अथवा: मानव जीवन में अभ्यास का बहुत महत्त्व होता है। निरंतर अभ्यास से व्यक्ति किसी भी कला में निपुणता तथा कौशल प्राप्त कर सकता है। अभ्यास के बल पर वह कठिन से कठिन कार्य को भी सरल बना सकता है। कालिदास, अर्जुन, एकलव्य इसके उदाहरण हैं। उन्होंने सतत अभ्यास के बल पर निपुणता हासिल की। अनेक प्रकार की ललित कलाओं में भी अभ्यास का महत्त्व असंदिग्ध है। संगीत, नृत्य जैसी कलाएँ तो अभ्यास के बिना आ ही नहीं सकतीं। भारत के प्रसिद्ध खिलाड़ी ध्यानचंद के जादू का एकमात्र कारण उनका सतत अभ्यास ही था।
संक्षेपण (Précis Writing):
उचित शीर्षक: अभ्यास का महत्व एवं सफलता की कुंजी
संक्षेपण:
मानव जीवन में सतत अभ्यास का असाधारण महत्व है। निरंतर अभ्यास से मूर्ख व्यक्ति भी विद्वान बन जाता है तथा कठिन से कठिन कार्य भी सरल और सुगम हो जाते हैं। ज्ञान, कला, विद्या और कौशल में दक्षता प्राप्त करने हेतु निरंतर अभ्यास ही सफलता का मूल आधार है।
(मूल शब्द: ~125 शब्द | संक्षेपण शब्द: ~44 शब्द)
In English (Question & Model Answer)
अथवा: मानव जीवन में अभ्यास का बहुत महत्त्व होता है। निरंतर अभ्यास से व्यक्ति किसी भी कला में निपुणता तथा कौशल प्राप्त कर सकता है। अभ्यास के बल पर वह कठिन से कठिन कार्य को भी सरल बना सकता है। कालिदास, अर्जुन, एकलव्य इसके उदाहरण हैं। उन्होंने सतत अभ्यास के बल पर निपुणता हासिल की। अनेक प्रकार की ललित कलाओं में भी अभ्यास का महत्त्व असंदिग्ध है। संगीत, नृत्य जैसी कलाएँ तो अभ्यास के बिना आ ही नहीं सकतीं। भारत के प्रसिद्ध खिलाड़ी ध्यानचंद के जादू का एकमात्र कारण उनका सतत अभ्यास ही था।
[Note for English Medium Aspirants]: As per official MPPSC Examination Rules, Paper 5 (General Hindi & Grammar / सामान्य हिन्दी एवं व्याकरण) must be attempted exclusively in Hindi (Devanagari script). The authentic Hindi model answer is provided below.
संक्षेपण (Précis Writing):
उचित शीर्षक: अभ्यास का महत्व एवं सफलता की कुंजी
संक्षेपण:
मानव जीवन में सतत अभ्यास का असाधारण महत्व है। निरंतर अभ्यास से मूर्ख व्यक्ति भी विद्वान बन जाता है तथा कठिन से कठिन कार्य भी सरल और सुगम हो जाते हैं। ज्ञान, कला, विद्या और कौशल में दक्षता प्राप्त करने हेतु निरंतर अभ्यास ही सफलता का मूल आधार है।
(मूल शब्द: ~125 शब्द | संक्षेपण शब्द: ~44 शब्द)