मुख्य›MPPSC Mains (हिन्दी)›सामान्य अध्ययन द्वितीय प्रश्नपत्र›खण्ड-अ: राजनीति विज्ञान›इकाई-3 लोकतंत्र, मीडिया एवं विचारक›भारतीय राजनीतिक विचारक कौटिल्य, देवी अहिल्याबाई होलकर, महात्मा गाँधी, जवाहरलाल नेहरु, सरदार वल्लभ भाई पटेल, राममनोहर लोहिया, डॉ. भीमराव आम्बेडकर, पंडित दीनदयाल उपाध्याय, जयप्रकाश नारायण›"जब तक मनुष्य की आर्थिक आवश्यकताओं की पूर्ति नहीं होती, उससे

"जब तक मनुष्य की आर्थिक आवश्यकताओं की पूर्ति नहीं होती, उससे सांस्कृतिक सृजनात्मकता की आशा करना व्यर्थ है।" यह कथन किसका है? समझाइए।

20223M
आदर्श उत्तर

"जब तक मनुष्य की आर्थिक आवश्यकताएं पूरी नहीं होतीं, उससे सांस्कृतिक रचनात्मकता की अपेक्षा व्यर्थ है" — व्याख्या:

  • विचारक: डॉ. राम मनोहर लोहिया (Dr. Ram Manohar Lohia) (तथा मार्क्सवादी भौतिकवादी दर्शन के अनुरूप)।
  • तात्पर्य: भूख, गरीबी और अभाव से जूझता व्यक्ति कला, साहित्य व संस्कृति का सृजन नहीं कर सकता; सांस्कृतिक व आध्यात्मिक प्रगति हेतु आर्थिक स्वावलंबन बुनियादी पूर्व-शर्त है।

In English (Question & Model Answer)

"Unless man's economic needs are fulfilled, it is futile to expect cultural creativity from him." Whose statement is this? Explain.

"Unless Man's Economic Needs are Fulfilled, It Is Futile to Expect Cultural Creativity From Him" — Explanation:

  • Propounder: Dr. Ram Manohar Lohia (डॉ. राम मनोहर लोहिया) in his socio-economic discourses (also structurally aligned with Karl Marx's Historical Materialism).
  • Meaning: Basic physical subsistence and economic dignity are prerequisites for intellectual, artistic, and cultural pursuits.
इस प्रश्न को संदर्भ में देखें →
निशुल्क एंड्रॉइड ऐप

स्टेट PYQ ऐप पर बेहतर अभ्यास करें

⚡ एरर डायरी · ⏱ मेन्स आंसर पेसर टाइमर · 📴 ऑफलाइन रिवीजन वॉल्ट

डाउनलोड करेंGoogle Play