मुख्य›MPPSC Mains (हिन्दी)›सामान्य अध्ययन प्रथम प्रश्नपत्र›खण्ड-ब: भूगोल›इकाई-1 भारत का भौतिक स्वरूप एवं जलवायु›भारत के प्रमुख भू-आकृतिक (भौतिक) विभाग- हिमालय पर्वत, उत्तर भारत का विशाल मैदान और प्रायद्वीपीय पठार›किस आधार पर पृथ्वी के बाहरी कोर को तरल माना जाता है ?

किस आधार पर पृथ्वी के बाहरी कोर को तरल माना जाता है ?

20203M
आदर्श उत्तर

पृथ्वी के बाह्य क्रोड के तरल होने का वैज्ञानिक आधार:

  • भूकंपीय द्वितीयक तरंगों (S-तरंगों) का व्यवहार: S-तरंगें केवल ठोस माध्यम में संचरण कर सकती हैं और तरल माध्यम में लुप्त हो जाती हैं। भूकंप के दौरान पृथ्वी के 2900 किमी गहराई (गुटेनबर्ग असंबद्धता) के बाद S-तरंगें बाह्य क्रोड में प्रवेश नहीं कर पातीं और 105° से 142° का 'S-वेव शैडो ज़ोन' बनाती हैं। साथ ही P-तरंगों की गति अचानक घट जाती है।

In English (Question & Model Answer)

On what basis outer core of the earth is assumed to be liquid ?

Seismological Basis for the Earth's Liquid Outer Core:

  • Behavior of Seismic Shear Waves (S-Waves): Transverse S-waves propagate strictly through solids and cannot penetrate liquids. At the Gutenberg discontinuity (~2,900 km depth), S-waves are completely blocked, generating an extensive global S-wave shadow zone, while compressional P-waves refract and decelerate sharply.
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