किसी एक गद्यांश का एक तिहाई शब्दों में संक्षेपण कीजिए: 'धरती मेरी माता है, मैं उसका पुत्र हूँ।' यही स्वराज्य की भावना है। जब प्रत्येक व्यक्ति उस धरती को जिसमें उसका जन्म हुआ है, उसे अपनी मातृभूमि समझने लगता है, तो उसका मन मातृभूमि से जुड़ जाता है और मातृभूमि के लिए देवत्व की भावना पैदा हो जाती है। जीवन में चाहे जैसी भी स्थिति हो वह मातृभूमि से द्रोह की बात नहीं सोचता। मातृभूमि के प्रति जब यह भाव दृढ़ होता है, वहीं से सच्ची राष्ट्रीय एकता का जन्म होता है। इस स्थिति में मातृभूमि पर बसने वाले नागरिकगण एक दूसरे से सौदा करने या शर्त तय करने की बात नहीं सोचते बल्कि मातृभूमि के प्रति अपने कर्तव्य की बात सोचते हैं।
संक्षेपण (Précis Writing):
उचित शीर्षक: मातृभूमि के प्रति निष्ठा एवं राष्ट्रीय एकता
संक्षेपण:
'धरती मेरी माता है और मैं उसका पुत्र हूँ'—यह भावना ही वास्तविक स्वराज्य और सच्ची राष्ट्रीय एकता का मूल आधार है। जब नागरिक अपनी मातृभूमि के प्रति अटूट भक्ति और देवत्व का भाव रखते हैं, तो वे हर परिस्थिति में देशद्रोह से दूर रहते हैं। ऐसी स्थिति में नागरिक संकीर्ण स्वार्थों और शर्तों से ऊपर उठकर राष्ट्र के प्रति अपने पावन कर्तव्यों को सर्वोपरि मानते हैं।
(मूल शब्द: ~120 शब्द | संक्षेपण शब्द: ~48 शब्द)
In English (Question & Model Answer)
किसी एक गद्यांश का एक तिहाई शब्दों में संक्षेपण कीजिए: 'धरती मेरी माता है, मैं उसका पुत्र हूँ।' यही स्वराज्य की भावना है। जब प्रत्येक व्यक्ति उस धरती को जिसमें उसका जन्म हुआ है, उसे अपनी मातृभूमि समझने लगता है, तो उसका मन मातृभूमि से जुड़ जाता है और मातृभूमि के लिए देवत्व की भावना पैदा हो जाती है। जीवन में चाहे जैसी भी स्थिति हो वह मातृभूमि से द्रोह की बात नहीं सोचता। मातृभूमि के प्रति जब यह भाव दृढ़ होता है, वहीं से सच्ची राष्ट्रीय एकता का जन्म होता है। इस स्थिति में मातृभूमि पर बसने वाले नागरिकगण एक दूसरे से सौदा करने या शर्त तय करने की बात नहीं सोचते बल्कि मातृभूमि के प्रति अपने कर्तव्य की बात सोचते हैं।
[Note for English Medium Aspirants]: As per official MPPSC Examination Rules, Paper 5 (General Hindi & Grammar / सामान्य हिन्दी एवं व्याकरण) must be attempted exclusively in Hindi (Devanagari script). The authentic Hindi model answer is provided below.
संक्षेपण (Précis Writing):
उचित शीर्षक: मातृभूमि के प्रति निष्ठा एवं राष्ट्रीय एकता
संक्षेपण:
'धरती मेरी माता है और मैं उसका पुत्र हूँ'—यह भावना ही वास्तविक स्वराज्य और सच्ची राष्ट्रीय एकता का मूल आधार है। जब नागरिक अपनी मातृभूमि के प्रति अटूट भक्ति और देवत्व का भाव रखते हैं, तो वे हर परिस्थिति में देशद्रोह से दूर रहते हैं। ऐसी स्थिति में नागरिक संकीर्ण स्वार्थों और शर्तों से ऊपर उठकर राष्ट्र के प्रति अपने पावन कर्तव्यों को सर्वोपरि मानते हैं।
(मूल शब्द: ~120 शब्द | संक्षेपण शब्द: ~48 शब्द)