मुख्य›MPPSC Mains (हिन्दी)›सामान्य अध्ययन प्रथम प्रश्नपत्र›खण्ड-अ: इतिहास›इकाई-5 मध्य प्रदेश की रियासतें एवं जनजाति नायक›भारतीय सांस्कृतिक विरासत (मध्यप्रदेश के विशेष संदर्भ में) प्राचीन काल से आधुनिक काल तक विभिन्न कला प्रारूपों, साहित्य, पर्व (उत्सव) एवं वास्तुकला के प्रमुख पक्ष›सिद्ध साहित्य परम्परा से क्या तात्पर्य है?

सिद्ध साहित्य परम्परा से क्या तात्पर्य है?

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आदर्श उत्तर

सिद्ध साहित्य परंपरा:

  • उत्पत्ति एवं काल: 8वीं से 12वीं सदी में पूर्वी भारत (बिहार, बंगाल) में बौद्ध धर्म की वज्रयान/सहजयान शाखा के 84 सिद्धों द्वारा अपभ्रंश व पुरानी हिंदी में रचित साहित्य।
  • प्रमुख सिद्ध एवं भाषा: सरहपा (हिंदी के प्रथम कवि), लुइपा, कण्हपा; इनकी रचनाएं प्रतीकात्मक 'संध्या भाषा' (उलटबांसी शैली) में हैं, जो बाह्य आडंबरों व जाति-प्रथा का विरोध करती हैं।

In English (Question & Model Answer)

What is meant by Siddha Sahitya Tradition?

Siddha Sahitya Tradition (सिद्ध साहित्य परंपरा):

  • Origin: Earliest vernacular devotional literature in Apabhramsha/Old Hindi composed by the 84 Mahasiddhas belonging to the Vajrayana/Sahajayana Buddhist cult (8th to 12th Century A.D. in Eastern India/Bihar/Bengal).
  • Key Masters & Features: Led by Saraha (Sarahapa - pioneer), Luipa, and Kanha; written in mystic symbolic language (Sandhya Bhasha), rejecting caste orthodoxies and ritualism.
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