रूपक अलंकार का तात्पर्य क्या है ?
रूपक अलंकार का तात्पर्य एवं उदाहरण:
1. तात्पर्य: जहाँ उपमेय और उपमान में अत्यधिक सादृश्यता के कारण दोनों में कोई भेद न रहकर उपमेय पर उपमान का प्रत्यक्ष (अभेद/निषेधरहित) आरोप कर दिया जाता है, वहाँ रूपक अलंकार होता है (तद्रूपकमभेदो य उपमानोपमेययोः)।
2. उदाहरण: "चरण-कमल बंदौ हरिराई।" (यहाँ भगवान के चरणों को ही कमल का रूप दे दिया गया है)।
In English (Question & Model Answer)
रूपक अलंकार का तात्पर्य क्या है ?
[Note for English Medium Aspirants]: As per official MPPSC Examination Rules, Paper 5 (General Hindi & Grammar / सामान्य हिन्दी एवं व्याकरण) must be attempted exclusively in Hindi (Devanagari script). The authentic Hindi model answer is provided below.
रूपक अलंकार का तात्पर्य एवं उदाहरण:
1. तात्पर्य: जहाँ उपमेय और उपमान में अत्यधिक सादृश्यता के कारण दोनों में कोई भेद न रहकर उपमेय पर उपमान का प्रत्यक्ष (अभेद/निषेधरहित) आरोप कर दिया जाता है, वहाँ रूपक अलंकार होता है (तद्रूपकमभेदो य उपमानोपमेययोः)।
2. उदाहरण: "चरण-कमल बंदौ हरिराई।" (यहाँ भगवान के चरणों को ही कमल का रूप दे दिया गया है)।