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निम्नलिखित विषय पर लगभग 250 शब्दों में निबंध लिखिए : "भारतीय ऋतुओं का स्वरूप"

201925M
आदर्श उत्तर

भारतीय ऋतुओं का स्वरूप: अद्वितीय षड्-ऋतु चक्र, कृषि का आधार एवं सांस्कृतिक उल्लास

"प्रफुल्ल चूताङ्कुर तीक्ष्ण सायको द्विरेफ माला विलसद् धनुर्गुणः।
मनांसि वेत्तुं सुरत प्रसङ्गिनां वसन्त योद्धा समुपागतः प्रिये॥"
— महाकवि कालिदास (ऋतुसंहारम्)

1. प्रस्तावना एवं भारतीय ऋतुओं का अनुपम वैभव:
भारत प्रकृति का वह पावन वरदान-प्राप्त देश है जहाँ प्रकृति वर्ष भर में छह अलग-अलग ऋतुओं (षड्-ऋतु चक्र) के सुंदर रूप में अपनी छटा बिखेरती है। विश्व के अधिकांश देशों में जहाँ केवल दो या तीन ऋतुएँ (ग्रीष्म, शीत या वर्षा) ही पाई जाती हैं, वहीं भारत में प्रत्येक दो मास में ऋतु का क्रमिक परिवर्तन प्रकृति, कृषि, खान-पान, शास्त्रीय रागों और सांस्कृतिक उत्सवों में नवीन प्राण फूंक देता है। महाकवि कालिदास ने अपने अमर खंडकाव्य 'ऋतुसंहारम्' में इन छह ऋतुओं का अत्यंत मनोहारी चित्रण किया है।

2. षड्-ऋतुओं का स्वरूप एवं उनका विशिष्ट सौंदर्य:

  • 1. वसंत ऋतु (चैत्र-वैशाख): 'ऋतुराज' वसंत प्रकृति के यौवन का काल है। खेतों में पीली सरसों का लहलहाना, आम के पेड़ों पर बौर आना, कोयल की कूक, तथा 'वसंत पंचमी' व रंगों का महापर्व 'होली' इसका प्रमुख आकर्षण हैं।
  • 2. ग्रीष्म ऋतु (ज्येष्ठ-आषाढ़): प्रखर सूर्य की तपिश, लू के थपेड़े, किन्तु साथ ही रसीले आम, तरबूज और खरबूजों की मिठास। यह ऋतु भूमि को तपाकर आगामी वर्षा की फसलों हेतु उपजाऊ बनाती है।
  • 3. वर्षा ऋतु (श्रावण-भाद्रपद): तप्त धरा को शीतलता प्रदान करने वाली कृषि की प्राणदायिनी ऋतु। चारों ओर हरियाली, सावन के झूले, नागपंचमी, रक्षाबंधन और श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का उल्लास।
  • 4. शरद ऋतु (आश्विन-कार्तिक): वर्षा के उपरांत निर्मल नीला आकाश, श्वेत कमलों का खिलना, शरद पूर्णिमा की अमृतमयी धवल चांदनी, तथा नवरात्रि, विजयादशमी और दीपोत्सव (दीपावली) का पावन पर्व।
  • 5. हेमंत ऋतु (मार्गशीर्ष-पौष): गुलाबी ठंड का आगमन, प्रातःकाल ओस की बूंदें, खेतों में धान की कटाई, तथा स्वास्थ्य संवर्धन हेतु उत्तम ऋतु।
  • 6. शिशिर ऋतु (माघ-फाल्गुन): कड़ाके की ठंड और पाला, मकर संक्रांति का तिल-गुड़ पर्व, तथा खेतों में गेहूं और चने की लहलहाती फसलें जो बसंत के आगमन का संकेत देती हैं।

3. निष्कर्ष:
भारतीय ऋतु-चक्र केवल मौसम का बदलाव नहीं, बल्कि हमारी जीवन-शैली, कृषि और आध्यात्मिक चेतना का स्पंदन है। जलवायु परिवर्तन और ग्लोबल वार्मिंग के इस दौर में प्रकृति के इस अनमोल ऋतु-संतुलन का संरक्षण करना प्रत्येक नागरिक का परम कर्तव्य है, ताकि आने वाली पीढ़ियां भी इस प्राकृतिक सौंदर्य का आनंद ले सकें और 'विकसित भारत @2047' का निर्माण हो सके।

In English (Question & Model Answer)

निम्नलिखित विषय पर लगभग 250 शब्दों में निबंध लिखिए : "भारतीय ऋतुओं का स्वरूप"

[Note for English Medium Aspirants]: As per official MPPSC Examination Rules, Paper 6 (Hindi Essay and Administrative Drafting / हिन्दी निबंध एवं प्रारूप लेखन) must be attempted exclusively in Hindi (Devanagari script) by all candidates regardless of their opted medium for GS1–GS4. Answers written in English are not evaluated in the actual examination. The authentic Hindi model answer is provided below for your preparation.

भारतीय ऋतुओं का स्वरूप: अद्वितीय षड्-ऋतु चक्र, कृषि का आधार एवं सांस्कृतिक उल्लास

"प्रफुल्ल चूताङ्कुर तीक्ष्ण सायको द्विरेफ माला विलसद् धनुर्गुणः।
मनांसि वेत्तुं सुरत प्रसङ्गिनां वसन्त योद्धा समुपागतः प्रिये॥"
— महाकवि कालिदास (ऋतुसंहारम्)

1. प्रस्तावना एवं भारतीय ऋतुओं का अनुपम वैभव:
भारत प्रकृति का वह पावन वरदान-प्राप्त देश है जहाँ प्रकृति वर्ष भर में छह अलग-अलग ऋतुओं (षड्-ऋतु चक्र) के सुंदर रूप में अपनी छटा बिखेरती है। विश्व के अधिकांश देशों में जहाँ केवल दो या तीन ऋतुएँ (ग्रीष्म, शीत या वर्षा) ही पाई जाती हैं, वहीं भारत में प्रत्येक दो मास में ऋतु का क्रमिक परिवर्तन प्रकृति, कृषि, खान-पान, शास्त्रीय रागों और सांस्कृतिक उत्सवों में नवीन प्राण फूंक देता है। महाकवि कालिदास ने अपने अमर खंडकाव्य 'ऋतुसंहारम्' में इन छह ऋतुओं का अत्यंत मनोहारी चित्रण किया है।

2. षड्-ऋतुओं का स्वरूप एवं उनका विशिष्ट सौंदर्य:

  • 1. वसंत ऋतु (चैत्र-वैशाख): 'ऋतुराज' वसंत प्रकृति के यौवन का काल है। खेतों में पीली सरसों का लहलहाना, आम के पेड़ों पर बौर आना, कोयल की कूक, तथा 'वसंत पंचमी' व रंगों का महापर्व 'होली' इसका प्रमुख आकर्षण हैं।
  • 2. ग्रीष्म ऋतु (ज्येष्ठ-आषाढ़): प्रखर सूर्य की तपिश, लू के थपेड़े, किन्तु साथ ही रसीले आम, तरबूज और खरबूजों की मिठास। यह ऋतु भूमि को तपाकर आगामी वर्षा की फसलों हेतु उपजाऊ बनाती है।
  • 3. वर्षा ऋतु (श्रावण-भाद्रपद): तप्त धरा को शीतलता प्रदान करने वाली कृषि की प्राणदायिनी ऋतु। चारों ओर हरियाली, सावन के झूले, नागपंचमी, रक्षाबंधन और श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का उल्लास।
  • 4. शरद ऋतु (आश्विन-कार्तिक): वर्षा के उपरांत निर्मल नीला आकाश, श्वेत कमलों का खिलना, शरद पूर्णिमा की अमृतमयी धवल चांदनी, तथा नवरात्रि, विजयादशमी और दीपोत्सव (दीपावली) का पावन पर्व।
  • 5. हेमंत ऋतु (मार्गशीर्ष-पौष): गुलाबी ठंड का आगमन, प्रातःकाल ओस की बूंदें, खेतों में धान की कटाई, तथा स्वास्थ्य संवर्धन हेतु उत्तम ऋतु।
  • 6. शिशिर ऋतु (माघ-फाल्गुन): कड़ाके की ठंड और पाला, मकर संक्रांति का तिल-गुड़ पर्व, तथा खेतों में गेहूं और चने की लहलहाती फसलें जो बसंत के आगमन का संकेत देती हैं।

3. निष्कर्ष:
भारतीय ऋतु-चक्र केवल मौसम का बदलाव नहीं, बल्कि हमारी जीवन-शैली, कृषि और आध्यात्मिक चेतना का स्पंदन है। जलवायु परिवर्तन और ग्लोबल वार्मिंग के इस दौर में प्रकृति के इस अनमोल ऋतु-संतुलन का संरक्षण करना प्रत्येक नागरिक का परम कर्तव्य है, ताकि आने वाली पीढ़ियां भी इस प्राकृतिक सौंदर्य का आनंद ले सकें और 'विकसित भारत @2047' का निर्माण हो सके।

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