मुख्य›MPPSC Mains (हिन्दी)›सामान्य अध्ययन प्रथम प्रश्नपत्र›खण्ड-अ: इतिहास›इकाई-5 मध्य प्रदेश की रियासतें एवं जनजाति नायक›भारतीय सांस्कृतिक विरासत (मध्यप्रदेश के विशेष संदर्भ में) प्राचीन काल से आधुनिक काल तक विभिन्न कला प्रारूपों, साहित्य, पर्व (उत्सव) एवं वास्तुकला के प्रमुख पक्ष›जगनिक के साहित्यिक योगदानों पर प्रकाश डालिए।

जगनिक के साहित्यिक योगदानों पर प्रकाश डालिए।

20186M
आदर्श उत्तर

महाकवि जगनिक का साहित्यिक योगदान (12वीं शताब्दी):

जगनिक 12वीं शताब्दी में महोबा (बुंदेलखंड) के चंदेल नरेश परमार्दिदेव (परमाल) के राजकवि एवं वीर रस के महान चारण कवि थे:

  • 1. 'आल्हा-खंड' (परमाल रासो) की रचना:
    • जगनिक की अमर रचना 'आल्हा-खंड' है, जिसमें महोबा के वीर बनाफर भाइयों आल्हा एवं ऊदल के 52 युद्धों की वीरता एवं पराक्रम का ओजस्वी वर्णन है।
    • यह विश्व का सबसे लंबा मौखिक वीरगाथा काव्य है, जिसे आज भी वर्षा ऋतु में पूरे उत्तर भारत में 'आल्हा गायन' शैली में अत्यंत उत्साह से गाया जाता है।
  • 2. साहित्यिक एवं सांस्कृतिक महत्व:
    • वीर रस से ओत-प्रोत अमर पंक्तियों के रचयिता: "बारह बरिस ले कूकर जीवे, अरु तेरह लों जिये सियार। बरिस अठारह छत्री जीवे, आगे जीवन को धिक्कार॥"
    • इन्होंने बुंदेली लोक-संस्कृति, मातृभूमि की रक्षा हेतु प्राणोत्सर्ग तथा राजपूती आन-बान-शान को साहित्य में अमर बना दिया।

In English (Question & Model Answer)

Throw light on the literary contributions of Jaganik.

Literary Contributions of Jaganik (जगनिक):

Jaganik (12th Century A.D.) was a celebrated medieval court poet (Charan/Bhat) and heroic ballad bard patronized by Chandela King Paramardideva (Parmal) of Mahoba (Bundelkhand):

  • 1. Alha-Khand (आल्हा-खंड / Parmal Raso):
    • Authored the world-famous heroic ballad epic Alha-Khand celebrating the extraordinary valor, patriotism, and martial chivalry of Mahoba's legendary Banaphar warrior brothers Alha and Udal across 52 legendary battles.
    • It is the world's longest oral heroic folk epic, traditionally sung during the monsoons in the dramatic, thunderous Alha Chhand (वीर रस छंद) across North India.
  • 2. Literary and Cultural Impact:
    • Immortalized legendary verses inspiring martial pride: "बारह बरिस ले कूकर जीवे, अरु तेरह लों जिये सियार। बरिस अठारह छत्री जीवे, आगे जीवन को धिक्कार॥"
    • Preserved Bundeli historical memory, language, and Rajput ethical ideals of defending the motherland.
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