बीती विभावरी जाग री। अम्बर-पनघट में डुबो रही तारा-घट ऊषा-नागरी। उपर्युक्त पंक्तियों में कौन-सा अलंकार है?
आदर्श उत्तर
अलंकार की पहचान एवं व्याख्या:
"बीती विभावरी जाग री।
अम्बर-पनघट में डुबो रही तारा-घट ऊषा-नागरी॥"
- अलंकार: रूपक अलंकार (सांग रूपक अलंकार) तथा मानवीकरण अलंकार।
- स्पष्टीकरण: यहाँ उपमेय पर उपमान का प्रत्यक्ष अभेद आरोप है—
- अम्बर (आकाश) पर पनघट का आरोप
- तारा पर घड़े (घट) का आरोप
- ऊषा (प्रभात) पर नागरी (चतुर स्त्री) का अभेद आरोप किया गया है।
In English (Question & Model Answer)
बीती विभावरी जाग री। अम्बर-पनघट में डुबो रही तारा-घट ऊषा-नागरी। उपर्युक्त पंक्तियों में कौन-सा अलंकार है?
[Note for English Medium Aspirants]: As per official MPPSC Examination Rules, Paper 5 (General Hindi & Grammar / सामान्य हिन्दी एवं व्याकरण) must be attempted exclusively in Hindi (Devanagari script). The authentic Hindi model answer is provided below.
अलंकार की पहचान एवं व्याख्या:
"बीती विभावरी जाग री।
अम्बर-पनघट में डुबो रही तारा-घट ऊषा-नागरी॥"
- अलंकार: रूपक अलंकार (सांग रूपक अलंकार) तथा मानवीकरण अलंकार।
- स्पष्टीकरण: यहाँ उपमेय पर उपमान का प्रत्यक्ष अभेद आरोप है—
- अम्बर (आकाश) पर पनघट का आरोप
- तारा पर घड़े (घट) का आरोप
- ऊषा (प्रभात) पर नागरी (चतुर स्त्री) का अभेद आरोप किया गया है।