मुख्य›MPPSC Mains (हिन्दी)›सामान्य अध्ययन प्रथम प्रश्नपत्र›खण्ड-अ: इतिहास›इकाई-1 भारत का प्राचीन एवं मध्यकालीन इतिहास›भारतीय इतिहास - भारत का राजनैतिक, आर्थिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक इतिहास, हड़प्पा सभ्यता से 10वीं शताब्दी तक›सौदायिक एवं असौदायिक से क्या तात्पर्य है?

सौदायिक एवं असौदायिक से क्या तात्पर्य है?

20223M
आदर्श उत्तर

सौदायिक एवं असौदायिक स्त्रीधन:

  • सौदायिक स्त्रीधन: वह संपत्ति/आभूषण जो स्त्री को विवाह के पूर्व, समय अथवा पश्चात अपने माता-पिता, भाई या पति से स्नेहपूर्वक उपहार स्वरूप मिले हों; इस पर स्त्री का पूर्ण व स्वतंत्र अधिकार होता है।
  • असौदायिक स्त्रीधन: वह धन जो विवाह के पश्चात किसी गैर-संबंधी (अजनबी) से प्राप्त हुआ हो अथवा स्वयं के शिल्प/श्रम से अर्जित किया गया हो; इसके विक्रय हेतु पति की सहमति आवश्यक मानी गई है।

In English (Question & Model Answer)

What are Saudayika and Asaudayika?

Saudayika and Asaudayika (स्त्रीधन के भेद):

  • Saudayika (सौदायिक स्त्रीधन): Gifts and ornaments received by a woman with love and affection from her parents, siblings, or husband before, during, or after marriage; she exercises absolute, unrestricted disposal rights over it.
  • Asaudayika (असौदायिक स्त्रीधन): Wealth or gifts received from strangers or acquired through self-exertion/arts after marriage; husband's consent is required to alienate it.
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