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जैन दर्शन का त्रिरत्न क्या है? इसका क्या महत्व है?

20222M
आदर्श उत्तर

जैन दर्शन के 'त्रिरत्न' एवं उनका महत्व:

  1. सम्यक् दर्शन: सत्य में यथार्थ श्रद्धा।
  2. सम्यक् ज्ञान: संशय-रहित वास्तविक ज्ञान।
  3. सम्यक् चरित्र: पंच महाव्रतों का आचरण।

महत्व: यह कर्म-बंधनों को नष्ट कर मोक्ष (कैवल्य) प्राप्ति का एकमात्र अमोघ मार्ग है।

In English (Question & Model Answer)

What is Triratna in Jain philosophy? What is its importance?

Three Jewels (Triratna) of Jainism and Their Significance:

  1. Samyak Darshana: Right Faith in truth.
  2. Samyak Jnana: Right Knowledge without doubts.
  3. Samyak Charitra: Right Conduct through vows.

Significance: Serves as the indispensable threefold pathway to eradicate karma and attain spiritual liberation (Moksha/Kevalya).

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