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अवैध निर्माण की तोड़ फोड़ के प्रति जन आक्रोश बढ़ता जा रहा है। इस समस्या से निपटने के लिए शहरी विकास मंत्रालय ने पाँच सदस्यों की एक समिति गठित की है। इस समिति का प्रतिवेदन लिखिए।

202013M
आदर्श उत्तर

प्रारूप लेखन: उच्चस्तरीय समिति प्रतिवेदन (High-Level Committee Report)

अवैध निर्माणों के ध्वस्तीकरण, जन-आक्रोश एवं व्यावहारिक समाधान संबंधी पाँच-सदसीय उच्चस्तरीय विशेषज्ञ समिति का प्रतिवेदन

गठनकर्ता: नगरीय विकास एवं आवास विभाग, मध्य प्रदेश शासन                          स्थान: भोपाल | दिनांक: 20 नवम्बर 2020

1. समिति की पृष्ठभूमि एवं उद्देश्य:
विभागीय आदेश क्र. 412/नविआ/2020 द्वारा प्रदेश के नगरीय क्षेत्रों में अवैध निर्माणों के विरुद्ध जारी ध्वस्तीकरण कार्यवाहियों से उत्पन्न जन-आक्रोश के अध्ययन एवं व्यावहारिक नीतिगत समाधान प्रस्तुत करने हेतु गठित 5-सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति ने प्रभावित नागरिकों, जनप्रतिनिधियों एवं नगर नियोजकों के साथ व्यापक विचार-विमर्श कर यह प्रतिवेदन प्रस्तुत किया है।

2. जन-आक्रोश के प्रमुख कारण एवं निष्कर्ष:

  • प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का अभाव: पर्याप्त पूर्व-सूचना, सुनवाई का अवसर या विधिक अपील के बिना रातों-रात की जाने वाली बुलडोज़र ध्वस्तीकरण की कार्यवाही।
  • मासूम खरीदारों पर मार: अवैध कॉलोनाइज़र (भू-माफिया) प्लाट बेचकर बच निकलते हैं, जबकि जीवन भर की जमा-पूंजी लगाने वाले मध्यम व गरीब वर्ग के मकान ढहा दिए जाते हैं।
  • पुनर्वास व्यवस्था की अनुपस्थिति: निर्धन परिवारों के आशियाने उजाड़ने से पूर्व उनके लिए किसी वैकल्पिक ट्रांजिट आवास की व्यवस्था न होना।

3. समिति की प्रमुख नीतिगत संस्तुतियाँ एवं सिफारिशें:

  • शमन एवं नियमितीकरण नीति (Compounding Policy): जन-सुरक्षा को प्रभावित न करने वाले 15-20% तक के अनधिकृत निर्माणों को उचित शमन शुल्क (कंपाउंडिंग फीस) लेकर वैध घोषित किया जाए।
  • अवैध कॉलोनाइज़रों पर कठोर आपराधिक कार्यवाही: धोखाधड़ी करने वाले बिल्डरों के विरुद्ध म.प्र. नगर पालिक निगम अधिनियम की धारा 292 के तहत गैर-जमानती एफआईआर दर्ज हो तथा उनकी संपत्तियां कुर्क कर पीड़ितों की क्षतिपूर्ति की जाए।
  • अनिवार्य 30-दिवसीय पूर्व नोटिस एवं अपीलीय ट्रिब्यूनल: ध्वस्तीकरण से पूर्व 30 दिन का नोटिस अनिवार्य हो तथा नगरीय अपीलीय अधिकरण में त्वरित सुनवाई की सुविधा दी जाए।
  • पीएम आवास योजना (PMAY) के तहत पुनर्वास: विस्थापित झुग्गीवासियों को पहले पक्के फ्लैट्स का कब्जा सौंपा जाए।

सादर प्रस्तुतकर्ता समिति सदस्यगण:

1. हस्ताक्षर/- (नीरज मंडलोई, भा.प्र.से.) — अध्यक्ष (प्रमुख सचिव, नगरीय प्रशासन एवं आवास)
2. हस्ताक्षर/- (मुकेश चंद्र गुप्ता, भा.प्र.से.) — सदस्य (आयुक्त, नगर एवं ग्राम निवेश - T&CP)
3. हस्ताक्षर/- (कविन्द्र कियावत, भा.प्र.से.) — सदस्य (संभागीय आयुक्त, भोपाल)
4. हस्ताक्षर/- (प्रो. आलोक शर्मा) — सदस्य (वरिष्ठ नगर नियोजन विशेषज्ञ, मैनेट भोपाल)
5. हस्ताक्षर/- (के.वी.एस. चौधरी, भा.प्र.से.) — सदस्य सचिव (आयुक्त, नगर पालिक निगम भोपाल)

In English (Question & Model Answer)

अवैध निर्माण की तोड़ फोड़ के प्रति जन आक्रोश बढ़ता जा रहा है। इस समस्या से निपटने के लिए शहरी विकास मंत्रालय ने पाँच सदस्यों की एक समिति गठित की है। इस समिति का प्रतिवेदन लिखिए।

[Note for English Medium Aspirants]: As per official MPPSC Examination Rules, Paper 6 (Hindi Essay and Administrative Drafting / हिन्दी निबंध एवं प्रारूप लेखन) must be attempted exclusively in Hindi (Devanagari script) by all candidates regardless of their opted medium for GS1–GS4. Answers written in English are not evaluated in the actual examination. The authentic Hindi model answer is provided below for your preparation.

प्रारूप लेखन: उच्चस्तरीय समिति प्रतिवेदन (High-Level Committee Report)

अवैध निर्माणों के ध्वस्तीकरण, जन-आक्रोश एवं व्यावहारिक समाधान संबंधी पाँच-सदसीय उच्चस्तरीय विशेषज्ञ समिति का प्रतिवेदन

गठनकर्ता: नगरीय विकास एवं आवास विभाग, मध्य प्रदेश शासन                          स्थान: भोपाल | दिनांक: 20 नवम्बर 2020

1. समिति की पृष्ठभूमि एवं उद्देश्य:
विभागीय आदेश क्र. 412/नविआ/2020 द्वारा प्रदेश के नगरीय क्षेत्रों में अवैध निर्माणों के विरुद्ध जारी ध्वस्तीकरण कार्यवाहियों से उत्पन्न जन-आक्रोश के अध्ययन एवं व्यावहारिक नीतिगत समाधान प्रस्तुत करने हेतु गठित 5-सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति ने प्रभावित नागरिकों, जनप्रतिनिधियों एवं नगर नियोजकों के साथ व्यापक विचार-विमर्श कर यह प्रतिवेदन प्रस्तुत किया है।

2. जन-आक्रोश के प्रमुख कारण एवं निष्कर्ष:

  • प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का अभाव: पर्याप्त पूर्व-सूचना, सुनवाई का अवसर या विधिक अपील के बिना रातों-रात की जाने वाली बुलडोज़र ध्वस्तीकरण की कार्यवाही।
  • मासूम खरीदारों पर मार: अवैध कॉलोनाइज़र (भू-माफिया) प्लाट बेचकर बच निकलते हैं, जबकि जीवन भर की जमा-पूंजी लगाने वाले मध्यम व गरीब वर्ग के मकान ढहा दिए जाते हैं।
  • पुनर्वास व्यवस्था की अनुपस्थिति: निर्धन परिवारों के आशियाने उजाड़ने से पूर्व उनके लिए किसी वैकल्पिक ट्रांजिट आवास की व्यवस्था न होना।

3. समिति की प्रमुख नीतिगत संस्तुतियाँ एवं सिफारिशें:

  • शमन एवं नियमितीकरण नीति (Compounding Policy): जन-सुरक्षा को प्रभावित न करने वाले 15-20% तक के अनधिकृत निर्माणों को उचित शमन शुल्क (कंपाउंडिंग फीस) लेकर वैध घोषित किया जाए।
  • अवैध कॉलोनाइज़रों पर कठोर आपराधिक कार्यवाही: धोखाधड़ी करने वाले बिल्डरों के विरुद्ध म.प्र. नगर पालिक निगम अधिनियम की धारा 292 के तहत गैर-जमानती एफआईआर दर्ज हो तथा उनकी संपत्तियां कुर्क कर पीड़ितों की क्षतिपूर्ति की जाए।
  • अनिवार्य 30-दिवसीय पूर्व नोटिस एवं अपीलीय ट्रिब्यूनल: ध्वस्तीकरण से पूर्व 30 दिन का नोटिस अनिवार्य हो तथा नगरीय अपीलीय अधिकरण में त्वरित सुनवाई की सुविधा दी जाए।
  • पीएम आवास योजना (PMAY) के तहत पुनर्वास: विस्थापित झुग्गीवासियों को पहले पक्के फ्लैट्स का कब्जा सौंपा जाए।

सादर प्रस्तुतकर्ता समिति सदस्यगण:

1. हस्ताक्षर/- (नीरज मंडलोई, भा.प्र.से.) — अध्यक्ष (प्रमुख सचिव, नगरीय प्रशासन एवं आवास)
2. हस्ताक्षर/- (मुकेश चंद्र गुप्ता, भा.प्र.से.) — सदस्य (आयुक्त, नगर एवं ग्राम निवेश - T&CP)
3. हस्ताक्षर/- (कविन्द्र कियावत, भा.प्र.से.) — सदस्य (संभागीय आयुक्त, भोपाल)
4. हस्ताक्षर/- (प्रो. आलोक शर्मा) — सदस्य (वरिष्ठ नगर नियोजन विशेषज्ञ, मैनेट भोपाल)
5. हस्ताक्षर/- (के.वी.एस. चौधरी, भा.प्र.से.) — सदस्य सचिव (आयुक्त, नगर पालिक निगम भोपाल)

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