मुख्य›MPPSC Mains (हिन्दी)›सामान्य अध्ययन चतुर्थ प्रश्नपत्र›खण्ड-अ: दर्शनशास्त्र, मनोविज्ञान, लोक प्रशासन एवं केस स्टडी›इकाई-4 लोक प्रशासन में नैतिक मूल्य›भ्रष्टाचार - भ्रष्टाचार के प्रकार एवं कारण, भ्रष्टाचार का प्रभाव, भ्रष्टाचार को अल्पतम करने के उपाय, समाज, सूचनातंत्र, परिवार एवं व्हिसिलब्लोअर की भूमिका, भ्रष्टाचार पर राष्ट्रसंघ की घोषणा, भ्रष्टाचार का मापन, ट्रांसपरेंसी इन्टरनेशनल, लोकपाल एवं लोकायुक्त›केन्द्रीय सतर्कता आयोग पर एक संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।

केन्द्रीय सतर्कता आयोग पर एक संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।

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आदर्श उत्तर

केन्द्रीय सतर्कता आयोग (Central Vigilance Commission - CVC):

  1. स्थापना एवं स्वरूप: 1964 में संथानम समिति की सिफारिश पर स्थापित; 2003 में सांविधिक (Statutory) दर्जा प्राप्त। यह भारत की सर्वोच्च सतर्कता संस्था है।
  2. संरचना: एक केन्द्रीय सतर्कता आयुक्त (अध्यक्ष) और अधिकतम दो सतर्कता आयुक्त (नियुक्ति: राष्ट्रपति द्वारा 3-सदस्यीय समिति की सिफारिश पर; कार्यकाल: 4 वर्ष या 65 वर्ष आयु)।
  3. प्रमुख कार्य: केंद्र सरकार के अधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार शिकायतों की जांच करना, भ्रष्टाचार निवारण मामलों में CBI के कामकाज का अधीक्षण करना तथा शासन में सत्यनिष्ठा को बढ़ावा देना।

In English (Question & Model Answer)

Write a brief note on the Central Vigilance Commission.

Short Note on the Central Vigilance Commission (CVC):

  1. Genesis & Status: Established in 1964 following the Santhanam Committee recommendations; granted Statutory Status via the CVC Act, 2003 as India's apex vigilance institution.
  2. Composition: A Central Vigilance Commissioner (Chairperson) and up to two Vigilance Commissioners (Appointed by President on the advice of PM-led panel; Tenure: 4 years or 65 years of age).
  3. Key Mandate: Inquiring into corruption allegations against central officials, exercising statutory superintendence over CBI for PC Act investigations, and advising ministries on systemic vigilance reforms.
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