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निम्नलिखित विषय पर लगभग 250 शब्दों में निबंध लिखिए : "भारतीय पर्वों में राष्ट्रीयता"

201925M
आदर्श उत्तर

भारतीय पर्वों में राष्ट्रीयता: सांस्कृतिक समन्वय, स्वाधीनता संग्राम की चेतना एवं राष्ट्रीय एकात्मता

"भारतीय पर्व केवल धार्मिक पूजा-पाठ तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे राष्ट्रीय एकता, सामाजिक समरसता और देशप्रेम की अखंड ज्योति को प्रज्वलित रखने वाले पावन उत्सव हैं।"

1. प्रस्तावना एवं सांस्कृतिक राष्ट्रीयता का स्वरूप:
भारत विविधताओं से परिपूर्ण देश है, जहाँ पर्व और त्योहार समाज को जोड़ने वाले सबसे मजबूत अदृश्य सूत्र हैं। भारतीय चिंतन में पर्व केवल व्यक्तिगत उल्लास या किसी एक संप्रदाय का अनुष्ठान नहीं होते, बल्कि वे 'सांस्कृतिक राष्ट्रीयता' (Cultural Nationalism) और सामूहिक एकात्मता के जीवंत प्रतीक हैं। ये पर्व भौगोलिक, भाषाई और प्रांतीय दूरियों को मिटाकर संपूर्ण राष्ट्र को एक परिवार (वसुधैव कुटुम्बकम्) के रूप में पिरोते हैं।

2. स्वाधीनता संग्राम में पर्वों की राष्ट्रवादी भूमिका:

  • लोकमान्य बालगंगाधर तिलक का सार्वजनिक गणेशोत्सव: ब्रिटिश शासन द्वारा राजनीतिक सभाओं पर लगाए गए प्रतिबंध को निष्प्रभावी करने हेतु तिलक जी ने गणेशोत्सव और शिवाजी जयंती को सार्वजनिक पर्व में बदला, जिसने लाखों देशवासियों में स्वतंत्रता और राष्ट्रप्रेम की ज्वाला प्रज्वलित की।
  • रवींद्रनाथ टैगोर का 'राखी महोत्सव' (1905): बंगाल विभाजन के विरुद्ध हिंदू-मुस्लिम एकता को अटूट बनाने और औपनिवेशिक 'फूट डालो और राज करो' नीति को ध्वस्त करने हेतु हुगली नदी के तट पर रक्षाबंधन का राष्ट्रव्यापी प्रयोग।

3. पर्वों द्वारा संपूर्ण भारत का एकीकरण:

  • फसल उत्सवों की राष्ट्रीय एकात्मता: कृषि और सूर्य-साधना का पर्व पूरे देश में एक ही समय विभिन्न नामों से मनाया जाता है—मध्य व उत्तर भारत में मकर संक्रांति, तमिलनाडु में पोंगल, असम में बिहू, पंजाब में बैसाखी और केरल में ओणम। नाम भिन्न हैं किन्तु अंतर्निहित राष्ट्रीय भाव एक है।
  • राष्ट्रीय महापर्व: स्वतंत्रता दिवस (15 अगस्त), गणतंत्र दिवस (26 जनवरी) और गांधी जयंती पूरे देश के 140 करोड़ नागरिकों को देशभक्ति और संविधान के प्रति समर्पित करते हैं।
  • सामाजिक सौहार्द का विस्तार: दीपावली, होली, ईद और क्रिसमस पर परस्पर मिलन से जाति और मजहब के भेद मिटते हैं।

4. निष्कर्ष:
भारतीय पर्व 'एक भारत श्रेष्ठ भारत' की संकल्पना के सच्चे संवाहक हैं। पर्वों के माध्यम से जब समाज में अपनत्व, भ्रातृत्व और राष्ट्र-प्रथम की भावना सुदृढ़ होती है, तभी राष्ट्र आंतरिक रूप से अजेय बनता है। यह सांस्कृतिक एकात्मता ही भारत को 'विश्वगुरु' के पद पर आसीन करेगी और 'विकसित भारत @2047' का मार्ग प्रशस्त करेगी।

In English (Question & Model Answer)

निम्नलिखित विषय पर लगभग 250 शब्दों में निबंध लिखिए : "भारतीय पर्वों में राष्ट्रीयता"

[Note for English Medium Aspirants]: As per official MPPSC Examination Rules, Paper 6 (Hindi Essay and Administrative Drafting / हिन्दी निबंध एवं प्रारूप लेखन) must be attempted exclusively in Hindi (Devanagari script) by all candidates regardless of their opted medium for GS1–GS4. Answers written in English are not evaluated in the actual examination. The authentic Hindi model answer is provided below for your preparation.

भारतीय पर्वों में राष्ट्रीयता: सांस्कृतिक समन्वय, स्वाधीनता संग्राम की चेतना एवं राष्ट्रीय एकात्मता

"भारतीय पर्व केवल धार्मिक पूजा-पाठ तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे राष्ट्रीय एकता, सामाजिक समरसता और देशप्रेम की अखंड ज्योति को प्रज्वलित रखने वाले पावन उत्सव हैं।"

1. प्रस्तावना एवं सांस्कृतिक राष्ट्रीयता का स्वरूप:
भारत विविधताओं से परिपूर्ण देश है, जहाँ पर्व और त्योहार समाज को जोड़ने वाले सबसे मजबूत अदृश्य सूत्र हैं। भारतीय चिंतन में पर्व केवल व्यक्तिगत उल्लास या किसी एक संप्रदाय का अनुष्ठान नहीं होते, बल्कि वे 'सांस्कृतिक राष्ट्रीयता' (Cultural Nationalism) और सामूहिक एकात्मता के जीवंत प्रतीक हैं। ये पर्व भौगोलिक, भाषाई और प्रांतीय दूरियों को मिटाकर संपूर्ण राष्ट्र को एक परिवार (वसुधैव कुटुम्बकम्) के रूप में पिरोते हैं।

2. स्वाधीनता संग्राम में पर्वों की राष्ट्रवादी भूमिका:

  • लोकमान्य बालगंगाधर तिलक का सार्वजनिक गणेशोत्सव: ब्रिटिश शासन द्वारा राजनीतिक सभाओं पर लगाए गए प्रतिबंध को निष्प्रभावी करने हेतु तिलक जी ने गणेशोत्सव और शिवाजी जयंती को सार्वजनिक पर्व में बदला, जिसने लाखों देशवासियों में स्वतंत्रता और राष्ट्रप्रेम की ज्वाला प्रज्वलित की।
  • रवींद्रनाथ टैगोर का 'राखी महोत्सव' (1905): बंगाल विभाजन के विरुद्ध हिंदू-मुस्लिम एकता को अटूट बनाने और औपनिवेशिक 'फूट डालो और राज करो' नीति को ध्वस्त करने हेतु हुगली नदी के तट पर रक्षाबंधन का राष्ट्रव्यापी प्रयोग।

3. पर्वों द्वारा संपूर्ण भारत का एकीकरण:

  • फसल उत्सवों की राष्ट्रीय एकात्मता: कृषि और सूर्य-साधना का पर्व पूरे देश में एक ही समय विभिन्न नामों से मनाया जाता है—मध्य व उत्तर भारत में मकर संक्रांति, तमिलनाडु में पोंगल, असम में बिहू, पंजाब में बैसाखी और केरल में ओणम। नाम भिन्न हैं किन्तु अंतर्निहित राष्ट्रीय भाव एक है।
  • राष्ट्रीय महापर्व: स्वतंत्रता दिवस (15 अगस्त), गणतंत्र दिवस (26 जनवरी) और गांधी जयंती पूरे देश के 140 करोड़ नागरिकों को देशभक्ति और संविधान के प्रति समर्पित करते हैं।
  • सामाजिक सौहार्द का विस्तार: दीपावली, होली, ईद और क्रिसमस पर परस्पर मिलन से जाति और मजहब के भेद मिटते हैं।

4. निष्कर्ष:
भारतीय पर्व 'एक भारत श्रेष्ठ भारत' की संकल्पना के सच्चे संवाहक हैं। पर्वों के माध्यम से जब समाज में अपनत्व, भ्रातृत्व और राष्ट्र-प्रथम की भावना सुदृढ़ होती है, तभी राष्ट्र आंतरिक रूप से अजेय बनता है। यह सांस्कृतिक एकात्मता ही भारत को 'विश्वगुरु' के पद पर आसीन करेगी और 'विकसित भारत @2047' का मार्ग प्रशस्त करेगी।

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