निम्नलिखित विषय पर लगभग 250 शब्दों में निबंध लिखिए : "बालश्रम : कारण एवं निवारण"
बालश्रम : कारण एवं निवारण: सामाजिक अभिशाप, संवैधानिक सुरक्षा तंत्र एवं समूल उन्मूलन की कार्ययोजना
"हर एक बच्चे का यह जन्मसिद्ध प्राकृतिक अधिकार है कि वह हंसे, खेले, पढ़ाई करे और अपने सपनों को साकार करे; न कि मजदूरी की बेड़ियों में घुट-घुट कर जिए।" — कैलाश सत्यार्थी (नोबेल शांति पुरस्कार विजेता, विदिशा, म.प्र.)
1. प्रस्तावना एवं समस्या की विभीषिका:
बालश्रम किसी भी सभ्य समाज और लोकतांत्रिक राष्ट्र के माथे पर एक काला कलंक है। जब किसी बच्चे को उसके खेलने-कूदने और पढ़ने की उम्र में आजीविका कमाने हेतु कठोर शारीरिक श्रम में झोंक दिया जाता है, तो इससे न केवल उसका शारीरिक, मानसिक और नैतिक विकास अवरुद्ध होता है, बल्कि देश का भविष्य भी अंधकारमय हो जाता है।
2. बालश्रम के प्रमुख कारण:
- गंभीर निर्धनता एवं भुखमरी: निर्धन परिवारों में भरण-पोषण हेतु माता-पिता द्वारा बच्चों को ढाबों, ईंट-भट्ठों, होटलों और कृषि कार्यों में मजदूरी करने पर विवश करना।
- अशिक्षा एवं माता-पिता की जागरूकता का अभाव: शिक्षा के महत्व को न समझकर बच्चों को कम उम्र में ही कमाने का साधन मान लेना।
- सस्ते और लाचार श्रम की मांग: ठेकेदारों और दुकानदारों द्वारा वयस्कों की तुलना में बच्चों से कम मजदूरी में बिना विरोध के अधिक काम कराना।
3. संवैधानिक एवं कानूनी सुरक्षा प्रावधान:
- अनुच्छेद 24: 14 वर्ष से कम आयु के बालकों को कारखानों, खानों या अन्य जोखिम भरे कार्यों में नियोजन पर पूर्ण प्रतिबंध।
- अनुच्छेद 21A एवं शिक्षा का अधिकार (RTE Act, 2009): 6 से 14 वर्ष के बच्चों हेतु निःशुल्क व अनिवार्य शिक्षा का मौलिक अधिकार।
- बाल एवं किशोर श्रम (निषेध एवं विनियमन) संशोधन अधिनियम, 2016: 14 वर्ष से कम उम्र के बच्चों से किसी भी व्यावसायिक प्रतिष्ठान में काम कराने पर पूर्ण प्रतिबंध व कठोर कारावास का प्रावधान।
4. निवारण हेतु ठोस रणनीतिक उपाय (आगे की राह):
- 'पेंसिल' (PENCIL) पोर्टल का प्रभावी क्रियान्वयन: बालश्रम की शिकायतों का त्वरित निवारण और बच्चों का सुरक्षित रेस्क्यू।
- शिक्षा और पोषण की गारंटी: पीएम पोषण योजना (मध्याह्न भोजन) तथा मध्य प्रदेश की 'लाड़ली लक्ष्मी योजना' द्वारा स्कूल छोड़ने (Dropouts) की दर को शून्य करना।
- गरीब परिवारों का आर्थिक पुनर्वास: बाल श्रमिकों के परिजनों को आजीविका मिशन और मनरेगा से जोड़कर आर्थिक सुरक्षा देना।
5. निष्कर्ष:
बच्चों के नन्हे हाथों में औजार नहीं, बल्कि कलम और पुस्तकें देना ही समाज का परम दायित्व है। जब देश का प्रत्येक बच्चा स्कूल जाएगा और सशक्त बनेगा, तभी भारत बालश्रम के कलंक से मुक्त होगा और 'विकसित भारत @2047' का स्वप्न साकार होगा।
In English (Question & Model Answer)
निम्नलिखित विषय पर लगभग 250 शब्दों में निबंध लिखिए : "बालश्रम : कारण एवं निवारण"
[Note for English Medium Aspirants]: As per official MPPSC Examination Rules, Paper 6 (Hindi Essay and Administrative Drafting / हिन्दी निबंध एवं प्रारूप लेखन) must be attempted exclusively in Hindi (Devanagari script) by all candidates regardless of their opted medium for GS1–GS4. Answers written in English are not evaluated in the actual examination. The authentic Hindi model answer is provided below for your preparation.
बालश्रम : कारण एवं निवारण: सामाजिक अभिशाप, संवैधानिक सुरक्षा तंत्र एवं समूल उन्मूलन की कार्ययोजना
"हर एक बच्चे का यह जन्मसिद्ध प्राकृतिक अधिकार है कि वह हंसे, खेले, पढ़ाई करे और अपने सपनों को साकार करे; न कि मजदूरी की बेड़ियों में घुट-घुट कर जिए।" — कैलाश सत्यार्थी (नोबेल शांति पुरस्कार विजेता, विदिशा, म.प्र.)
1. प्रस्तावना एवं समस्या की विभीषिका:
बालश्रम किसी भी सभ्य समाज और लोकतांत्रिक राष्ट्र के माथे पर एक काला कलंक है। जब किसी बच्चे को उसके खेलने-कूदने और पढ़ने की उम्र में आजीविका कमाने हेतु कठोर शारीरिक श्रम में झोंक दिया जाता है, तो इससे न केवल उसका शारीरिक, मानसिक और नैतिक विकास अवरुद्ध होता है, बल्कि देश का भविष्य भी अंधकारमय हो जाता है।
2. बालश्रम के प्रमुख कारण:
- गंभीर निर्धनता एवं भुखमरी: निर्धन परिवारों में भरण-पोषण हेतु माता-पिता द्वारा बच्चों को ढाबों, ईंट-भट्ठों, होटलों और कृषि कार्यों में मजदूरी करने पर विवश करना।
- अशिक्षा एवं माता-पिता की जागरूकता का अभाव: शिक्षा के महत्व को न समझकर बच्चों को कम उम्र में ही कमाने का साधन मान लेना।
- सस्ते और लाचार श्रम की मांग: ठेकेदारों और दुकानदारों द्वारा वयस्कों की तुलना में बच्चों से कम मजदूरी में बिना विरोध के अधिक काम कराना।
3. संवैधानिक एवं कानूनी सुरक्षा प्रावधान:
- अनुच्छेद 24: 14 वर्ष से कम आयु के बालकों को कारखानों, खानों या अन्य जोखिम भरे कार्यों में नियोजन पर पूर्ण प्रतिबंध।
- अनुच्छेद 21A एवं शिक्षा का अधिकार (RTE Act, 2009): 6 से 14 वर्ष के बच्चों हेतु निःशुल्क व अनिवार्य शिक्षा का मौलिक अधिकार।
- बाल एवं किशोर श्रम (निषेध एवं विनियमन) संशोधन अधिनियम, 2016: 14 वर्ष से कम उम्र के बच्चों से किसी भी व्यावसायिक प्रतिष्ठान में काम कराने पर पूर्ण प्रतिबंध व कठोर कारावास का प्रावधान।
4. निवारण हेतु ठोस रणनीतिक उपाय (आगे की राह):
- 'पेंसिल' (PENCIL) पोर्टल का प्रभावी क्रियान्वयन: बालश्रम की शिकायतों का त्वरित निवारण और बच्चों का सुरक्षित रेस्क्यू।
- शिक्षा और पोषण की गारंटी: पीएम पोषण योजना (मध्याह्न भोजन) तथा मध्य प्रदेश की 'लाड़ली लक्ष्मी योजना' द्वारा स्कूल छोड़ने (Dropouts) की दर को शून्य करना।
- गरीब परिवारों का आर्थिक पुनर्वास: बाल श्रमिकों के परिजनों को आजीविका मिशन और मनरेगा से जोड़कर आर्थिक सुरक्षा देना।
5. निष्कर्ष:
बच्चों के नन्हे हाथों में औजार नहीं, बल्कि कलम और पुस्तकें देना ही समाज का परम दायित्व है। जब देश का प्रत्येक बच्चा स्कूल जाएगा और सशक्त बनेगा, तभी भारत बालश्रम के कलंक से मुक्त होगा और 'विकसित भारत @2047' का स्वप्न साकार होगा।