निम्नलिखित विषय पर लगभग 250 शब्दों में निबंध लिखिए : "समान आचार संहिता"
समान आचार संहिता (UCC): संवैधानिक दर्शन, लैंगिक न्याय, राष्ट्रीय एकीकरण एवं समरसता का मार्ग
"समान नागरिक संहिता का उद्देश्य धार्मिक विविधता को समाप्त करना नहीं, बल्कि देश की प्रत्येक महिला और नागरिक को विवाह, संपत्ति और उत्तराधिकार में संविधान सम्मत समान न्याय और गरिमा प्रदान करना है।"
1. प्रस्तावना एवं संवैधानिक अधिदेश:
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 44 (राज्य के नीति निदेशक तत्व) में स्पष्ट उल्लेख है कि "राज्य भारत के संपूर्ण राज्यक्षेत्र में नागरिकों के लिए एक समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code) प्राप्त करने का प्रयास करेगा।" इसका अभिप्राय देश के सभी नागरिकों—चाहे वे किसी भी धर्म, जाति या संप्रदाय के हों—हेतु विवाह, तलाक, गुजारा भत्ता, पैतृक संपत्ति के उत्तराधिकार तथा गोद लेने के मामलों में एक समान कानून लागू करना है।
2. समान नागरिक संहिता की आवश्यकता एवं लाभ:
- लैंगिक न्याय एवं नारी सशक्तीकरण: विभिन्न धार्मिक पर्सनल लॉ में महिलाओं के साथ संपत्ति, तलाक और बहुविवाह के मामलों में होने वाले ऐतिहासिक भेदभाव को समाप्त कर उन्हें संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता) और अनुच्छेद 21 (गरिमापूर्ण जीवन) का वास्तविक अधिकार दिलाना।
- राष्ट्रीय एकता एवं धर्मनिरपेक्षता को मजबूती: जब देश में आपराधिक कानून (भारतीय न्याय संहिता) और वाणिज्यिक कानून सभी पर समान रूप से लागू हैं, तो नागरिक कानूनों में एकरूपता से राष्ट्र की संप्रभुता और सामाजिक समरसता मजबूत होगी।
- सर्वोच्च न्यायालय के ऐतिहासिक निर्देश: शाह बानो केस (1985), सरला मुद्गल केस (1995) और शायरा बानो केस (2017) में सुप्रीम कोर्ट ने बार-बार अनुच्छेद 44 को लागू करने की आवश्यकता रेखांकित की है।
3. राज्य स्तरीय उदाहरण एवं संवेदनशील समाधान:
- गोवा एवं उत्तराखंड मॉडल: गोवा में पुर्तगाली सिविल कोड दशकों से सफलतापूर्वक लागू है, तथा हाल ही में उत्तराखंड (2024) देश का पहला राज्य बना जिसने समान नागरिक संहिता कानून पारित किया।
- जनजातीय परंपराओं का संरक्षण: विधि आयोग के माध्यम से जनजातीय प्रथाओं को सुरक्षित रखते हुए व्यापक जन-सहमति का निर्माण करना।
4. निष्कर्ष:
समान आचार संहिता धार्मिक पूजा-पद्धति (अनुच्छेद 25) में हस्तक्षेप नहीं, बल्कि नागरिक अधिकारों की सुरक्षा का कवच है। लोकतांत्रिक संवाद और आम सहमति के आधार पर एक प्रगतिशील यूसीसी को लागू करना लैंगिक न्याय को सुनिश्चित करेगा और 'एक भारत-श्रेष्ठ भारत' के साथ 'विकसित भारत @2047' का निर्माण करेगा।
In English (Question & Model Answer)
निम्नलिखित विषय पर लगभग 250 शब्दों में निबंध लिखिए : "समान आचार संहिता"
[Note for English Medium Aspirants]: As per official MPPSC Examination Rules, Paper 6 (Hindi Essay and Administrative Drafting / हिन्दी निबंध एवं प्रारूप लेखन) must be attempted exclusively in Hindi (Devanagari script) by all candidates regardless of their opted medium for GS1–GS4. Answers written in English are not evaluated in the actual examination. The authentic Hindi model answer is provided below for your preparation.
समान आचार संहिता (UCC): संवैधानिक दर्शन, लैंगिक न्याय, राष्ट्रीय एकीकरण एवं समरसता का मार्ग
"समान नागरिक संहिता का उद्देश्य धार्मिक विविधता को समाप्त करना नहीं, बल्कि देश की प्रत्येक महिला और नागरिक को विवाह, संपत्ति और उत्तराधिकार में संविधान सम्मत समान न्याय और गरिमा प्रदान करना है।"
1. प्रस्तावना एवं संवैधानिक अधिदेश:
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 44 (राज्य के नीति निदेशक तत्व) में स्पष्ट उल्लेख है कि "राज्य भारत के संपूर्ण राज्यक्षेत्र में नागरिकों के लिए एक समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code) प्राप्त करने का प्रयास करेगा।" इसका अभिप्राय देश के सभी नागरिकों—चाहे वे किसी भी धर्म, जाति या संप्रदाय के हों—हेतु विवाह, तलाक, गुजारा भत्ता, पैतृक संपत्ति के उत्तराधिकार तथा गोद लेने के मामलों में एक समान कानून लागू करना है।
2. समान नागरिक संहिता की आवश्यकता एवं लाभ:
- लैंगिक न्याय एवं नारी सशक्तीकरण: विभिन्न धार्मिक पर्सनल लॉ में महिलाओं के साथ संपत्ति, तलाक और बहुविवाह के मामलों में होने वाले ऐतिहासिक भेदभाव को समाप्त कर उन्हें संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता) और अनुच्छेद 21 (गरिमापूर्ण जीवन) का वास्तविक अधिकार दिलाना।
- राष्ट्रीय एकता एवं धर्मनिरपेक्षता को मजबूती: जब देश में आपराधिक कानून (भारतीय न्याय संहिता) और वाणिज्यिक कानून सभी पर समान रूप से लागू हैं, तो नागरिक कानूनों में एकरूपता से राष्ट्र की संप्रभुता और सामाजिक समरसता मजबूत होगी।
- सर्वोच्च न्यायालय के ऐतिहासिक निर्देश: शाह बानो केस (1985), सरला मुद्गल केस (1995) और शायरा बानो केस (2017) में सुप्रीम कोर्ट ने बार-बार अनुच्छेद 44 को लागू करने की आवश्यकता रेखांकित की है।
3. राज्य स्तरीय उदाहरण एवं संवेदनशील समाधान:
- गोवा एवं उत्तराखंड मॉडल: गोवा में पुर्तगाली सिविल कोड दशकों से सफलतापूर्वक लागू है, तथा हाल ही में उत्तराखंड (2024) देश का पहला राज्य बना जिसने समान नागरिक संहिता कानून पारित किया।
- जनजातीय परंपराओं का संरक्षण: विधि आयोग के माध्यम से जनजातीय प्रथाओं को सुरक्षित रखते हुए व्यापक जन-सहमति का निर्माण करना।
4. निष्कर्ष:
समान आचार संहिता धार्मिक पूजा-पद्धति (अनुच्छेद 25) में हस्तक्षेप नहीं, बल्कि नागरिक अधिकारों की सुरक्षा का कवच है। लोकतांत्रिक संवाद और आम सहमति के आधार पर एक प्रगतिशील यूसीसी को लागू करना लैंगिक न्याय को सुनिश्चित करेगा और 'एक भारत-श्रेष्ठ भारत' के साथ 'विकसित भारत @2047' का निर्माण करेगा।