द्वंद्व समास का अर्थ क्या है एवं उसके प्रकार कौन-से हैं ?
द्वंद्व समास का अर्थ एवं भेद:
1. अर्थ: जिस समास में पूर्व पद और उत्तर पद दोनों पद प्रधान होते हैं तथा विग्रह करने पर दोनों के बीच 'और', 'या', 'अथवा', 'एवं' जैसे योजक शब्द लगते हैं, उसे द्वंद्व समास कहते हैं (उभयपदप्रधानो द्वन्द्वः)।
2. द्वंद्व समास के 3 भेद:
- 1. इतरेतर द्वंद्व: दोनों पदों का अपना स्वतंत्र अस्तित्व हो (उदा. माता-पिता = माता और पिता)।
- 2. समाहार द्वंद्व: दोनों पद मिलकर समूह या व्यापक अर्थ का बोध कराएँ (उदा. हाथ-पाँव = हाथ और पाँव आदि)।
- 3. वैकल्पिक द्वंद्व: दोनों पदों में विकल्प (विरोध) का बोध हो (उदा. पाप-पुण्य = पाप या पुण्य)।
In English (Question & Model Answer)
द्वंद्व समास का अर्थ क्या है एवं उसके प्रकार कौन-से हैं ?
[Note for English Medium Aspirants]: As per official MPPSC Examination Rules, Paper 5 (General Hindi & Grammar / सामान्य हिन्दी एवं व्याकरण) must be attempted exclusively in Hindi (Devanagari script). The authentic Hindi model answer is provided below.
द्वंद्व समास का अर्थ एवं भेद:
1. अर्थ: जिस समास में पूर्व पद और उत्तर पद दोनों पद प्रधान होते हैं तथा विग्रह करने पर दोनों के बीच 'और', 'या', 'अथवा', 'एवं' जैसे योजक शब्द लगते हैं, उसे द्वंद्व समास कहते हैं (उभयपदप्रधानो द्वन्द्वः)।
2. द्वंद्व समास के 3 भेद:
- 1. इतरेतर द्वंद्व: दोनों पदों का अपना स्वतंत्र अस्तित्व हो (उदा. माता-पिता = माता और पिता)।
- 2. समाहार द्वंद्व: दोनों पद मिलकर समूह या व्यापक अर्थ का बोध कराएँ (उदा. हाथ-पाँव = हाथ और पाँव आदि)।
- 3. वैकल्पिक द्वंद्व: दोनों पदों में विकल्प (विरोध) का बोध हो (उदा. पाप-पुण्य = पाप या पुण्य)।