निम्नलिखित विषय पर लगभग 250 शब्दों में निबंध लिखिए : "नोट बन्दी और काला धन"
नोट बन्दी और काला धन: समानांतर अर्थव्यवस्था पर प्रहार, वित्तीय औपचारिकीकरण एवं डिजिटल क्रांति
"नोटबंदी भारतीय अर्थव्यवस्था के इतिहास में काले धन, भ्रष्टाचार और जाली मुद्रा के विरुद्ध उठाया गया एक साहसिक और युगांतरकारी कदम था।"
1. प्रस्तावना एवं ऐतिहासिक विमुद्रीकरण:
8 नवंबर 2016 को भारत सरकार द्वारा ₹500 और ₹1000 के उच्च मूल्यवर्ग के नोटों को बंद (विमुद्रीकृत) करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया गया, जो उस समय कुल चलन मुद्रा का लगभग 86% था। इस नीतिगत हस्तक्षेप का मुख्य उद्देश्य देश की 'समानांतर काली अर्थव्यवस्था' (Black Money) को ध्वस्त करना, जाली नोटों पर रोक लगाना, कर चोरी रोकना और आतंकवाद की फंडिंग को समाप्त करना था।
2. काले धन और अर्थव्यवस्था पर नोटबंदी का प्रभाव:
- काले धन की बैंकिंग तंत्र में वापसी: लॉकरों और गद्दों में दबाकर रखा गया बेहिसाबी नकदी पैसा बैंकों में जमा होने को विवश हुआ, जिससे 'ऑपरेशन क्लीन मनी' के तहत संदिग्ध खातों की जांच संभव हुई।
- जाली मुद्रा एवं आतंकी फंडिंग पर कुठाराघात: सीमा पार से संचालित जाली नोटों के रैकेट और हवाला नेटवर्क को गहरा आघात पहुंचा, जिससे नक्सलवाद और आतंकवाद की कमर टूटी।
- कर आधार (Tax Base) में ऐतिहासिक विस्तार: आयकर रिटर्न दाखिल करने वाले नागरिकों और कंपनियों की संख्या में भारी वृद्धि हुई।
- डिजिटल भुगतान (UPI) की अभूतपूर्व क्रांति: नोटबंदी ने नकदी-मुक्त अर्थव्यवस्था को गति दी, जिससे आज भारत UPI और डिजिटल लेन-देन में विश्व का निर्विवाद सिरमौर बन गया है।
3. तात्कालिक कठिनाइयां बनाम दीर्घकालिक लाभ:
यद्यपि प्रारंभ में नकदी की कमी के कारण आम जनता और असंगठित क्षेत्र को अस्थायी परेशानियों का सामना करना पड़ा, किन्तु दीर्घकाल में इसने अर्थव्यवस्था को औपचारिक (Formalize) किया और जीएसटी (GST) के सफल क्रियान्वयन का मार्ग प्रशस्त किया।
4. निष्कर्ष:
नोटबंदी ने देश को नकदी-आधारित अपारदर्शी अर्थव्यवस्था से निकालकर पारदर्शी, जवाबदेह और डिजिटल वित्तीय तंत्र की ओर अग्रसर किया। वित्तीय पारदर्शिता और टैक्स अनुपालन का यह सुदृढ़ ढांचा ही भारत को 5 ट्रिलियन डॉलर की आर्थिक महाशक्ति बनाकर 'विकसित भारत @2047' के पथ पर ले जाएगा।
In English (Question & Model Answer)
निम्नलिखित विषय पर लगभग 250 शब्दों में निबंध लिखिए : "नोट बन्दी और काला धन"
[Note for English Medium Aspirants]: As per official MPPSC Examination Rules, Paper 6 (Hindi Essay and Administrative Drafting / हिन्दी निबंध एवं प्रारूप लेखन) must be attempted exclusively in Hindi (Devanagari script) by all candidates regardless of their opted medium for GS1–GS4. Answers written in English are not evaluated in the actual examination. The authentic Hindi model answer is provided below for your preparation.
नोट बन्दी और काला धन: समानांतर अर्थव्यवस्था पर प्रहार, वित्तीय औपचारिकीकरण एवं डिजिटल क्रांति
"नोटबंदी भारतीय अर्थव्यवस्था के इतिहास में काले धन, भ्रष्टाचार और जाली मुद्रा के विरुद्ध उठाया गया एक साहसिक और युगांतरकारी कदम था।"
1. प्रस्तावना एवं ऐतिहासिक विमुद्रीकरण:
8 नवंबर 2016 को भारत सरकार द्वारा ₹500 और ₹1000 के उच्च मूल्यवर्ग के नोटों को बंद (विमुद्रीकृत) करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया गया, जो उस समय कुल चलन मुद्रा का लगभग 86% था। इस नीतिगत हस्तक्षेप का मुख्य उद्देश्य देश की 'समानांतर काली अर्थव्यवस्था' (Black Money) को ध्वस्त करना, जाली नोटों पर रोक लगाना, कर चोरी रोकना और आतंकवाद की फंडिंग को समाप्त करना था।
2. काले धन और अर्थव्यवस्था पर नोटबंदी का प्रभाव:
- काले धन की बैंकिंग तंत्र में वापसी: लॉकरों और गद्दों में दबाकर रखा गया बेहिसाबी नकदी पैसा बैंकों में जमा होने को विवश हुआ, जिससे 'ऑपरेशन क्लीन मनी' के तहत संदिग्ध खातों की जांच संभव हुई।
- जाली मुद्रा एवं आतंकी फंडिंग पर कुठाराघात: सीमा पार से संचालित जाली नोटों के रैकेट और हवाला नेटवर्क को गहरा आघात पहुंचा, जिससे नक्सलवाद और आतंकवाद की कमर टूटी।
- कर आधार (Tax Base) में ऐतिहासिक विस्तार: आयकर रिटर्न दाखिल करने वाले नागरिकों और कंपनियों की संख्या में भारी वृद्धि हुई।
- डिजिटल भुगतान (UPI) की अभूतपूर्व क्रांति: नोटबंदी ने नकदी-मुक्त अर्थव्यवस्था को गति दी, जिससे आज भारत UPI और डिजिटल लेन-देन में विश्व का निर्विवाद सिरमौर बन गया है।
3. तात्कालिक कठिनाइयां बनाम दीर्घकालिक लाभ:
यद्यपि प्रारंभ में नकदी की कमी के कारण आम जनता और असंगठित क्षेत्र को अस्थायी परेशानियों का सामना करना पड़ा, किन्तु दीर्घकाल में इसने अर्थव्यवस्था को औपचारिक (Formalize) किया और जीएसटी (GST) के सफल क्रियान्वयन का मार्ग प्रशस्त किया।
4. निष्कर्ष:
नोटबंदी ने देश को नकदी-आधारित अपारदर्शी अर्थव्यवस्था से निकालकर पारदर्शी, जवाबदेह और डिजिटल वित्तीय तंत्र की ओर अग्रसर किया। वित्तीय पारदर्शिता और टैक्स अनुपालन का यह सुदृढ़ ढांचा ही भारत को 5 ट्रिलियन डॉलर की आर्थिक महाशक्ति बनाकर 'विकसित भारत @2047' के पथ पर ले जाएगा।