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निम्नलिखित विषय पर लगभग 1000 शब्दों में निबंध लिखिए : "अंतरिक्ष में भारत के बढ़ते कदम"

202250M
आदर्श उत्तर

अंतरिक्ष में भारत के बढ़ते कदम: थुम्बा के तट से चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव, सौर मिशन एवं आत्मनिर्भर स्पेस 2.0 का स्वर्णिम युग

"कुछ लोग पूछते हैं कि विकासशील देश के लिए अंतरिक्ष अनुसंधान की क्या आवश्यकता है? हमारे लिए लक्ष्य की कोई अस्पष्टता नहीं है। मानव और समाज की वास्तविक समस्याओं के समाधान में अत्याधुनिक तकनीक के प्रयोग में हमें किसी से पीछे नहीं रहना चाहिए।" — डॉ. विक्रम साराभाई (भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के जनक)

1. प्रस्तावना एवं ऐतिहासिक विकास-यात्रा:
भारत का अंतरिक्ष कार्यक्रम विश्व इतिहास में वैज्ञानिक जिजीविषा, स्वदेशी आत्मनिर्भरता और मानवीय कल्याण की सबसे प्रेरणादायी गाथाओं में से एक है। 1963 में केरल के थुम्बा में चर्च के पादरियों के कमरे में कार्यालय और साइकिल-बैलगाड़ियों पर रॉकेट के पुर्जे ढोने से प्रारंभ हुई यह यात्रा आज ब्रह्मांड के रहस्यों को उद्घाटित करने वाली महाशक्ति बन चुकी है। चंद्रमा के अज्ञात दक्षिणी ध्रुव पर सफलतापूर्वक सॉफ्ट-लैंडिंग करने वाला भारत विश्व का प्रथम देश तथा चंद्र-सतह पर उतरने वाला विश्व का चौथा देश बनकर इतिहास रच चुका है।

2. ऐतिहासिक वैज्ञानिक उपलब्धियां एवं गहन अंतरिक्ष मिशन:

  • स्वदेशी प्रक्षेपण यानों का विकास: क्रायोजेनिक तकनीक के विदेशी प्रतिबंधों को परास्त कर इसरो ने अपने विश्वसनीय PSLV (ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान) और बाहुबली GSLV / LVM3 रॉकेट्स का पूर्ण स्वदेशी विकास किया।
  • चंद्रयान-1 (2008): प्रथम चंद्र मिशन जिसने चंद्रमा की सतह पर जल के अणुओं (H2O/OHH_2O/OHH2​O/OH) की ऐतिहासिक खोज कर संपूर्ण विश्व को चौंका दिया।
  • मंगलयान (MOM - 2013): अपने प्रथम ही प्रयास में मंगल की कक्षा में स्थापित होने वाला विश्व का पहला देश तथा हॉलीवुड फिल्मों से भी कम लागत (~450 करोड़ रुपये) में मिशन पूर्ण करने का कीर्तिमान।
  • चंद्रयान-3 (23 अगस्त 2023 - राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस): विक्रम लैंडर और प्रज्ञान रोवर की 'शिव शक्ति पॉइंट' पर सफल लैंडिंग, जिसने चंद्रमा पर सल्फर की मौजूदगी की पुष्टि की।
  • आदित्य-L1 (2023): सूर्य का 24x7 अध्ययन करने हेतु लैग्रेंज पॉइंट 1 (L1) पर स्थापित भारत की पहली अंतरिक्ष वेधशाला।
  • एक्सपोसेट (XPoSat) एवं एस्ट्रोसैट: ब्लैक होल और न्यूट्रॉन तारों के ध्रुवीकरण व ब्रह्मांडीय विकिरणों का अध्ययन करने वाले समर्पित वैज्ञानिक उपग्रह।

3. आम नागरिक के कल्याण एवं राष्ट्रीय सुरक्षा में अंतरिक्ष तकनीक:

  • आपदा प्रबंधन एवं मौसम पूर्वानुमान: इनसैट और कार्टोसैट उपग्रहों द्वारा चक्रवातों (जैसे बिपरजॉय, मोचा) की सटीक पूर्व चेतावनी, जिससे जनहानि शून्य के स्तर पर आ गई।
  • स्वदेशी नेविगेशन प्रणाली (नाविक - NavIC): विदेशी जीपीएस (GPS) पर निर्भरता समाप्त कर 7 उपग्रहों का स्वतंत्र भारतीय नेविगेशन तंत्र, जो सामरिक व नागरिक सुरक्षा का आधार है।
  • कृषि एवं सुदूर संवेदन (Remote Sensing): उपग्रहों द्वारा मिट्टी की नमी, भू-जल स्तर, फसल बीमा आकलन तथा मछुआरों को समुद्र में 'संभावित मत्स्य क्षेत्र' (PFZ) की सटीक जानकारी।
  • सामरिक अंतरिक्ष सुरक्षा: रक्षा बलों हेतु समर्पित सैन्य उपग्रह (GSAT-7/रुक्मिणी) तथा मिशन शक्ति (ASAT Test 2019) द्वारा उपग्रह मारक क्षमता का सफल प्रदर्शन।

4. निजी क्षेत्र का समावेशन एवं 'स्पेस 2.0' (Space Sector Reforms):

  • भारतीय अंतरिक्ष नीति 2023: अंतरिक्ष क्षेत्र को निजी स्टार्टअप्स और गैर-सरकारी संस्थाओं (NGEs) हेतु खोलना।
  • इन-स्पेस (IN-SPACe): निजी क्षेत्र को इसरो की अत्याधुनिक प्रयोगशालाओं और लॉन्च पैड्स के उपयोग हेतु एकल-खिड़की नियामक प्राधिकरण।
  • उभरते स्पेस स्टार्टअप्स: स्काईरूट एयरोस्पेस (विक्रम-एस रॉकेट), अग्निकुल कॉसमॉस (3D-प्रिंटेड रॉकेट इंजन) तथा पिक्सल (हाइपरस्पेक्ट्रल सैटेलाइट्स)।
  • न्यूस्पेस इंडिया लिमिटेड (NSIL): विदेशी उपग्रहों के वाणिज्यिक प्रक्षेपण से भारी विदेशी मुद्रा का अर्जन।

5. आगामी भविष्यगामी महत्वाकांक्षी परियोजनाएं:

  • गगनयान मिशन: भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों ('व्योमनॉट्स') को स्वदेशी रॉकेट से पृथ्वी की निचली कक्षा में भेजने का मानवयुक्त अंतरिक्ष मिशन।
  • भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन (BAS): वर्ष 2035 तक अंतरिक्ष में भारत का अपना स्वतंत्र स्थाई अंतरिक्ष स्टेशन स्थापित करने का लक्ष्य।
  • चंद्रमा पर भारतीय (2040): वर्ष 2040 तक भारतीय अंतरिक्ष यात्री को चंद्रमा की धरती पर उतारने का राष्ट्रीय संकल्प।
  • शुक्रयान एवं निसार (NISAR): शुक्र ग्रह का अध्ययन तथा नासा-इसरो का संयुक्त अत्याधुनिक डुअल-बैंड रडार उपग्रह।

6. प्रमुख चुनौतियाँ एवं आगे की राह:

  • अंतरिक्ष मलबे का प्रबंधन: इसरो का 'प्रोजेक्ट नेत्रा' (NETRA) अंतरिक्ष संपत्तियों की सुरक्षा हेतु मलबे पर निरंतर निगरानी रख रहा है।
  • वैश्विक वाणिज्यिक बाज़ार में हिस्सेदारी: वर्तमान में 2% हिस्सेदारी को 2030 तक बढ़ाकर 10% तक ले जाने का लक्ष्य।
  • पुनः प्रयोज्य प्रक्षेपण यान (RLV): प्रक्षेपण लागत को 80% तक कम करने हेतु रीयूजेबल रॉकेट तकनीक का विकास।

7. निष्कर्ष:
भारत का अंतरिक्ष कार्यक्रम केवल रॉकेट और उपग्रहों का प्रक्षेपण नहीं, बल्कि 140 करोड़ भारतीयों के अदम्य साहस, वैज्ञानिक स्वाभिमान और वैश्विक नेतृत्व का जीवंत प्रतीक है। चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर तिरंगा फहराने से लेकर अनंत ब्रह्मांड की खोज तक, भारतीय अंतरिक्ष विज्ञान 'आत्मनिर्भर भारत' और 'विकसित भारत @2047' की सर्वोच्च प्रेरणा बना रहेगा।

In English (Question & Model Answer)

निम्नलिखित विषय पर लगभग 1000 शब्दों में निबंध लिखिए : "अंतरिक्ष में भारत के बढ़ते कदम"

[Note for English Medium Aspirants]: As per official MPPSC Examination Rules, Paper 6 (Hindi Essay and Administrative Drafting / हिन्दी निबंध एवं प्रारूप लेखन) must be attempted exclusively in Hindi (Devanagari script) by all candidates regardless of their opted medium for GS1–GS4. Answers written in English are not evaluated in the actual examination. The authentic Hindi model answer is provided below for your preparation.

अंतरिक्ष में भारत के बढ़ते कदम: थुम्बा के तट से चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव, सौर मिशन एवं आत्मनिर्भर स्पेस 2.0 का स्वर्णिम युग

"कुछ लोग पूछते हैं कि विकासशील देश के लिए अंतरिक्ष अनुसंधान की क्या आवश्यकता है? हमारे लिए लक्ष्य की कोई अस्पष्टता नहीं है। मानव और समाज की वास्तविक समस्याओं के समाधान में अत्याधुनिक तकनीक के प्रयोग में हमें किसी से पीछे नहीं रहना चाहिए।" — डॉ. विक्रम साराभाई (भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के जनक)

1. प्रस्तावना एवं ऐतिहासिक विकास-यात्रा:
भारत का अंतरिक्ष कार्यक्रम विश्व इतिहास में वैज्ञानिक जिजीविषा, स्वदेशी आत्मनिर्भरता और मानवीय कल्याण की सबसे प्रेरणादायी गाथाओं में से एक है। 1963 में केरल के थुम्बा में चर्च के पादरियों के कमरे में कार्यालय और साइकिल-बैलगाड़ियों पर रॉकेट के पुर्जे ढोने से प्रारंभ हुई यह यात्रा आज ब्रह्मांड के रहस्यों को उद्घाटित करने वाली महाशक्ति बन चुकी है। चंद्रमा के अज्ञात दक्षिणी ध्रुव पर सफलतापूर्वक सॉफ्ट-लैंडिंग करने वाला भारत विश्व का प्रथम देश तथा चंद्र-सतह पर उतरने वाला विश्व का चौथा देश बनकर इतिहास रच चुका है।

2. ऐतिहासिक वैज्ञानिक उपलब्धियां एवं गहन अंतरिक्ष मिशन:

  • स्वदेशी प्रक्षेपण यानों का विकास: क्रायोजेनिक तकनीक के विदेशी प्रतिबंधों को परास्त कर इसरो ने अपने विश्वसनीय PSLV (ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान) और बाहुबली GSLV / LVM3 रॉकेट्स का पूर्ण स्वदेशी विकास किया।
  • चंद्रयान-1 (2008): प्रथम चंद्र मिशन जिसने चंद्रमा की सतह पर जल के अणुओं (H2O/OHH_2O/OHH2​O/OH) की ऐतिहासिक खोज कर संपूर्ण विश्व को चौंका दिया।
  • मंगलयान (MOM - 2013): अपने प्रथम ही प्रयास में मंगल की कक्षा में स्थापित होने वाला विश्व का पहला देश तथा हॉलीवुड फिल्मों से भी कम लागत (~450 करोड़ रुपये) में मिशन पूर्ण करने का कीर्तिमान।
  • चंद्रयान-3 (23 अगस्त 2023 - राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस): विक्रम लैंडर और प्रज्ञान रोवर की 'शिव शक्ति पॉइंट' पर सफल लैंडिंग, जिसने चंद्रमा पर सल्फर की मौजूदगी की पुष्टि की।
  • आदित्य-L1 (2023): सूर्य का 24x7 अध्ययन करने हेतु लैग्रेंज पॉइंट 1 (L1) पर स्थापित भारत की पहली अंतरिक्ष वेधशाला।
  • एक्सपोसेट (XPoSat) एवं एस्ट्रोसैट: ब्लैक होल और न्यूट्रॉन तारों के ध्रुवीकरण व ब्रह्मांडीय विकिरणों का अध्ययन करने वाले समर्पित वैज्ञानिक उपग्रह।

3. आम नागरिक के कल्याण एवं राष्ट्रीय सुरक्षा में अंतरिक्ष तकनीक:

  • आपदा प्रबंधन एवं मौसम पूर्वानुमान: इनसैट और कार्टोसैट उपग्रहों द्वारा चक्रवातों (जैसे बिपरजॉय, मोचा) की सटीक पूर्व चेतावनी, जिससे जनहानि शून्य के स्तर पर आ गई।
  • स्वदेशी नेविगेशन प्रणाली (नाविक - NavIC): विदेशी जीपीएस (GPS) पर निर्भरता समाप्त कर 7 उपग्रहों का स्वतंत्र भारतीय नेविगेशन तंत्र, जो सामरिक व नागरिक सुरक्षा का आधार है।
  • कृषि एवं सुदूर संवेदन (Remote Sensing): उपग्रहों द्वारा मिट्टी की नमी, भू-जल स्तर, फसल बीमा आकलन तथा मछुआरों को समुद्र में 'संभावित मत्स्य क्षेत्र' (PFZ) की सटीक जानकारी।
  • सामरिक अंतरिक्ष सुरक्षा: रक्षा बलों हेतु समर्पित सैन्य उपग्रह (GSAT-7/रुक्मिणी) तथा मिशन शक्ति (ASAT Test 2019) द्वारा उपग्रह मारक क्षमता का सफल प्रदर्शन।

4. निजी क्षेत्र का समावेशन एवं 'स्पेस 2.0' (Space Sector Reforms):

  • भारतीय अंतरिक्ष नीति 2023: अंतरिक्ष क्षेत्र को निजी स्टार्टअप्स और गैर-सरकारी संस्थाओं (NGEs) हेतु खोलना।
  • इन-स्पेस (IN-SPACe): निजी क्षेत्र को इसरो की अत्याधुनिक प्रयोगशालाओं और लॉन्च पैड्स के उपयोग हेतु एकल-खिड़की नियामक प्राधिकरण।
  • उभरते स्पेस स्टार्टअप्स: स्काईरूट एयरोस्पेस (विक्रम-एस रॉकेट), अग्निकुल कॉसमॉस (3D-प्रिंटेड रॉकेट इंजन) तथा पिक्सल (हाइपरस्पेक्ट्रल सैटेलाइट्स)।
  • न्यूस्पेस इंडिया लिमिटेड (NSIL): विदेशी उपग्रहों के वाणिज्यिक प्रक्षेपण से भारी विदेशी मुद्रा का अर्जन।

5. आगामी भविष्यगामी महत्वाकांक्षी परियोजनाएं:

  • गगनयान मिशन: भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों ('व्योमनॉट्स') को स्वदेशी रॉकेट से पृथ्वी की निचली कक्षा में भेजने का मानवयुक्त अंतरिक्ष मिशन।
  • भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन (BAS): वर्ष 2035 तक अंतरिक्ष में भारत का अपना स्वतंत्र स्थाई अंतरिक्ष स्टेशन स्थापित करने का लक्ष्य।
  • चंद्रमा पर भारतीय (2040): वर्ष 2040 तक भारतीय अंतरिक्ष यात्री को चंद्रमा की धरती पर उतारने का राष्ट्रीय संकल्प।
  • शुक्रयान एवं निसार (NISAR): शुक्र ग्रह का अध्ययन तथा नासा-इसरो का संयुक्त अत्याधुनिक डुअल-बैंड रडार उपग्रह।

6. प्रमुख चुनौतियाँ एवं आगे की राह:

  • अंतरिक्ष मलबे का प्रबंधन: इसरो का 'प्रोजेक्ट नेत्रा' (NETRA) अंतरिक्ष संपत्तियों की सुरक्षा हेतु मलबे पर निरंतर निगरानी रख रहा है।
  • वैश्विक वाणिज्यिक बाज़ार में हिस्सेदारी: वर्तमान में 2% हिस्सेदारी को 2030 तक बढ़ाकर 10% तक ले जाने का लक्ष्य।
  • पुनः प्रयोज्य प्रक्षेपण यान (RLV): प्रक्षेपण लागत को 80% तक कम करने हेतु रीयूजेबल रॉकेट तकनीक का विकास।

7. निष्कर्ष:
भारत का अंतरिक्ष कार्यक्रम केवल रॉकेट और उपग्रहों का प्रक्षेपण नहीं, बल्कि 140 करोड़ भारतीयों के अदम्य साहस, वैज्ञानिक स्वाभिमान और वैश्विक नेतृत्व का जीवंत प्रतीक है। चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर तिरंगा फहराने से लेकर अनंत ब्रह्मांड की खोज तक, भारतीय अंतरिक्ष विज्ञान 'आत्मनिर्भर भारत' और 'विकसित भारत @2047' की सर्वोच्च प्रेरणा बना रहेगा।

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