मुख्य›MPPSC Mains (हिन्दी)›सामान्य अध्ययन चतुर्थ प्रश्नपत्र›खण्ड-अ: दर्शनशास्त्र, मनोविज्ञान, लोक प्रशासन एवं केस स्टडी›इकाई-4 लोक प्रशासन में नैतिक मूल्य›भ्रष्टाचार - भ्रष्टाचार के प्रकार एवं कारण, भ्रष्टाचार का प्रभाव, भ्रष्टाचार को अल्पतम करने के उपाय, समाज, सूचनातंत्र, परिवार एवं व्हिसिलब्लोअर की भूमिका, भ्रष्टाचार पर राष्ट्रसंघ की घोषणा, भ्रष्टाचार का मापन, ट्रांसपरेंसी इन्टरनेशनल, लोकपाल एवं लोकायुक्त›"भ्रष्टाचार से निपटने के लिए नैतिकता और प्रशासन एक दूसरे के पूरक

"भ्रष्टाचार से निपटने के लिए नैतिकता और प्रशासन एक दूसरे के पूरक हैं।" क्या आप इस कथन से सहमत हैं?

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आदर्श उत्तर

हाँ, पूर्णतः सहमत। कानून व प्रशासनिक तंत्र (नियम, CVC, लोकपाल) भ्रष्टाचार पर बाहरी नियंत्रण स्थापित करते हैं, जबकि नैतिकता (सत्यनिष्ठा, अंतरात्मा) लोक सेवक पर आंतरिक नियंत्रण स्थापित करती है। बिना आंतरिक नैतिकता के कानूनी नियम निष्प्रभावी हो जाते हैं।

In English (Question & Model Answer)

"For tackling corruption, morality and administration are complementary to each other." Do you agree with this statement?

Yes, absolutely complementary. Administrative institutions and punitive laws establish external structural deterrence, whereas personal morality and integrity create internal psychological resistance against corrupt incentives. External laws fail without internalized ethics.

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