारी प्रारूप में आवश्यक संशोधन या निर्देश दर्ज कर उसे अनुमोदित करते हैं, जिससे विधिक विवाद नहीं होते।
- प्रशासनिक रिकॉर्ड: पत्रावली पर प्रारूप सुरक्षित रहने से भविष्य के संदर्भ और ऑडिट हेतु पुख्ता साक्ष्य उपलब्ध रहता है।
2. प्रारूप तैयार करने के 4 सामान्य नियम:
- निश्चित एवं मानक ढाँचा: पत्र का प्रकार (शासकीय पत्र, कार्यालय ज्ञापन, परिपत्र, अधिसूचना आदि) स्पष्ट हो तथा पत्रांक, दिनांक, विषय व संदर्भ का सही अंकन हो।
- औपचारिक एवं स्पष्ट भाषा: क्लिष्ट, काव्यात्मक या संदिग्ध शब्दों से बचते हुए सरल, व्याकरण-सम्मत, तथ्यपरक एवं अन्य पुरुष शैली में लिखा जाए।
- अनुच्छेदों का क्रमबद्ध विभाजन: यदि विषय विस्तृत हो, तो प्रथम प्रस्तर को छोड़कर शेष अनुच्छेदों को 2, 3, 4 आदि संख्याओं में विभाजित किया जाए।
- संलग्नक (Enclosures) का उल्लेख: पत्र के साथ भेजे जाने वाले दस्तावेजों का बाईं ओर नीचे 'संलग्नक' में स्पष्ट विवरण दिया जाए।
In English (Question & Model Answer)
स्पष्ट कीजिए कि सरकारी कामकाज में प्रारूप का क्या महत्त्व है ? प्रारूप तैयार करते समय किन बातों का ध्यान अपेक्षित है ?
[Note for English Medium Aspirants]: As per official MPPSC Examination Rules, Paper 5 (General Hindi & Grammar / सामान्य हिन्दी एवं व्याकरण) must be attempted exclusively in Hindi (Devanagari script). The authentic Hindi model answer is provided below.
शासकीय कामकाज में 'प्रारूप लेखन' (Drafting) का महत्त्व एवं नियम:
1. प्रारूप का प्रशासनिक महत्त्व:
- त्रुटिहीनता एवं शुद्धता: किसी भी शासकीय पत्र के अंतिम निर्गमन (Issue) से पूर्व नियमों, तथ्यों, तिथियों और भाषा की प्रामाणिक जाँच प्रारूप के माध्यम से सुनिश्चित होती है।
- उच्चाधिकारियों का अनुमोदन: सक्षम अधिकारी प्रारूप में आवश्यक संशोधन या निर्देश दर्ज कर उसे अनुमोदित करते हैं, जिससे विधिक विवाद नहीं होते।
- प्रशासनिक रिकॉर्ड: पत्रावली पर प्रारूप सुरक्षित रहने से भविष्य के संदर्भ और ऑडिट हेतु पुख्ता साक्ष्य उपलब्ध रहता है।
2. प्रारूप तैयार करने के 4 सामान्य नियम:
- निश्चित एवं मानक ढाँचा: पत्र का प्रकार (शासकीय पत्र, कार्यालय ज्ञापन, परिपत्र, अधिसूचना आदि) स्पष्ट हो तथा पत्रांक, दिनांक, विषय व संदर्भ का सही अंकन हो।
- औपचारिक एवं स्पष्ट भाषा: क्लिष्ट, काव्यात्मक या संदिग्ध शब्दों से बचते हुए सरल, व्याकरण-सम्मत, तथ्यपरक एवं अन्य पुरुष शैली में लिखा जाए।
- अनुच्छेदों का क्रमबद्ध विभाजन: यदि विषय विस्तृत हो, तो प्रथम प्रस्तर को छोड़कर शेष अनुच्छेदों को 2, 3, 4 आदि संख्याओं में विभाजित किया जाए।
- संलग्नक (Enclosures) का उल्लेख: पत्र के साथ भेजे जाने वाले दस्तावेजों का बाईं ओर नीचे 'संलग्नक' में स्पष्ट विवरण दिया जाए।