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रूपक अलंकार का तात्पर्य क्या है ?

20203M
आदर्श उत्तर

रूपक अलंकार का तात्पर्य एवं उदाहरण:

1. तात्पर्य: जहाँ उपमेय और उपमान में अत्यधिक सादृश्यता के कारण दोनों में कोई भेद न रहकर उपमेय पर उपमान का प्रत्यक्ष (अभेद/निषेधरहित) आरोप कर दिया जाता है, वहाँ रूपक अलंकार होता है (तद्रूपकमभेदो य उपमानोपमेययोः)।

2. उदाहरण: "चरण-कमल बंदौ हरिराई।" (यहाँ भगवान के चरणों को ही कमल का रूप दे दिया गया है)।

In English (Question & Model Answer)

रूपक अलंकार का तात्पर्य क्या है ?

[Note for English Medium Aspirants]: As per official MPPSC Examination Rules, Paper 5 (General Hindi & Grammar / सामान्य हिन्दी एवं व्याकरण) must be attempted exclusively in Hindi (Devanagari script). The authentic Hindi model answer is provided below.

रूपक अलंकार का तात्पर्य एवं उदाहरण:

1. तात्पर्य: जहाँ उपमेय और उपमान में अत्यधिक सादृश्यता के कारण दोनों में कोई भेद न रहकर उपमेय पर उपमान का प्रत्यक्ष (अभेद/निषेधरहित) आरोप कर दिया जाता है, वहाँ रूपक अलंकार होता है (तद्रूपकमभेदो य उपमानोपमेययोः)।

2. उदाहरण: "चरण-कमल बंदौ हरिराई।" (यहाँ भगवान के चरणों को ही कमल का रूप दे दिया गया है)।

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