मुख्य›MPPSC Mains (हिन्दी)›सामान्य अध्ययन चतुर्थ प्रश्नपत्र›खण्ड-अ: दर्शनशास्त्र, मनोविज्ञान, लोक प्रशासन एवं केस स्टडी›इकाई-1 भारतीय षड्दर्शन, दार्शनिक/विचारक, समाज सुधारक›गुरुनानक, कबीर, तुलसीदास, संत रविदास›कबीर के अनुसार 'गुरु-महिमा' का वर्णन कीजिए ।

कबीर के अनुसार 'गुरु-महिमा' का वर्णन कीजिए ।

20202M
आदर्श उत्तर

संत कबीर के अनुसार 'गुरु-महिमा':

  • कबीर ने गुरु को ईश्वर (गोविंद) से भी उच्च स्थान दिया है ("गुरु गोविंद दोऊ खड़े, काके लागूं पांय...")। गुरु ही अज्ञान के अंधकार को मिटाकर शिष्य को परमात्मा के साक्षात्कार का मार्ग दिखाता है।

In English (Question & Model Answer)

Describe the importance of Teacher (Guru-Mahima) according to Kabir.

Glory of the Guru According to Sant Kabir:

  • Kabir elevated the Guru above God ("Guru Govind dou khade, kake lagoon paanv..."), establishing that it is the spiritual master who dispels ignorance and guides the seeker to divine self-realization.
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