मुख्य›MPPSC Mains (हिन्दी)›सामान्य हिन्दी एवं व्याकरण›सामान्य हिन्दी एवं व्याकरण›अपठित गद्यांश›निम्नलिखित में से किसी एक गद्यांश के आधार पर नीचे लिखे प्रश्नों के

निम्नलिखित में से किसी एक गद्यांश के आधार पर नीचे लिखे प्रश्नों के उत्तर दीजिए ।
गद्यांश : साहित्य में मनुष्य के जीवन का प्रवाह परिलक्षित होता है । साहित्य स्वयं इस प्रवाह और मनुष्य की क्रमशः विस्तारित होती हुई चेतना का परिणाम है । कई अर्थों में वह इस प्रवाह की दिशा और गति को भी प्रभावित करता है । साहित्य में निहित स्थितियों की व्याख्या और मूल्यांकन केवल सौंदर्य और रसानुभूति के क्षेत्र तक सीमित नहीं होते, उनका सामाजिक अर्थ और प्रभाव बड़ा व्यापक होता है । साहित्य मनुष्य की स्वयंचेतना और जीवन-चेतना में जन्म लेता है । भाषा और मानवीय चेतना के विकास में निकट का संबंध है ।
(i) लेखक के अनुसार साहित्य वास्तव में क्या है ?
(ii) साहित्य में निहित स्थितियों की व्याख्या और मूल्यांकन उसे किन कारणों से संकीर्ण बना देते हैं ?
(iii) साहित्य किन अर्थों में प्रभावी और व्यापक होता है ?
(iv) वस्तुतः साहित्य का निर्माण किसके भीतर होता है ?
(v) उपर्युक्त गद्यांश में साहित्य के प्रति किस प्रकार के दृष्टिकोण की प्रधानता दिखाई देती है ?

202020M
आदर्श उत्तर

गद्यांश 6(अ) के सभी 5 प्रश्नों के आदर्श उत्तर:

  1. (i) लेखक के अनुसार साहित्य वास्तव में क्या है?
    लेखक के अनुसार साहित्य मानव जीवन के प्रवाह का सजीव दर्पण (प्रतिबिम्ब) और मनुष्य की क्रमशः विकसित एवं विस्तारित होती हुई मानवीय चेतना तथा स्वयं-चेतना का प्रत्यक्ष परिणाम है, जो जीवन के प्रवाह की दिशा और गति को भी निर्धारित करता है।
  2. (ii) साहित्य में निहित स्थितियों की व्याख्या और मूल्यांकन उसे किन कारणों से संकीर्ण बना देते हैं?
    जब साहित्य की स्थितियों की व्याख्या और मूल्यांकन को केवल बाह्य 'सौंदर्य' और 'क्षणिक रसानुभूति' के संकुचित दायरे तक सीमित कर दिया जाता है और उसके व्यापक सामाजिक दायित्व की उपेक्षा की जाती है, तब वह संकीर्ण बन जाता है।
  3. (iii) साहित्य किन अर्थों में प्रभावी और व्यापक होता है?
    साहित्य केवल कलात्मक आनंद तक सीमित न रहकर समाज के सामूहिक चिंतन, नैतिक मूल्यों, जीवन-दृष्टि और सामाजिक चेतना को गहराई से रूपांतरित करने के अर्थ में अत्यंत प्रभावी और व्यापक होता है।
  4. (iv) वस्तुतः साहित्य का निर्माण किसके भीतर होता है?
    साहित्य का निर्माण वस्तुतः मनुष्य की आंतरिक स्वयं-चेतना (Self-consciousness) और जीवन-चेतना के भीतर भाषा और मानवीय संवेदना के घनिष्ठ समन्वय से होता है।
  5. (v) उपर्युक्त गद्यांश में साहित्य के प्रति किस प्रकार के दृष्टिकोण की प्रधानता दिखाई देती है?
    प्रस्तुत गद्यांश में साहित्य के प्रति गंभीर, समाजशास्त्रीय, चेतनामूलक एवं लोक-कल्याणकारी (सरोकारयुक्त) दृष्टिकोण की प्रधानता दिखाई देती है।

In English (Question & Model Answer)

निम्नलिखित में से किसी एक गद्यांश के आधार पर नीचे लिखे प्रश्नों के उत्तर दीजिए ।
गद्यांश : साहित्य में मनुष्य के जीवन का प्रवाह परिलक्षित होता है । साहित्य स्वयं इस प्रवाह और मनुष्य की क्रमशः विस्तारित होती हुई चेतना का परिणाम है । कई अर्थों में वह इस प्रवाह की दिशा और गति को भी प्रभावित करता है । साहित्य में निहित स्थितियों की व्याख्या और मूल्यांकन केवल सौंदर्य और रसानुभूति के क्षेत्र तक सीमित नहीं होते, उनका सामाजिक अर्थ और प्रभाव बड़ा व्यापक होता है । साहित्य मनुष्य की स्वयंचेतना और जीवन-चेतना में जन्म लेता है । भाषा और मानवीय चेतना के विकास में निकट का संबंध है ।
(i) लेखक के अनुसार साहित्य वास्तव में क्या है ?
(ii) साहित्य में निहित स्थितियों की व्याख्या और मूल्यांकन उसे किन कारणों से संकीर्ण बना देते हैं ?
(iii) साहित्य किन अर्थों में प्रभावी और व्यापक होता है ?
(iv) वस्तुतः साहित्य का निर्माण किसके भीतर होता है ?
(v) उपर्युक्त गद्यांश में साहित्य के प्रति किस प्रकार के दृष्टिकोण की प्रधानता दिखाई देती है ?

[Note for English Medium Aspirants]: As per official MPPSC Examination Rules, Paper 5 (General Hindi & Grammar / सामान्य हिन्दी एवं व्याकरण) must be attempted exclusively in Hindi (Devanagari script). The authentic Hindi model answer is provided below.

गद्यांश 6(अ) के सभी 5 प्रश्नों के आदर्श उत्तर:

  1. (i) लेखक के अनुसार साहित्य वास्तव में क्या है?
    लेखक के अनुसार साहित्य मानव जीवन के प्रवाह का सजीव दर्पण (प्रतिबिम्ब) और मनुष्य की क्रमशः विकसित एवं विस्तारित होती हुई मानवीय चेतना तथा स्वयं-चेतना का प्रत्यक्ष परिणाम है, जो जीवन के प्रवाह की दिशा और गति को भी निर्धारित करता है।
  2. (ii) साहित्य में निहित स्थितियों की व्याख्या और मूल्यांकन उसे किन कारणों से संकीर्ण बना देते हैं?
    जब साहित्य की स्थितियों की व्याख्या और मूल्यांकन को केवल बाह्य 'सौंदर्य' और 'क्षणिक रसानुभूति' के संकुचित दायरे तक सीमित कर दिया जाता है और उसके व्यापक सामाजिक दायित्व की उपेक्षा की जाती है, तब वह संकीर्ण बन जाता है।
  3. (iii) साहित्य किन अर्थों में प्रभावी और व्यापक होता है?
    साहित्य केवल कलात्मक आनंद तक सीमित न रहकर समाज के सामूहिक चिंतन, नैतिक मूल्यों, जीवन-दृष्टि और सामाजिक चेतना को गहराई से रूपांतरित करने के अर्थ में अत्यंत प्रभावी और व्यापक होता है।
  4. (iv) वस्तुतः साहित्य का निर्माण किसके भीतर होता है?
    साहित्य का निर्माण वस्तुतः मनुष्य की आंतरिक स्वयं-चेतना (Self-consciousness) और जीवन-चेतना के भीतर भाषा और मानवीय संवेदना के घनिष्ठ समन्वय से होता है।
  5. (v) उपर्युक्त गद्यांश में साहित्य के प्रति किस प्रकार के दृष्टिकोण की प्रधानता दिखाई देती है?
    प्रस्तुत गद्यांश में साहित्य के प्रति गंभीर, समाजशास्त्रीय, चेतनामूलक एवं लोक-कल्याणकारी (सरोकारयुक्त) दृष्टिकोण की प्रधानता दिखाई देती है।
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