मुख्य›MPPSC Mains (हिन्दी)›हिन्दी निबंध एवं प्रारूप लेखन›हिन्दी निबंध एवं प्रारूप लेखन›द्वितीय निबंध›निम्नलिखित विषय पर निबंध लिखिए: पराधीन सपनेहु सुख नाहीं

निम्नलिखित विषय पर निबंध लिखिए: पराधीन सपनेहु सुख नाहीं

201825M#Mains2018#mppsc-mains-en
आदर्श उत्तर

निबंध: पराधीन सपनेहु सुख नाहीं

प्रस्तावना: गोस्वामी तुलसीदास जी का यह कथन— "पराधीन सपनेहु सुख नाहीं" —स्वतंत्रता के सर्वोच्च महत्त्व को रेखांकित करता है। दास्य भाव या गुलामी में स्वप्न में भी सुख की अनुभूति नहीं हो सकती।

महत्त्व व आयाम:

  • स्वतंत्रता का मूल्य: स्वाधीनता मनुष्य का मौलिक अधिकार व नैसर्गिक आनन्द है। भारत का स्वतंत्रता संग्राम इसी अस्मिता की पुनर्प्राप्ति का प्रतीक था।
  • समकालीन संदर्भ: वैचारिक, आर्थिक या मानसिक पराधीनता भी मनुष्य के विकास को अवरुद्ध करती है। 'आत्मनिर्भर भारत' का संकल्प इसी स्वावलंबन की अभिव्यक्ति है।

निष्कर्ष: स्वावलंबन एवं स्वतंत्रता ही मानव गरिमा और सच्चे सुख का मूल आधार है।

In English (Question & Model Answer)

Write an essay on: पराधीन सपनेहु सुख नाहीं

Essay: Slavery Offers No Happiness Even in Dreams ("Paradhin Sapnehu Sukh Nahin")

Introduction: Goswami Tulsidas proclaimed that servitude strips away human dignity, joy, and creative spirit. Freedom is the fundamental soul of all living beings.

Dimensions:

  • Historical Context: India's freedom struggle was fought to break foreign subjugation and reclaim self-respect.
  • Modern Context: Mental, economic, or digital dependence is a subtle form of slavery that restricts human potential.

Conclusion: Self-reliance (Atmanirbharata) and individual liberty are indispensable for happiness.

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