निम्नलिखित विषय पर लगभग 1000 शब्दों में निबंध लिखिए : "राष्ट्रवाद और वसुधैव कुटुम्बकम् की अवधारणा"
राष्ट्रवाद और वसुधैव कुटुम्बकम् की अवधारणा: संप्रभु देशभक्ति, वैश्विक बंधुत्व, जी-20 की कूटनीति एवं 'विश्व बंधु' भारत
"अयं निजः परो वेति गणना लघुचेतसाम्।
उदारचरितानां तु वसुधैव कुटुम्बकम्॥" — महोपनिषद् (4.71)
(यह मेरा है और यह पराया है—ऐसी संकीर्ण गणना छोटे मन वाले करते हैं; उदार हृदय वाले महापुरुषों के लिए तो यह संपूर्ण पृथ्वी ही एक परिवार है।)
"मेरा राष्ट्रवाद संकीर्ण या आक्रामक नहीं है; यह वह राष्ट्रवाद है जो किसी अन्य देश का अहित किए बिना संपूर्ण मानवता के कल्याण हेतु समर्पित है।" — महात्मा गांधी
1. प्रस्तावना एवं वैचारिक समन्वय:
पश्चिमी राजनीतिक चिंतन में 'राष्ट्रवाद' (Nationalism) को प्रायः संकीर्ण, सीमा-बद्ध, आक्रामक और सैन्यवादी अवधारणा माना गया है, जिसके कारण इतिहास में साम्राज्यवाद, उपनिवेशवाद और दो भयानक विश्व युद्ध हुए। इसके विपरीत, भारत का राष्ट्रवाद राजनीतिक न होकर 'सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक राष्ट्रवाद' है। भारतीय मनीषा में अपनी मातृभूमि के प्रति अनन्य देशभक्ति और संपूर्ण विश्व के प्रति बंधुत्व की भावना अर्थात 'वसुधैव कुटुम्बकम्' में कोई विरोध या द्वन्द्व नहीं है, बल्कि दोनों एक-दूसरे के पूरक हैं।
2. भारतीय चिंतन में राष्ट्रवाद और वैश्विक बंधुत्व का दार्शनिक आधार:
- चेतना का क्रमिक विस्तार: भारतीय दर्शन में चेतना का विस्तार 'व्यष्टि' (व्यक्ति) से 'समष्टि' (परिवार/समाज), समष्टि से 'राष्ट्र' (देश) और राष्ट्र से 'सृष्टि' (संपूर्ण ब्रह्मांड) तक होता है। राष्ट्रप्रेम विश्वप्रेम की पहली सीढ़ी है।
- स्वामी विवेकानंद का उद्घोष (शिकागो 1893): उन्होंने अमेरिका में "मेरे अमेरिकी भाइयों और बहनों" कहकर न केवल संपूर्ण मानवता को परिवार माना, बल्कि भारत के आध्यात्मिक राष्ट्रवाद की पताका फहराई।
- रवींद्रनाथ टैगोर एवं श्री अरविंद का दर्शन: उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत का राष्ट्रवाद मानवता की सेवा का साधन है, किसी अन्य राष्ट्र के दमन का नहीं।
3. समकालीन भारतीय कूटनीति एवं वैश्विक नेतृत्व में सजीव प्रमाण:
- 1. भारत की जी-20 अध्यक्षता (2023) — 'एक पृथ्वी, एक परिवार, एक भविष्य': भारत ने 'वसुधैव कुटुम्बकम्' को जी-20 का आधिकारिक ध्येयवाक्य बनाया तथा 55 देशों के 'अफ्रीकी संघ' (African Union) को जी-20 का स्थायी सदस्य बनाकर समावेशी वैश्विक नेतृत्व का इतिहास रचा।
- 2. 'वैक्सीन मैत्री' एवं महामारी में जीवन रक्षा: कोरोना संकट के समय भारत ने अपने नागरिकों के साथ-साथ 100 से अधिक निर्धन व विकासशील देशों को 30 करोड़ से अधिक जीवनरक्षक टीके मुफ्त व रियायती दरों पर उपलब्ध कराए।
- 3. 'ग्लोबल साउथ' की सशक्त आवाज: अविकसित व विकासशील देशों के हितों, खाद्य सुरक्षा और जलवायु न्याय (Climate Justice) की पुरजोर वकालत।
- 4. पर्यावरण संरक्षण एवं 'मिशन लाइफ': 'अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन' (ISA) और 'एक सूर्य, एक विश्व, एक ग्रिड' (OSOWOG) द्वारा संपूर्ण पृथ्वी को हरित ऊर्जा से जोड़ना।
- 5. संकट में 'प्रथम प्रतिक्रियाकर्ता' (First Responder): तुर्की-सीरिया भूकंप में 'ऑपरेशन दोस्त', नेपाल भूकंप में 'ऑपरेशन मैत्री' और म्यांमार में 'ऑपरेशन करुणा' द्वारा निःस्वार्थ मानवीय सहायता।
4. व्यावहारिक राष्ट्रनीति: 'राष्ट्रहित सर्वोपरि, विश्व कल्याण सर्वदा':
- अपनी सीमाओं और संप्रभुता की सुरक्षा हेतु आतंकवाद के विरुद्ध 'जीरो टॉलरेंस' तथा सैन्य रूप से अजेय बनना।
- 'आत्मनिर्भर भारत' के माध्यम से देश को आर्थिक व तकनीकी रूप से शक्तिशाली बनाकर विश्व कल्याण में अधिक योगदान देना।
5. निष्कर्ष:
भारतीय राष्ट्रवाद अहंकार का प्रतीक नहीं, बल्कि विश्व-कल्याण की साधना है। जब भारत शक्तिशाली होगा, तो वह किसी पर आक्रमण नहीं करेगा, बल्कि शांति, करुणा और न्याय की स्थापना करेगा। राष्ट्रप्रेम और वैश्विक बंधुत्व के इस पावन समन्वय के साथ भारत आज 'विश्व बंधु' और 'विश्वगुरु' के रूप में प्रतिष्ठित हो रहा है, जो 'विकसित भारत @2047' के निर्माण का सर्वोत्तम नैतिक मार्ग है।
In English (Question & Model Answer)
निम्नलिखित विषय पर लगभग 1000 शब्दों में निबंध लिखिए : "राष्ट्रवाद और वसुधैव कुटुम्बकम् की अवधारणा"
[Note for English Medium Aspirants]: As per official MPPSC Examination Rules, Paper 6 (Hindi Essay and Administrative Drafting / हिन्दी निबंध एवं प्रारूप लेखन) must be attempted exclusively in Hindi (Devanagari script) by all candidates regardless of their opted medium for GS1–GS4. Answers written in English are not evaluated in the actual examination. The authentic Hindi model answer is provided below for your preparation.
राष्ट्रवाद और वसुधैव कुटुम्बकम् की अवधारणा: संप्रभु देशभक्ति, वैश्विक बंधुत्व, जी-20 की कूटनीति एवं 'विश्व बंधु' भारत
"अयं निजः परो वेति गणना लघुचेतसाम्।
उदारचरितानां तु वसुधैव कुटुम्बकम्॥" — महोपनिषद् (4.71)
(यह मेरा है और यह पराया है—ऐसी संकीर्ण गणना छोटे मन वाले करते हैं; उदार हृदय वाले महापुरुषों के लिए तो यह संपूर्ण पृथ्वी ही एक परिवार है।)
"मेरा राष्ट्रवाद संकीर्ण या आक्रामक नहीं है; यह वह राष्ट्रवाद है जो किसी अन्य देश का अहित किए बिना संपूर्ण मानवता के कल्याण हेतु समर्पित है।" — महात्मा गांधी
1. प्रस्तावना एवं वैचारिक समन्वय:
पश्चिमी राजनीतिक चिंतन में 'राष्ट्रवाद' (Nationalism) को प्रायः संकीर्ण, सीमा-बद्ध, आक्रामक और सैन्यवादी अवधारणा माना गया है, जिसके कारण इतिहास में साम्राज्यवाद, उपनिवेशवाद और दो भयानक विश्व युद्ध हुए। इसके विपरीत, भारत का राष्ट्रवाद राजनीतिक न होकर 'सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक राष्ट्रवाद' है। भारतीय मनीषा में अपनी मातृभूमि के प्रति अनन्य देशभक्ति और संपूर्ण विश्व के प्रति बंधुत्व की भावना अर्थात 'वसुधैव कुटुम्बकम्' में कोई विरोध या द्वन्द्व नहीं है, बल्कि दोनों एक-दूसरे के पूरक हैं।
2. भारतीय चिंतन में राष्ट्रवाद और वैश्विक बंधुत्व का दार्शनिक आधार:
- चेतना का क्रमिक विस्तार: भारतीय दर्शन में चेतना का विस्तार 'व्यष्टि' (व्यक्ति) से 'समष्टि' (परिवार/समाज), समष्टि से 'राष्ट्र' (देश) और राष्ट्र से 'सृष्टि' (संपूर्ण ब्रह्मांड) तक होता है। राष्ट्रप्रेम विश्वप्रेम की पहली सीढ़ी है।
- स्वामी विवेकानंद का उद्घोष (शिकागो 1893): उन्होंने अमेरिका में "मेरे अमेरिकी भाइयों और बहनों" कहकर न केवल संपूर्ण मानवता को परिवार माना, बल्कि भारत के आध्यात्मिक राष्ट्रवाद की पताका फहराई।
- रवींद्रनाथ टैगोर एवं श्री अरविंद का दर्शन: उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत का राष्ट्रवाद मानवता की सेवा का साधन है, किसी अन्य राष्ट्र के दमन का नहीं।
3. समकालीन भारतीय कूटनीति एवं वैश्विक नेतृत्व में सजीव प्रमाण:
- 1. भारत की जी-20 अध्यक्षता (2023) — 'एक पृथ्वी, एक परिवार, एक भविष्य': भारत ने 'वसुधैव कुटुम्बकम्' को जी-20 का आधिकारिक ध्येयवाक्य बनाया तथा 55 देशों के 'अफ्रीकी संघ' (African Union) को जी-20 का स्थायी सदस्य बनाकर समावेशी वैश्विक नेतृत्व का इतिहास रचा।
- 2. 'वैक्सीन मैत्री' एवं महामारी में जीवन रक्षा: कोरोना संकट के समय भारत ने अपने नागरिकों के साथ-साथ 100 से अधिक निर्धन व विकासशील देशों को 30 करोड़ से अधिक जीवनरक्षक टीके मुफ्त व रियायती दरों पर उपलब्ध कराए।
- 3. 'ग्लोबल साउथ' की सशक्त आवाज: अविकसित व विकासशील देशों के हितों, खाद्य सुरक्षा और जलवायु न्याय (Climate Justice) की पुरजोर वकालत।
- 4. पर्यावरण संरक्षण एवं 'मिशन लाइफ': 'अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन' (ISA) और 'एक सूर्य, एक विश्व, एक ग्रिड' (OSOWOG) द्वारा संपूर्ण पृथ्वी को हरित ऊर्जा से जोड़ना।
- 5. संकट में 'प्रथम प्रतिक्रियाकर्ता' (First Responder): तुर्की-सीरिया भूकंप में 'ऑपरेशन दोस्त', नेपाल भूकंप में 'ऑपरेशन मैत्री' और म्यांमार में 'ऑपरेशन करुणा' द्वारा निःस्वार्थ मानवीय सहायता।
4. व्यावहारिक राष्ट्रनीति: 'राष्ट्रहित सर्वोपरि, विश्व कल्याण सर्वदा':
- अपनी सीमाओं और संप्रभुता की सुरक्षा हेतु आतंकवाद के विरुद्ध 'जीरो टॉलरेंस' तथा सैन्य रूप से अजेय बनना।
- 'आत्मनिर्भर भारत' के माध्यम से देश को आर्थिक व तकनीकी रूप से शक्तिशाली बनाकर विश्व कल्याण में अधिक योगदान देना।
5. निष्कर्ष:
भारतीय राष्ट्रवाद अहंकार का प्रतीक नहीं, बल्कि विश्व-कल्याण की साधना है। जब भारत शक्तिशाली होगा, तो वह किसी पर आक्रमण नहीं करेगा, बल्कि शांति, करुणा और न्याय की स्थापना करेगा। राष्ट्रप्रेम और वैश्विक बंधुत्व के इस पावन समन्वय के साथ भारत आज 'विश्व बंधु' और 'विश्वगुरु' के रूप में प्रतिष्ठित हो रहा है, जो 'विकसित भारत @2047' के निर्माण का सर्वोत्तम नैतिक मार्ग है।