"रनित भृङ्ग घण्टावली, झरत दान मधु नीर/मन्द-मन्द आवत चल्यौ कुञ्जरु कुञ्ज समीर" में रूपक का कौन-सा भेद है?
आदर्श उत्तर
उत्तर: सांग रूपक अलंकार
(व्याख्या: यहाँ 'कुंज-समीर' (उपमेय) पर 'मदमस्त हाथी' (उपमान) का अंगों सहित आरोप किया गया है—भ्रमरों के गुंजार पर घण्टावली का तथा मकरंद-बिन्दुओं पर मद-जल का आरोप है)।
In English (Question & Model Answer)
"रनित भृङ्ग घण्टावली, झरत दान मधु नीर/मन्द-मन्द आवत चल्यौ कुञ्जरु कुञ्ज समीर" में रूपक का कौन-सा भेद है?
[Note for English Medium Aspirants]: As per official MPPSC Examination Rules, Paper 5 (General Hindi & Grammar / सामान्य हिन्दी एवं व्याकरण) must be attempted exclusively in Hindi (Devanagari script). The authentic Hindi model answer is provided below.
उत्तर: सांग रूपक अलंकार
(व्याख्या: यहाँ 'कुंज-समीर' (उपमेय) पर 'मदमस्त हाथी' (उपमान) का अंगों सहित आरोप किया गया है—भ्रमरों के गुंजार पर घण्टावली का तथा मकरंद-बिन्दुओं पर मद-जल का आरोप है)।