मुख्य›MPPSC Mains (हिन्दी)›सामान्य अध्ययन तृतीय प्रश्नपत्र›खण्ड-ब: विज्ञान, तकनीकी एवं जन स्वास्थ्य›इकाई-1 सामान्य विज्ञान›प्राचीन समय में आर्यभट्ट, वराहमिहिर, ब्रह्मगुप्त एवं भास्कर प्रथम एवं द्वितीय द्वारा खगोल शास्त्र में योगदान। प्राचीन एवं आधुनिक भारतीय वेधशालाओं से संबंधित प्रारंभिक जानकारी›मिशन चंद्रयान - 2 पर टिप्पणी लिखिए ।

मिशन चंद्रयान - 2 पर टिप्पणी लिखिए ।

20196M
आदर्श उत्तर

मिशन चंद्रयान-2 (Chandrayaan-2 - 2019):

  1. प्रक्षेपण: 22 जुलाई 2019 को सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र (श्रीहरिकोटा) से GSLV Mk III-M1 (बाहुबली) रॉकेट द्वारा प्रक्षेपित।
  2. मिशन संरचना (3 प्रमुख घटक):
    • 1. ऑर्बिटर (Orbiter): 100 किमी की चंद्र कक्षा में स्थापित (आज भी 8 पेलोड्स के साथ पूरी तरह सक्रिय व डेटा प्रेषित कर रहा है)।
    • 2. लैंडर (Lander - 'विक्रम'): चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर उतरने हेतु डिजाइन।
    • 3. रोवर (Rover - 'प्रज्ञान'): 6 पहियों वाला रोबोटिक वाहन।
  3. परिणाम व उपलब्धि: 7 सितंबर 2019 को सॉफ्ट लैंडिंग के अंतिम क्षणों में विक्रम लैंडर से संपर्क टूट गया (हार्ड लैंडिंग), किंतु इसका ऑर्बिटर 100% सफल रहा, जिसने चंद्रमा पर जल-बर्फ और खनिजों के अत्यधिक उच्च-रिज़ॉल्यूशन 3D मानचित्र भेजे (जिसने चंद्रयान-3 की ऐतिहासिक लैंडिंग का मार्ग प्रशस्त किया)।

In English (Question & Model Answer)

Write note on Mission Chandrayaan - 2.

Mission Chandrayaan-2 (ISRO - 2019):

  1. Launch: Launched on July 22, 2019 aboard India's heavy-lift GSLV Mk III-M1 launch vehicle from Sriharikota.
  2. Spacecraft Trinity: Comprised an integrated Orbiter, the 'Vikram' Lander, and the 'Pragyan' Rover targeting unexplored Lunar South Pole terrains.
  3. Mission Outcome & Legacy: Although the Vikram lander suffered a telemetry loss during final powered descent (hard landing), the Orbiter achieved 100% operational success, relaying ultra-high-resolution SAR and optical imaging of lunar water molecules that laid the groundwork for Chandrayaan-3.
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