मुख्य›MPPSC Mains (हिन्दी)›सामान्य हिन्दी एवं व्याकरण›सामान्य हिन्दी एवं व्याकरण›अपठित गद्यांश›कला-जगत के क्षेत्र में नाटक अत्यंत प्राचीन काल से ही सर्वाधिक मनोरम

कला-जगत के क्षेत्र में नाटक अत्यंत प्राचीन काल से ही सर्वाधिक मनोरम और आकर्षण-कला का माध्यम माना जाता रहा है। नाटक के संदर्भ में सुकुमारता और कला-सूक्ष्मता का जो आयोजन होता है, वह आज भी उसे सर्वश्रेष्ठ कला बनाए रखने में सहायक सिद्ध हुआ है। नाटक का शिल्प-विधान और उसकी रचना की बारीकियाँ उसे एक अप्रतिम आकर्षण का विषय बना देती हैं। नाटक के परिप्रेक्ष्य में सबसे प्रमुख बात यह है कि इसका शिल्प एक सामूहिक विधान की तरह होता है। जिसमें नाटककार के साथ-साथ निर्देशक तथा विभिन्न अभिनेताओं का भरपूर सहयोग प्राप्त होता है। इसके साथ-साथ इसमें दर्शक समूह भी अपना महत्त्वपूर्ण सहयोग प्रदान करता है। एक प्रकार से कहा जाए तो नाटक की मंच-प्रस्तुति में इनकी भी अप्रत्यक्ष रूप से ही सही पर महत्त्वपूर्ण भूमिका होती है। इन सबके समवेत प्रयास से ही नाटक की प्रस्तुति संभव है। (i) उपर्युक्त गद्यांश का उपयुक्त शीर्षक दीजिए। (ii) कला-जगत के क्षेत्र में किस विधा को आकर्षक माना गया है ? (iii) नाटक का शिल्प किस प्रकार का होता है ? (iv) नाटक में दर्शक की भूमिका किस प्रकार होती है ? (v) नाटक की प्रस्तुति किस प्रकार संभव है ?

201615M
आदर्श उत्तर

गद्यांश 9(ब) के सभी 5 प्रश्नों के उत्तर:

  1. (i) उपर्युक्त गद्यांश का उपयुक्त शीर्षक:
    नाटक: दृश्य-कला का सामूहिक शिल्प एवं मंच-प्रस्तुति।
  2. (ii) कला-जगत के क्षेत्र में किस विधा को आकर्षक माना गया है?
    कला-जगत के क्षेत्र में 'नाटक' (नाट्य-कला) को प्राचीन काल से ही सर्वाधिक मनोरम, सजीव और आकर्षक विधा माना गया है।
  3. (iii) नाटक का शिल्प किस प्रकार का होता है?
    नाटक का शिल्प एक सामूहिक विधान की तरह होता है, जिसमें नाटककार, निर्देशक, अभिनेता, प्रकाश-संयोजक एवं दर्शक सभी का समन्वित योगदान होता है।
  4. (iv) नाटक में दर्शक की भूमिका किस प्रकार होती है?
    नाटक में दर्शक समूह की भूमिका प्रत्यक्ष सहभागिता एवं रसानुभूति के रूप में अत्यंत महत्वपूर्ण होती है; दर्शक की प्रतिक्रिया ही मंच-प्रस्तुति को जीवंतता प्रदान करती है।
  5. (v) नाटक की प्रस्तुति किस प्रकार संभव है?
    नाटक की सफल प्रस्तुति नाटककार के कथानक, निर्देशक की दृष्टि, अभिनेताओं के जीवंत अभिनय, तकनीकी दल और दर्शक समूह के समवेत (सामूहिक) सहयोग से ही संभव होती है।

In English (Question & Model Answer)

कला-जगत के क्षेत्र में नाटक अत्यंत प्राचीन काल से ही सर्वाधिक मनोरम और आकर्षण-कला का माध्यम माना जाता रहा है। नाटक के संदर्भ में सुकुमारता और कला-सूक्ष्मता का जो आयोजन होता है, वह आज भी उसे सर्वश्रेष्ठ कला बनाए रखने में सहायक सिद्ध हुआ है। नाटक का शिल्प-विधान और उसकी रचना की बारीकियाँ उसे एक अप्रतिम आकर्षण का विषय बना देती हैं। नाटक के परिप्रेक्ष्य में सबसे प्रमुख बात यह है कि इसका शिल्प एक सामूहिक विधान की तरह होता है। जिसमें नाटककार के साथ-साथ निर्देशक तथा विभिन्न अभिनेताओं का भरपूर सहयोग प्राप्त होता है। इसके साथ-साथ इसमें दर्शक समूह भी अपना महत्त्वपूर्ण सहयोग प्रदान करता है। एक प्रकार से कहा जाए तो नाटक की मंच-प्रस्तुति में इनकी भी अप्रत्यक्ष रूप से ही सही पर महत्त्वपूर्ण भूमिका होती है। इन सबके समवेत प्रयास से ही नाटक की प्रस्तुति संभव है। (i) उपर्युक्त गद्यांश का उपयुक्त शीर्षक दीजिए। (ii) कला-जगत के क्षेत्र में किस विधा को आकर्षक माना गया है ? (iii) नाटक का शिल्प किस प्रकार का होता है ? (iv) नाटक में दर्शक की भूमिका किस प्रकार होती है ? (v) नाटक की प्रस्तुति किस प्रकार संभव है ?

[Note for English Medium Aspirants]: As per official MPPSC Examination Rules, Paper 5 (General Hindi & Grammar / सामान्य हिन्दी एवं व्याकरण) must be attempted exclusively in Hindi (Devanagari script). The authentic Hindi model answer is provided below.

गद्यांश 9(ब) के सभी 5 प्रश्नों के उत्तर:

  1. (i) उपर्युक्त गद्यांश का उपयुक्त शीर्षक:
    नाटक: दृश्य-कला का सामूहिक शिल्प एवं मंच-प्रस्तुति।
  2. (ii) कला-जगत के क्षेत्र में किस विधा को आकर्षक माना गया है?
    कला-जगत के क्षेत्र में 'नाटक' (नाट्य-कला) को प्राचीन काल से ही सर्वाधिक मनोरम, सजीव और आकर्षक विधा माना गया है।
  3. (iii) नाटक का शिल्प किस प्रकार का होता है?
    नाटक का शिल्प एक सामूहिक विधान की तरह होता है, जिसमें नाटककार, निर्देशक, अभिनेता, प्रकाश-संयोजक एवं दर्शक सभी का समन्वित योगदान होता है।
  4. (iv) नाटक में दर्शक की भूमिका किस प्रकार होती है?
    नाटक में दर्शक समूह की भूमिका प्रत्यक्ष सहभागिता एवं रसानुभूति के रूप में अत्यंत महत्वपूर्ण होती है; दर्शक की प्रतिक्रिया ही मंच-प्रस्तुति को जीवंतता प्रदान करती है।
  5. (v) नाटक की प्रस्तुति किस प्रकार संभव है?
    नाटक की सफल प्रस्तुति नाटककार के कथानक, निर्देशक की दृष्टि, अभिनेताओं के जीवंत अभिनय, तकनीकी दल और दर्शक समूह के समवेत (सामूहिक) सहयोग से ही संभव होती है।
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