मुख्य›MPPSC Mains (हिन्दी)›सामान्य अध्ययन द्वितीय प्रश्नपत्र›खण्ड-अ: राजनीति विज्ञान›इकाई-1 संविधान एवं मौलिक अधिकार›भारतीय संविधान - निर्माण, विशेषताएँ, मूल ढाँचा एवं प्रमुख संशोधन›बोम्मई केस में उच्चतम न्यायालय के किस न्यायमूर्ति ने 'उद्देशिका' को

बोम्मई केस में उच्चतम न्यायालय के किस न्यायमूर्ति ने 'उद्देशिका' को संविधान का अभिन्न अंग कहा है?

20223M
आदर्श उत्तर

एस.आर. बोम्मई वाद (1994) में प्रस्तावना को संविधान का अभिन्न अंग मानने वाले न्यायमूर्ति:

  • सर्वोच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति: न्यायमूर्ति के. रामास्वामी एवं न्यायमूर्ति बी.पी. जीवन रेड्डी (तथा न्यायमूर्ति ए.एम. अहमदी) ने स्पष्ट रूप से अभीनिर्धारित किया कि 'प्रस्तावना संविधान का अभिन्न अंग है' तथा यह संविधान के मूल ढांचे का अभिन्न घटक है।

In English (Question & Model Answer)

In Bommai case, which Justice of the Supreme Court called the 'Preamble' as the integral part of the Constitution?

Preamble as Integral Part in S.R. Bommai Case (1994):

  • Judges: Justice K. Ramaswamy and Justice B.P. Jeevan Reddy (along with Justice A.M. Ahmadi and Justice S.R. Pandian) explicitly affirmed that the Preamble is an integral part of the Constitution and constitutes its foundational basic structure.
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