मुख्य›MPPSC Mains (हिन्दी)›सामान्य अध्ययन चतुर्थ प्रश्नपत्र›खण्ड-अ: दर्शनशास्त्र, मनोविज्ञान, लोक प्रशासन एवं केस स्टडी›इकाई-1 भारतीय षड्दर्शन, दार्शनिक/विचारक, समाज सुधारक›रवीन्द्रनाथ टैगोर, राजा राममोहन राय, देवी अहिल्याबाई होलकर, सावित्रीबाई फुले›रवीन्द्रनाथ टैगोर के 'मानवतावाद' पर टिप्पणी लिखिए।

रवीन्द्रनाथ टैगोर के 'मानवतावाद' पर टिप्पणी लिखिए।

20186M
आदर्श उत्तर

रवीन्द्रनाथ टैगोर का 'मानवतावाद' (Humanism / Religion of Man):

  1. मानव में ईश्वर का दर्शन: टैगोर का मानना था कि ईश्वर मन्दिरों या अनुष्ठानों में नहीं, बल्कि धूप-पसीने में काम करने वाले किसान और मजदूर के भीतर वास करता है (गीतांजलि)।
  2. संकीर्ण राष्ट्रवाद से परे विश्व-बंधुत्व (Universalism): उन्होंने उग्र राष्ट्रवाद की संकीर्ण दीवारों का विरोध किया और सम्पूर्ण वसुधा को एक परिवार माना ("जहाँ मन भय से मुक्त हो और मस्तक ऊँचा हो")।
  3. प्रकृति-मानव समन्वय: 'शांतिनिकेतन' और 'विश्वभारती' के माध्यम से प्रकृति के सानिध्य में मानव की सृजनात्मक स्वतंत्रता का विकास किया।

In English (Question & Model Answer)

Write comments on 'humanism' of Rabindranath Tagore.

Tagore's Philosophy of Humanism (The Religion of Man):

  1. Divinity within Humanity: Proclaimed that God resides not in secluded temples, but in the sweat and toil of the tiller and path-maker (Gitanjali).
  2. Universal Cosmopolitanism: Rejected xenophobic nationalism in favor of borderless fraternity—"Where the mind is without fear and the head is held high...".
  3. Ecological Harmony and Freedom: Institutionalized holistic nature-based human development at Santiniketan and Visva-Bharati.
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