मुख्य›MPPSC Mains (हिन्दी)›सामान्य अध्ययन चतुर्थ प्रश्नपत्र›खण्ड-अ: दर्शनशास्त्र, मनोविज्ञान, लोक प्रशासन एवं केस स्टडी›इकाई-1 भारतीय षड्दर्शन, दार्शनिक/विचारक, समाज सुधारक›स्वामी दयानंद सरस्वती, स्वामी विवेकानंद, महर्षि अरविन्द, सर्वपल्ली राधाकृष्णन, डॉ. भीमराव आम्बेडकर, पंडित दीनदयाल उपाध्याय›वेदों के बारे में दयानन्द सरस्वती का क्या विचार है?

वेदों के बारे में दयानन्द सरस्वती का क्या विचार है?

20232M
आदर्श उत्तर

वेदों के बारे में स्वामी दयानन्द सरस्वती का विचार:

  • वेदों को ईश्वर-प्रदत्त, नित्य, स्वतः-प्रमाण तथा समस्त सत्य विद्याओं की मूल पुस्तक मानते थे ("वेदों की ओर लौटो")। वे केवल चार संहिताओं (ऋक्, यजुः, साम, अथर्व) को ही निर्भ्रांत प्रमाण मानते थे।

In English (Question & Model Answer)

What is Dayananda Saraswati's idea about the Vedas?

Swami Dayananda Saraswati's View on the Vedas:

  • Held the Vedas as divinely revealed, eternal, infallible, and the primary repository of all true knowledge and sciences ("Back to the Vedas"), recognizing only the four Samhitas as self-evident authority.
इस प्रश्न को संदर्भ में देखें →
निशुल्क एंड्रॉइड ऐप

स्टेट PYQ ऐप पर बेहतर अभ्यास करें

⚡ एरर डायरी · ⏱ मेन्स आंसर पेसर टाइमर · 📴 ऑफलाइन रिवीजन वॉल्ट

डाउनलोड करेंGoogle Play