मुख्य›MPPSC Mains (हिन्दी)›सामान्य अध्ययन चतुर्थ प्रश्नपत्र›खण्ड-अ: दर्शनशास्त्र, मनोविज्ञान, लोक प्रशासन एवं केस स्टडी›इकाई-1 भारतीय षड्दर्शन, दार्शनिक/विचारक, समाज सुधारक›स्वामी दयानंद सरस्वती, स्वामी विवेकानंद, महर्षि अरविन्द, सर्वपल्ली राधाकृष्णन, डॉ. भीमराव आम्बेडकर, पंडित दीनदयाल उपाध्याय›दीन दयाल उपाध्याय के अनुसार अधिकार एवं कर्तव्य समझाइये।

दीन दयाल उपाध्याय के अनुसार अधिकार एवं कर्तव्य समझाइये।

20193M
आदर्श उत्तर

पंडित दीनदयाल उपाध्याय के अनुसार अधिकार एवं कर्तव्य (एकात्म मानववाद):

  • उपाध्याय जी के अनुसार कर्तव्य अधिकारों से प्राथमिक हैं। समाज में जब प्रत्येक व्यक्ति अपने सामाजिक व नैतिक कर्तव्यों का निष्ठापूर्वक पालन करता है, तो दूसरों के अधिकार स्वतः सुरक्षित हो जाते हैं। कर्तव्य-विहीन अधिकार संघर्ष को जन्म देते हैं।

In English (Question & Model Answer)

Discuss Rights and Duties as per Deen Dayal Upadhyay.

Rights and Duties According to Deendayal Upadhyaya (Integral Humanism):

  • Upadhyaya established the primacy of duties over rights. When individuals conscientiously perform their societal and moral duties, collective human rights are naturally realized. Rights separated from duties breed social discord.
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