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निम्नलिखित विषय पर लगभग 250 शब्दों में निबंध लिखिए : "स्वावलंबन से समाजोत्थान"

201925M
आदर्श उत्तर

स्वावलंबन से समाजोत्थान: ग्राम स्वराज का दर्शन, महिला सशक्तीकरण, कौशल विकास एवं आत्मनिर्भर भारत

"स्वावलंबन मानव जीवन का सबसे बड़ा गुण और उसके स्वाभिमान की रक्षा का मूल मंत्र है; जो समाज अपने पैरों पर खड़ा होना सीख जाता है, उसकी प्रगति को कोई रोक नहीं सकता।" — महात्मा गांधी

1. प्रस्तावना एवं स्वावलंबन का मर्म:
स्वावलंबन (स्व + अवलंबन) का शाब्दिक अर्थ है—'स्वयं का सहारा बनना' अर्थात अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति हेतु दूसरों पर आश्रित न रहकर अपने श्रम, बुद्धि, कौशल और संसाधनों पर निर्भर रहना। व्यक्ति जब स्वावलंबी बनता है, तो उसमें आत्म-सम्मान और आत्मविश्वास का संचार होता है। ऐसे स्वावलंबी व्यक्तियों का समूह ही अंततः एक सशक्त, समृद्ध और शोषण-मुक्त 'समाजोत्थान' (Social Upliftment) की नींव रखता है।

2. स्वावलंबन द्वारा समाजोत्थान के प्रमुख आयाम:

  • निर्धनता एवं शोषण का अंत: कुटीर उद्योग, हस्तशिल्प और स्थानीय स्वरोजगार के माध्यम से जब ग्रामीण और निर्धन वर्ग आत्मनिर्भर बनता है, तो वह साहूकारों के ऋण-जाल और आर्थिक शोषण से मुक्त हो जाता है।
  • नारी सशक्तीकरण एवं पारिवारिक उत्थान: 'स्वयं सहायता समूहों' (SHG / राज्य आजीविका मिशन) के माध्यम से जब ग्रामीण महिलाएं आर्थिक रूप से स्वावलंबी बनती हैं, तो परिवारों में बच्चों की शिक्षा, पोषण और स्वास्थ्य में गुणात्मक सुधार आता है तथा घरेलू हिंसा में भारी कमी होती है।
  • युवा ऊर्जा का सकारात्मक दिशा में विनियोग: 'प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना' एवं मध्य प्रदेश की 'मुख्यमंत्री सीखो-कमाओ योजना' द्वारा युवाओं को नौकरी मांगने वाले के स्थान पर नौकरी देने वाला उद्यमी बनाना, जिससे बेरोजगारी और अपराधों पर अंकुश लगता है।
  • 'वोकल फॉर लोकल' द्वारा स्थानीय अर्थव्यवस्था का विकास: स्थानीय संसाधनों (जैसे एक जिला एक उत्पाद - ODOP) का सदुपयोग कर गांधीजी के 'ग्राम स्वराज' के स्वप्न को साकार करना।

3. निष्कर्ष:
परावलंबन समाज को पंगु और याचक बनाता है, जबकि स्वावलंबन समाज को गौरव, प्रतिष्ठा और संप्रभुता प्रदान करता है। जब देश का प्रत्येक नागरिक, विशेषकर महिलाएँ और वंचित वर्ग, अपने श्रम और कौशल के बल पर आत्मनिर्भर बनेंगे, तभी वास्तविक अर्थों में समाज का सर्वांगीण उत्थान होगा और भारत 'आत्मनिर्भर भारत' से 'विकसित भारत @2047' के परम लक्ष्य को प्राप्त करेगा।

In English (Question & Model Answer)

निम्नलिखित विषय पर लगभग 250 शब्दों में निबंध लिखिए : "स्वावलंबन से समाजोत्थान"

[Note for English Medium Aspirants]: As per official MPPSC Examination Rules, Paper 6 (Hindi Essay and Administrative Drafting / हिन्दी निबंध एवं प्रारूप लेखन) must be attempted exclusively in Hindi (Devanagari script) by all candidates regardless of their opted medium for GS1–GS4. Answers written in English are not evaluated in the actual examination. The authentic Hindi model answer is provided below for your preparation.

स्वावलंबन से समाजोत्थान: ग्राम स्वराज का दर्शन, महिला सशक्तीकरण, कौशल विकास एवं आत्मनिर्भर भारत

"स्वावलंबन मानव जीवन का सबसे बड़ा गुण और उसके स्वाभिमान की रक्षा का मूल मंत्र है; जो समाज अपने पैरों पर खड़ा होना सीख जाता है, उसकी प्रगति को कोई रोक नहीं सकता।" — महात्मा गांधी

1. प्रस्तावना एवं स्वावलंबन का मर्म:
स्वावलंबन (स्व + अवलंबन) का शाब्दिक अर्थ है—'स्वयं का सहारा बनना' अर्थात अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति हेतु दूसरों पर आश्रित न रहकर अपने श्रम, बुद्धि, कौशल और संसाधनों पर निर्भर रहना। व्यक्ति जब स्वावलंबी बनता है, तो उसमें आत्म-सम्मान और आत्मविश्वास का संचार होता है। ऐसे स्वावलंबी व्यक्तियों का समूह ही अंततः एक सशक्त, समृद्ध और शोषण-मुक्त 'समाजोत्थान' (Social Upliftment) की नींव रखता है।

2. स्वावलंबन द्वारा समाजोत्थान के प्रमुख आयाम:

  • निर्धनता एवं शोषण का अंत: कुटीर उद्योग, हस्तशिल्प और स्थानीय स्वरोजगार के माध्यम से जब ग्रामीण और निर्धन वर्ग आत्मनिर्भर बनता है, तो वह साहूकारों के ऋण-जाल और आर्थिक शोषण से मुक्त हो जाता है।
  • नारी सशक्तीकरण एवं पारिवारिक उत्थान: 'स्वयं सहायता समूहों' (SHG / राज्य आजीविका मिशन) के माध्यम से जब ग्रामीण महिलाएं आर्थिक रूप से स्वावलंबी बनती हैं, तो परिवारों में बच्चों की शिक्षा, पोषण और स्वास्थ्य में गुणात्मक सुधार आता है तथा घरेलू हिंसा में भारी कमी होती है।
  • युवा ऊर्जा का सकारात्मक दिशा में विनियोग: 'प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना' एवं मध्य प्रदेश की 'मुख्यमंत्री सीखो-कमाओ योजना' द्वारा युवाओं को नौकरी मांगने वाले के स्थान पर नौकरी देने वाला उद्यमी बनाना, जिससे बेरोजगारी और अपराधों पर अंकुश लगता है।
  • 'वोकल फॉर लोकल' द्वारा स्थानीय अर्थव्यवस्था का विकास: स्थानीय संसाधनों (जैसे एक जिला एक उत्पाद - ODOP) का सदुपयोग कर गांधीजी के 'ग्राम स्वराज' के स्वप्न को साकार करना।

3. निष्कर्ष:
परावलंबन समाज को पंगु और याचक बनाता है, जबकि स्वावलंबन समाज को गौरव, प्रतिष्ठा और संप्रभुता प्रदान करता है। जब देश का प्रत्येक नागरिक, विशेषकर महिलाएँ और वंचित वर्ग, अपने श्रम और कौशल के बल पर आत्मनिर्भर बनेंगे, तभी वास्तविक अर्थों में समाज का सर्वांगीण उत्थान होगा और भारत 'आत्मनिर्भर भारत' से 'विकसित भारत @2047' के परम लक्ष्य को प्राप्त करेगा।

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