निम्नलिखित विषय पर लगभग 250 शब्दों में निबंध लिखिए : "बढ़ते शहरीकरण से उत्पन्न समस्याएँ"
बढ़ते शहरीकरण से उत्पन्न समस्याएँ: अनियंत्रित विस्तार, बुनियादी ढाँचे का संकट एवं संधारणीय समाधान
"अनियोजित और अंधाधुंध शहरीकरण शहरों को 'आर्थिक विकास के इंजन' से बदलकर 'पर्यावरणीय और सामाजिक समस्याओं का नरक' बना देता है।"
1. प्रस्तावना एवं शहरीकरण का स्वरूप:
शहरीकरण आधुनिक आर्थिक विकास की स्वाभाविक प्रक्रिया है। भारत में वर्तमान में लगभग 35% आबादी शहरों में निवास कर रही है, जिसके 2047 तक 50% से अधिक होने का अनुमान है। बेहतर शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार की तलाश में गाँवों से शहरों की ओर होने वाले अनियंत्रित और अनियोजित पलायन ने हमारे शहरों को गंभीर संकट के मुहाने पर लाकर खड़ा कर दिया है।
2. बढ़ते शहरीकरण की प्रमुख समस्याएँ:
- कच्ची बस्तियों (Slums) का प्रसार एवं आवास संकट: महंगे मकानों के कारण लाखों कामगार अत्यंत अमानवीय, तंग और अस्वच्छ झुग्गी-झोपड़ियों में रहने को विवश हैं, जहाँ बुनियादी सुविधाओं का घोर अभाव है।
- पेयजल एवं जल-निकासी का संकट: भूजल स्तर का पाताल में चले जाना, टैंकर माफिया का उभार, तथा तालाबों पर अवैध कब्जों के कारण हल्की बारिश में भी शहरों में भयानक जलभराव (Urban Flooding)।
- कचरा प्रबंधन एवं वायु प्रदूषण: शहरों के बाहर कचरे के विशाल पहाड़ों (Landfills) का बनना, वाहनों के धुएं से दमघोंटू हवा (PM2.5), और अस्थमा व फेफड़ों के रोगों में वृद्धि।
- यातायात जाम (Traffic Congestion): सड़कों पर वाहनों के अंतहीन काफिले से ईंधन की बर्बादी और मानसिक तनाव।
- एकाकीपन एवं अपराध: संयुक्त परिवारों के टूटने से महानगरीय जीवन में अवसाद, अकेलापन और साइबर व स्ट्रीट क्राइम्स में वृद्धि।
3. समाधान हेतु रणनीतिक रोडमैप (आगे की राह):
- इंदौर के स्वच्छता मॉडल का राष्ट्रव्यापी विस्तार: शत-प्रतिशत कचरा पृथक्करण, बायो-सीएनजी प्लांट (गोवर्धन) और सीवरेज का वैज्ञानिक पुनर्चक्रण।
- सार्वजनिक परिवहन का विस्तार: भोपाल-इंदौर मेट्रो रेल तथा इलेक्ट्रिक बसों (PM-eBus) को बढ़ावा देकर निजी वाहनों पर निर्भरता कम करना।
- 'श्यामा प्रसाद मुखर्जी रूर्बन मिशन': ग्रामीण अंचलों में शहरी स्तर की सुविधाएं और उद्योग लगाकर शहरों की ओर पलायन को रोकना।
4. निष्कर्ष:
शहरीकरण को समस्या नहीं, बल्कि सुशासन और वैज्ञानिक नगर नियोजन (Smart City Planning) के माध्यम से समृद्धि का साधन बनाया जाना चाहिए। हरित, स्वच्छ और रहने योग्य (Liveable) शहर ही 'विकसित भारत @2047' की मजबूत रीढ़ बनेंगे।
In English (Question & Model Answer)
निम्नलिखित विषय पर लगभग 250 शब्दों में निबंध लिखिए : "बढ़ते शहरीकरण से उत्पन्न समस्याएँ"
[Note for English Medium Aspirants]: As per official MPPSC Examination Rules, Paper 6 (Hindi Essay and Administrative Drafting / हिन्दी निबंध एवं प्रारूप लेखन) must be attempted exclusively in Hindi (Devanagari script) by all candidates regardless of their opted medium for GS1–GS4. Answers written in English are not evaluated in the actual examination. The authentic Hindi model answer is provided below for your preparation.
बढ़ते शहरीकरण से उत्पन्न समस्याएँ: अनियंत्रित विस्तार, बुनियादी ढाँचे का संकट एवं संधारणीय समाधान
"अनियोजित और अंधाधुंध शहरीकरण शहरों को 'आर्थिक विकास के इंजन' से बदलकर 'पर्यावरणीय और सामाजिक समस्याओं का नरक' बना देता है।"
1. प्रस्तावना एवं शहरीकरण का स्वरूप:
शहरीकरण आधुनिक आर्थिक विकास की स्वाभाविक प्रक्रिया है। भारत में वर्तमान में लगभग 35% आबादी शहरों में निवास कर रही है, जिसके 2047 तक 50% से अधिक होने का अनुमान है। बेहतर शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार की तलाश में गाँवों से शहरों की ओर होने वाले अनियंत्रित और अनियोजित पलायन ने हमारे शहरों को गंभीर संकट के मुहाने पर लाकर खड़ा कर दिया है।
2. बढ़ते शहरीकरण की प्रमुख समस्याएँ:
- कच्ची बस्तियों (Slums) का प्रसार एवं आवास संकट: महंगे मकानों के कारण लाखों कामगार अत्यंत अमानवीय, तंग और अस्वच्छ झुग्गी-झोपड़ियों में रहने को विवश हैं, जहाँ बुनियादी सुविधाओं का घोर अभाव है।
- पेयजल एवं जल-निकासी का संकट: भूजल स्तर का पाताल में चले जाना, टैंकर माफिया का उभार, तथा तालाबों पर अवैध कब्जों के कारण हल्की बारिश में भी शहरों में भयानक जलभराव (Urban Flooding)।
- कचरा प्रबंधन एवं वायु प्रदूषण: शहरों के बाहर कचरे के विशाल पहाड़ों (Landfills) का बनना, वाहनों के धुएं से दमघोंटू हवा (PM2.5), और अस्थमा व फेफड़ों के रोगों में वृद्धि।
- यातायात जाम (Traffic Congestion): सड़कों पर वाहनों के अंतहीन काफिले से ईंधन की बर्बादी और मानसिक तनाव।
- एकाकीपन एवं अपराध: संयुक्त परिवारों के टूटने से महानगरीय जीवन में अवसाद, अकेलापन और साइबर व स्ट्रीट क्राइम्स में वृद्धि।
3. समाधान हेतु रणनीतिक रोडमैप (आगे की राह):
- इंदौर के स्वच्छता मॉडल का राष्ट्रव्यापी विस्तार: शत-प्रतिशत कचरा पृथक्करण, बायो-सीएनजी प्लांट (गोवर्धन) और सीवरेज का वैज्ञानिक पुनर्चक्रण।
- सार्वजनिक परिवहन का विस्तार: भोपाल-इंदौर मेट्रो रेल तथा इलेक्ट्रिक बसों (PM-eBus) को बढ़ावा देकर निजी वाहनों पर निर्भरता कम करना।
- 'श्यामा प्रसाद मुखर्जी रूर्बन मिशन': ग्रामीण अंचलों में शहरी स्तर की सुविधाएं और उद्योग लगाकर शहरों की ओर पलायन को रोकना।
4. निष्कर्ष:
शहरीकरण को समस्या नहीं, बल्कि सुशासन और वैज्ञानिक नगर नियोजन (Smart City Planning) के माध्यम से समृद्धि का साधन बनाया जाना चाहिए। हरित, स्वच्छ और रहने योग्य (Liveable) शहर ही 'विकसित भारत @2047' की मजबूत रीढ़ बनेंगे।