मुख्य›MPPSC Mains (हिन्दी)›सामान्य हिन्दी एवं व्याकरण›सामान्य हिन्दी एवं व्याकरण›रस एवं छंद›बीती विभावरी जाग री। अम्बर-पनघट में डुबो रही तारा-घट ऊषा-नागरी।

बीती विभावरी जाग री। अम्बर-पनघट में डुबो रही तारा-घट ऊषा-नागरी। उपर्युक्त पंक्तियों में कौन-सा अलंकार है?

20223M
आदर्श उत्तर

अलंकार की पहचान एवं व्याख्या:

"बीती विभावरी जाग री।
अम्बर-पनघट में डुबो रही तारा-घट ऊषा-नागरी॥"

  • अलंकार: रूपक अलंकार (सांग रूपक अलंकार) तथा मानवीकरण अलंकार।
  • स्पष्टीकरण: यहाँ उपमेय पर उपमान का प्रत्यक्ष अभेद आरोप है—
    • अम्बर (आकाश) पर पनघट का आरोप
    • तारा पर घड़े (घट) का आरोप
    • ऊषा (प्रभात) पर नागरी (चतुर स्त्री) का अभेद आरोप किया गया है।

In English (Question & Model Answer)

बीती विभावरी जाग री। अम्बर-पनघट में डुबो रही तारा-घट ऊषा-नागरी। उपर्युक्त पंक्तियों में कौन-सा अलंकार है?

[Note for English Medium Aspirants]: As per official MPPSC Examination Rules, Paper 5 (General Hindi & Grammar / सामान्य हिन्दी एवं व्याकरण) must be attempted exclusively in Hindi (Devanagari script). The authentic Hindi model answer is provided below.

अलंकार की पहचान एवं व्याख्या:

"बीती विभावरी जाग री।
अम्बर-पनघट में डुबो रही तारा-घट ऊषा-नागरी॥"

  • अलंकार: रूपक अलंकार (सांग रूपक अलंकार) तथा मानवीकरण अलंकार।
  • स्पष्टीकरण: यहाँ उपमेय पर उपमान का प्रत्यक्ष अभेद आरोप है—
    • अम्बर (आकाश) पर पनघट का आरोप
    • तारा पर घड़े (घट) का आरोप
    • ऊषा (प्रभात) पर नागरी (चतुर स्त्री) का अभेद आरोप किया गया है।
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