मुख्य›MPPSC Mains (हिन्दी)›हिन्दी निबंध एवं प्रारूप लेखन›हिन्दी निबंध एवं प्रारूप लेखन›द्वितीय निबंध›निम्नलिखित विषय पर लगभग 500 शब्दों में निबंध लिखिए : "ग्लासगो जलवायु

निम्नलिखित विषय पर लगभग 500 शब्दों में निबंध लिखिए : "ग्लासगो जलवायु सम्मेलन"

202025M
आदर्श उत्तर

ग्लासगो जलवायु सम्मेलन (COP26): प्रमुख वैश्विक निर्णय, भारत के ऐतिहासिक 'पंचामृत' संकल्प एवं 'मिशन लाइफ'

"जलवायु परिवर्तन अब भविष्य की चेतावनी नहीं, बल्कि वर्तमान का वैश्विक संकट है। जलवायु न्याय (Climate Justice) का तकाजा है कि पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ विकासशील देशों के विकास अधिकारों की रक्षा भी की जाए।"

1. प्रस्तावना एवं सम्मेलन की पृष्ठभूमि:
संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन फ्रेमवर्क कन्वेंशन (UNFCCC) के अंतर्गत 'पार्टियों का 26वाँ सम्मेलन' (COP26) नवंबर 2021 में ग्लासगो (स्कॉटलैंड, यूनाइटेड किंगडम) में आयोजित किया गया। पेरिस समझौते (2015) के पश्चात यह सबसे महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन था, जिसका मुख्य उद्देश्य वैश्विक तापमान वृद्धि को पूर्व-औद्योगिक स्तर से 1.5 डिग्री सेल्सियस तक सीमित रखने हेतु विश्व के देशों से ठोस और महत्वाकांक्षी कार्ययोजना प्राप्त करना था।

2. ग्लासगो जलवायु समझौते (Glasgow Climate Pact) के प्रमुख वैश्विक निर्णय:

  • कोयला ऊर्जा का चरणबद्ध न्यूनीकरण (Phasedown of Coal): संयुक्त राष्ट्र के इतिहास में पहली बार अंतिम समझौते में 'अबाध कोयला ऊर्जा के चरणबद्ध उपयोग को कम करने' (Phasedown) तथा जीवाश्म ईंधन की अक्षम सब्सिडी को समाप्त करने का स्पष्ट उल्लेख किया गया। भारत के हस्तक्षेप से इसे 'Phase-out' (पूर्ण बंदी) के स्थान पर 'Phase-down' (क्रमिक कमी) किया गया ताकि विकासशील देशों की ऊर्जा सुरक्षा अक्षुण्ण रहे।
  • पेरिस रूलबुक (अनुच्छेद 6) की पूर्णता: अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पारदर्शी 'कार्बन क्रेडिट मार्केट' के नियमों पर वैश्विक सहमति बनी।
  • वनों की कटाई रोकने का संकल्प: 140 से अधिक देशों ने 2030 तक वनों की कटाई और भूमि क्षरण को पूर्णतः रोकने का संकल्प लिया।
  • वैश्विक मीथेन प्रतिज्ञा: 2030 तक वैश्विक मीथेन उत्सर्जन में कम से कम 30% की कटौती का लक्ष्य।

3. भारत के ऐतिहासिक 'पंचामृत' (Panchamrit) संकल्प:
भारत के माननीय प्रधानमंत्री ने ग्लासगो सम्मेलन में विश्व को दिशा देने वाले 5 ऐतिहासिक जलवायु संकल्प प्रस्तुत किए:

  • 1. 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म ऊर्जा: वर्ष 2030 तक भारत की गैर-जीवाश्म ईंधन ऊर्जा क्षमता को 500 GW तक पहुँचाना।
  • 2. 50% नवीकरणीय ऊर्जा: वर्ष 2030 तक देश की कुल ऊर्जा आवश्यकताओं का 50% नवीकरणीय ऊर्जा (सौर, पवन, जल) से पूरा करना।
  • 3. 1 अरब टन कार्बन उत्सर्जन में कमी: 2021 से 2030 के मध्य कुल अनुमानित कार्बन उत्सर्जन में 1 बिलियन टन की कटौती करना।
  • 4. कार्बन तीव्रता में 45% की कमी: वर्ष 2030 तक अर्थव्यवस्था की कार्बन तीव्रता (Carbon Intensity) को 2005 के स्तर से 45% से अधिक कम करना।
  • 5. 2070 तक 'नेट-जीरो' (Net-Zero) का लक्ष्य: वर्ष 2070 तक भारत को शून्य शुद्ध कार्बन उत्सर्जक देश बनाना।

4. भारत द्वारा प्रारंभ की गई प्रमुख वैश्विक पहलें:

  • मिशन लाइफ (Mission LiFE - Lifestyle for Environment): 'प्रो-प्लैनेट पीपल' (P3) जन-आंदोलन का आह्वान, जो अंधाधुंध उपभोक्तावाद के स्थान पर पर्यावरण-अनुकूल जीवन-शैली अपनाने पर बल देता है।
  • 'वन सन, वन वर्ल्ड, वन ग्रिड' (OSOWOG): ब्रिटेन के साथ मिलकर वैश्विक स्तर पर सौर ऊर्जा ग्रिड को आपस में जोड़ने की महत्वाकांक्षी योजना ("सूर्य कभी अस्त नहीं होता")।
  • आइरिस (IRIS): जलवायु संकट से जूझ रहे छोटे द्वीपीय देशों (SIDS) के बुनियादी ढांचे के संरक्षण हेतु विशेष तकनीकी पहल।

5. सम्मेलन की सीमाएं एवं जलवायु वित्त का संकट:
विकसित देश विकासशील राष्ट्रों को हरित तकनीक अपनाने हेतु प्रतिवर्ष 100 अरब डॉलर की जलवायु वित्त (Climate Finance) सहायता प्रदान करने के अपने पुराने वादे को पूरा करने में पुनः विफल रहे।

6. निष्कर्ष:
ग्लासगो सम्मेलन ने भारत को एक जिम्मेदार और अग्रणी वैश्विक पर्यावरण शक्ति के रूप में स्थापित किया। 'पंचामृत' संकल्पों और 'मिशन लाइफ' के माध्यम से भारत आर्थिक विकास और पर्यावरण संरक्षण के मध्य संतुलन साधते हुए एक हरित, समृद्ध और संधारणीय 'विकसित भारत @2047' की ओर तेजी से अग्रसर है।

In English (Question & Model Answer)

निम्नलिखित विषय पर लगभग 500 शब्दों में निबंध लिखिए : "ग्लासगो जलवायु सम्मेलन"

[Note for English Medium Aspirants]: As per official MPPSC Examination Rules, Paper 6 (Hindi Essay and Administrative Drafting / हिन्दी निबंध एवं प्रारूप लेखन) must be attempted exclusively in Hindi (Devanagari script) by all candidates regardless of their opted medium for GS1–GS4. Answers written in English are not evaluated in the actual examination. The authentic Hindi model answer is provided below for your preparation.

ग्लासगो जलवायु सम्मेलन (COP26): प्रमुख वैश्विक निर्णय, भारत के ऐतिहासिक 'पंचामृत' संकल्प एवं 'मिशन लाइफ'

"जलवायु परिवर्तन अब भविष्य की चेतावनी नहीं, बल्कि वर्तमान का वैश्विक संकट है। जलवायु न्याय (Climate Justice) का तकाजा है कि पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ विकासशील देशों के विकास अधिकारों की रक्षा भी की जाए।"

1. प्रस्तावना एवं सम्मेलन की पृष्ठभूमि:
संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन फ्रेमवर्क कन्वेंशन (UNFCCC) के अंतर्गत 'पार्टियों का 26वाँ सम्मेलन' (COP26) नवंबर 2021 में ग्लासगो (स्कॉटलैंड, यूनाइटेड किंगडम) में आयोजित किया गया। पेरिस समझौते (2015) के पश्चात यह सबसे महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन था, जिसका मुख्य उद्देश्य वैश्विक तापमान वृद्धि को पूर्व-औद्योगिक स्तर से 1.5 डिग्री सेल्सियस तक सीमित रखने हेतु विश्व के देशों से ठोस और महत्वाकांक्षी कार्ययोजना प्राप्त करना था।

2. ग्लासगो जलवायु समझौते (Glasgow Climate Pact) के प्रमुख वैश्विक निर्णय:

  • कोयला ऊर्जा का चरणबद्ध न्यूनीकरण (Phasedown of Coal): संयुक्त राष्ट्र के इतिहास में पहली बार अंतिम समझौते में 'अबाध कोयला ऊर्जा के चरणबद्ध उपयोग को कम करने' (Phasedown) तथा जीवाश्म ईंधन की अक्षम सब्सिडी को समाप्त करने का स्पष्ट उल्लेख किया गया। भारत के हस्तक्षेप से इसे 'Phase-out' (पूर्ण बंदी) के स्थान पर 'Phase-down' (क्रमिक कमी) किया गया ताकि विकासशील देशों की ऊर्जा सुरक्षा अक्षुण्ण रहे।
  • पेरिस रूलबुक (अनुच्छेद 6) की पूर्णता: अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पारदर्शी 'कार्बन क्रेडिट मार्केट' के नियमों पर वैश्विक सहमति बनी।
  • वनों की कटाई रोकने का संकल्प: 140 से अधिक देशों ने 2030 तक वनों की कटाई और भूमि क्षरण को पूर्णतः रोकने का संकल्प लिया।
  • वैश्विक मीथेन प्रतिज्ञा: 2030 तक वैश्विक मीथेन उत्सर्जन में कम से कम 30% की कटौती का लक्ष्य।

3. भारत के ऐतिहासिक 'पंचामृत' (Panchamrit) संकल्प:
भारत के माननीय प्रधानमंत्री ने ग्लासगो सम्मेलन में विश्व को दिशा देने वाले 5 ऐतिहासिक जलवायु संकल्प प्रस्तुत किए:

  • 1. 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म ऊर्जा: वर्ष 2030 तक भारत की गैर-जीवाश्म ईंधन ऊर्जा क्षमता को 500 GW तक पहुँचाना।
  • 2. 50% नवीकरणीय ऊर्जा: वर्ष 2030 तक देश की कुल ऊर्जा आवश्यकताओं का 50% नवीकरणीय ऊर्जा (सौर, पवन, जल) से पूरा करना।
  • 3. 1 अरब टन कार्बन उत्सर्जन में कमी: 2021 से 2030 के मध्य कुल अनुमानित कार्बन उत्सर्जन में 1 बिलियन टन की कटौती करना।
  • 4. कार्बन तीव्रता में 45% की कमी: वर्ष 2030 तक अर्थव्यवस्था की कार्बन तीव्रता (Carbon Intensity) को 2005 के स्तर से 45% से अधिक कम करना।
  • 5. 2070 तक 'नेट-जीरो' (Net-Zero) का लक्ष्य: वर्ष 2070 तक भारत को शून्य शुद्ध कार्बन उत्सर्जक देश बनाना।

4. भारत द्वारा प्रारंभ की गई प्रमुख वैश्विक पहलें:

  • मिशन लाइफ (Mission LiFE - Lifestyle for Environment): 'प्रो-प्लैनेट पीपल' (P3) जन-आंदोलन का आह्वान, जो अंधाधुंध उपभोक्तावाद के स्थान पर पर्यावरण-अनुकूल जीवन-शैली अपनाने पर बल देता है।
  • 'वन सन, वन वर्ल्ड, वन ग्रिड' (OSOWOG): ब्रिटेन के साथ मिलकर वैश्विक स्तर पर सौर ऊर्जा ग्रिड को आपस में जोड़ने की महत्वाकांक्षी योजना ("सूर्य कभी अस्त नहीं होता")।
  • आइरिस (IRIS): जलवायु संकट से जूझ रहे छोटे द्वीपीय देशों (SIDS) के बुनियादी ढांचे के संरक्षण हेतु विशेष तकनीकी पहल।

5. सम्मेलन की सीमाएं एवं जलवायु वित्त का संकट:
विकसित देश विकासशील राष्ट्रों को हरित तकनीक अपनाने हेतु प्रतिवर्ष 100 अरब डॉलर की जलवायु वित्त (Climate Finance) सहायता प्रदान करने के अपने पुराने वादे को पूरा करने में पुनः विफल रहे।

6. निष्कर्ष:
ग्लासगो सम्मेलन ने भारत को एक जिम्मेदार और अग्रणी वैश्विक पर्यावरण शक्ति के रूप में स्थापित किया। 'पंचामृत' संकल्पों और 'मिशन लाइफ' के माध्यम से भारत आर्थिक विकास और पर्यावरण संरक्षण के मध्य संतुलन साधते हुए एक हरित, समृद्ध और संधारणीय 'विकसित भारत @2047' की ओर तेजी से अग्रसर है।

इस प्रश्न को संदर्भ में देखें →
निशुल्क एंड्रॉइड ऐप

स्टेट PYQ ऐप पर बेहतर अभ्यास करें

⚡ एरर डायरी · ⏱ मेन्स आंसर पेसर टाइमर · 📴 ऑफलाइन रिवीजन वॉल्ट

डाउनलोड करेंGoogle Play