मुख्य›MPPSC Mains (हिन्दी)›सामान्य अध्ययन चतुर्थ प्रश्नपत्र›खण्ड-अ: दर्शनशास्त्र, मनोविज्ञान, लोक प्रशासन एवं केस स्टडी›इकाई-4 लोक प्रशासन में नैतिक मूल्य›भ्रष्टाचार - भ्रष्टाचार के प्रकार एवं कारण, भ्रष्टाचार का प्रभाव, भ्रष्टाचार को अल्पतम करने के उपाय, समाज, सूचनातंत्र, परिवार एवं व्हिसिलब्लोअर की भूमिका, भ्रष्टाचार पर राष्ट्रसंघ की घोषणा, भ्रष्टाचार का मापन, ट्रांसपरेंसी इन्टरनेशनल, लोकपाल एवं लोकायुक्त›लोकायुक्त को लोक सेवकों के विरुद्ध किन मामलों में शिकायत प्राप्त करने

लोकायुक्त को लोक सेवकों के विरुद्ध किन मामलों में शिकायत प्राप्त करने का अधिकार है?

20196M
आदर्श उत्तर

लोकायुक्त द्वारा लोक सेवकों के विरुद्ध शिकायत ग्रहण करने के मामले:

राज्य लोकायुक्त अधिनियम (उदा. म.प्र. लोकायुक्त एवं उप-लोकायुक्त अधिनियम, 1981) के तहत लोकायुक्त लोक सेवकों द्वारा किए गए भ्रष्टाचार व पद के दुरुपयोग की जांच करता है।

  • जांच के दायरे में आने वाले लोक सेवक: मुख्यमंत्री, राज्य के मंत्री, विधायक, निगमों/प्राधिकरणों के अध्यक्ष, जिला पंचायत अध्यक्ष तथा राज्य के राजपत्रित व अराजपत्रित अधिकारी/कर्मचारी।
  • स्वीकार्य शिकायतें:
    • रिश्वत, अवैध परितोषण की मांग या स्वीकारोक्ति।
    • पद का दुरुपयोग कर स्वयं या अन्य को अनुचित वित्तीय लाभ पहुंचाना।
    • ज्ञात आय के स्रोतों से अधिक अनुपातहीन संपत्ति (Disproportionate Assets) अर्जित करना।
    • गंभीर वित्तीय अनियमितता, गबन व प्रशासनिक भ्रष्टाचार।
  • अपवाद: न्यायपालिका के सदस्य, विधानसभा अध्यक्ष/उपाध्यक्ष, लोक सेवा आयोग के सदस्य तथा 5 वर्ष से अधिक पुरानी घटनाएं।

In English (Question & Model Answer)

In which cases the Lokayukta has the right to accept complaints against the Public Servants?

Jurisdiction of Lokayukta to Accept Complaints:

Under State Lokayukta Acts (e.g., MP Lokayukt and Up-Lokayukt Act, 1981), the Lokayukta investigates allegations of corruption, abuse of office, and misconduct against public servants.

  • Covered Public Servants: Chief Minister, State Cabinet Ministers, MLAs, Chairpersons/Members of State Corporations, Zila Panchayat Presidents, and Gazetted/Non-Gazetted State Officers.
  • Entertainable Matters:
    • Demand or acceptance of illegal gratification/bribe.
    • Misuse of official position for pecuniary gain to self or others.
    • Possession of assets disproportionate to known sources of income.
    • Corruption and gross administrative misconduct.
  • Exclusions: Judiciary, Speaker/Deputy Speaker, Public Service Commission members, and matters older than prescribed limitation (generally 5 years).
इस प्रश्न को संदर्भ में देखें →
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