निम्नलिखित विषय पर लगभग 250 शब्दों में निबंध लिखिए : "प्रदूषण : समस्या और समाधान"
प्रदूषण : समस्या और समाधान: पर्यावरणीय संकट, स्वास्थ्य पर दुष्प्रभाव एवं संधारणीय समाधान
"प्रकृति मानव की आवश्यकताओं की पूर्ति कर सकती है, किन्तु उसके अंधाधुंध लालच की नहीं; प्रदूषण आज मानव अस्तित्व और पृथ्वी के भविष्य के लिए सबसे बड़ा संकट बन चुका है।"
1. प्रस्तावना एवं समस्या की विभीषिका:
प्रदूषण से तात्पर्य वायु, जल, मृदा और ध्वनि के भौतिक, रासायनिक व जैविक गुणों में होने वाले ऐसे अवांछित परिवर्तनों से है, जो मानव जीवन, जीव-जंतुओं और पर्यावरण को गंभीर क्षति पहुँचाते हैं। अनियंत्रित औद्योगीकरण, अंधाधुंध शहरीकरण, वनों की कटाई और प्लास्टिक के अत्यधिक उपयोग ने 21वीं सदी में इस समस्या को एक वैश्विक आपातकाल बना दिया है।
2. प्रदूषण के प्रमुख प्रकार एवं दुष्प्रभाव:
- वायु प्रदूषण: वाहनों के धुएं, कारखानों के उत्सर्जन और पराली जलाने से हवा में PM2.5 और PM10 का खतरनाक स्तर, जिससे दमा, ब्रोंकाइटिस और फेफड़ों के कैंसर के मामले बढ़ रहे हैं।
- जल प्रदूषण: औद्योगिक रसायनों और सीवरेज के बिना उपचारित कचरे को नदियों (गंगा, यमुना, नर्मदा) में बहाने से पेयजल संकट और जलीय जीवों का विनाश।
- प्लास्टिक एवं ई-कचरा संकट: कभी नष्ट न होने वाला सिंगल-यूज प्लास्टिक जमीन की उर्वरता नष्ट कर रहा है और माइक्रोप्लास्टिक्स के रूप में हमारे भोजन चक्र में प्रवेश कर चुका है।
3. समाधान हेतु बहु-आयामी कार्ययोजना (आगे की राह):
- हरित एवं स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा: सौर व पवन ऊर्जा का विस्तार (जैसे म.प्र. का 750 MW रीवा अल्ट्रा मेगा सोलर प्लांट), तथा इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) को अपनाना।
- कचरा प्रबंधन एवं चक्रीय अर्थव्यवस्था (Circular Economy): मध्य प्रदेश के इंदौर मॉडल की तर्ज पर 100% कचरा पृथक्करण, बायो-सीएनजी (गोवर्धन) प्लांट और सिंगल-यूज प्लास्टिक पर पूर्ण प्रतिबंध।
- सघन वृक्षारोपण: 'एक पेड़ माँ के नाम' अभियान और 'नगर वन योजना' (मियावाकी पद्धति) द्वारा हरित क्षेत्र में वृद्धि।
- कड़े कानूनी प्रावधान: 'प्रदूषक भुगतान करे' (Polluter Pays Principle) के तहत प्रदूषणकारी उद्योगों पर भारी दंड लगाना।
4. निष्कर्ष:
पर्यावरण संरक्षण विकास का विरोधी नहीं, बल्कि सतत विकास की अनिवार्य शर्त है। संविधान के अनुच्छेद 51A(g) के तहत अपने मौलिक कर्तव्य का पालन करते हुए तथा भारत के वैश्विक 'मिशन लाइफ' (Mission LiFE) को जीवन-शैली बनाकर ही हम अपनी धरती को प्रदूषण-मुक्त और हरित बनाकर 'विकसित भारत @2047' का निर्माण कर सकते हैं।
In English (Question & Model Answer)
निम्नलिखित विषय पर लगभग 250 शब्दों में निबंध लिखिए : "प्रदूषण : समस्या और समाधान"
[Note for English Medium Aspirants]: As per official MPPSC Examination Rules, Paper 6 (Hindi Essay and Administrative Drafting / हिन्दी निबंध एवं प्रारूप लेखन) must be attempted exclusively in Hindi (Devanagari script) by all candidates regardless of their opted medium for GS1–GS4. Answers written in English are not evaluated in the actual examination. The authentic Hindi model answer is provided below for your preparation.
प्रदूषण : समस्या और समाधान: पर्यावरणीय संकट, स्वास्थ्य पर दुष्प्रभाव एवं संधारणीय समाधान
"प्रकृति मानव की आवश्यकताओं की पूर्ति कर सकती है, किन्तु उसके अंधाधुंध लालच की नहीं; प्रदूषण आज मानव अस्तित्व और पृथ्वी के भविष्य के लिए सबसे बड़ा संकट बन चुका है।"
1. प्रस्तावना एवं समस्या की विभीषिका:
प्रदूषण से तात्पर्य वायु, जल, मृदा और ध्वनि के भौतिक, रासायनिक व जैविक गुणों में होने वाले ऐसे अवांछित परिवर्तनों से है, जो मानव जीवन, जीव-जंतुओं और पर्यावरण को गंभीर क्षति पहुँचाते हैं। अनियंत्रित औद्योगीकरण, अंधाधुंध शहरीकरण, वनों की कटाई और प्लास्टिक के अत्यधिक उपयोग ने 21वीं सदी में इस समस्या को एक वैश्विक आपातकाल बना दिया है।
2. प्रदूषण के प्रमुख प्रकार एवं दुष्प्रभाव:
- वायु प्रदूषण: वाहनों के धुएं, कारखानों के उत्सर्जन और पराली जलाने से हवा में PM2.5 और PM10 का खतरनाक स्तर, जिससे दमा, ब्रोंकाइटिस और फेफड़ों के कैंसर के मामले बढ़ रहे हैं।
- जल प्रदूषण: औद्योगिक रसायनों और सीवरेज के बिना उपचारित कचरे को नदियों (गंगा, यमुना, नर्मदा) में बहाने से पेयजल संकट और जलीय जीवों का विनाश।
- प्लास्टिक एवं ई-कचरा संकट: कभी नष्ट न होने वाला सिंगल-यूज प्लास्टिक जमीन की उर्वरता नष्ट कर रहा है और माइक्रोप्लास्टिक्स के रूप में हमारे भोजन चक्र में प्रवेश कर चुका है।
3. समाधान हेतु बहु-आयामी कार्ययोजना (आगे की राह):
- हरित एवं स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा: सौर व पवन ऊर्जा का विस्तार (जैसे म.प्र. का 750 MW रीवा अल्ट्रा मेगा सोलर प्लांट), तथा इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) को अपनाना।
- कचरा प्रबंधन एवं चक्रीय अर्थव्यवस्था (Circular Economy): मध्य प्रदेश के इंदौर मॉडल की तर्ज पर 100% कचरा पृथक्करण, बायो-सीएनजी (गोवर्धन) प्लांट और सिंगल-यूज प्लास्टिक पर पूर्ण प्रतिबंध।
- सघन वृक्षारोपण: 'एक पेड़ माँ के नाम' अभियान और 'नगर वन योजना' (मियावाकी पद्धति) द्वारा हरित क्षेत्र में वृद्धि।
- कड़े कानूनी प्रावधान: 'प्रदूषक भुगतान करे' (Polluter Pays Principle) के तहत प्रदूषणकारी उद्योगों पर भारी दंड लगाना।
4. निष्कर्ष:
पर्यावरण संरक्षण विकास का विरोधी नहीं, बल्कि सतत विकास की अनिवार्य शर्त है। संविधान के अनुच्छेद 51A(g) के तहत अपने मौलिक कर्तव्य का पालन करते हुए तथा भारत के वैश्विक 'मिशन लाइफ' (Mission LiFE) को जीवन-शैली बनाकर ही हम अपनी धरती को प्रदूषण-मुक्त और हरित बनाकर 'विकसित भारत @2047' का निर्माण कर सकते हैं।