'लाटानुप्रास' को उदाहरण देकर समझाइए।
लाटानुप्रास अलंकार की परिभाषा एवं सोदाहरण व्याख्या:
1. परिभाषा: जब किसी पद्य में समान शब्द या वाक्य खंड (पद-समूह) की आवृत्ति उसी अर्थ में हो, किन्तु अन्वय (तात्पर्य/संबोधन) का भेद होने से कुल अर्थ में भिन्नता आ जाए, वहाँ 'लाटानुप्रास अलंकार' होता है (यह शब्दानुप्रास का प्रमुख भेद है, जो लाट/गुजरात देश के कवियों को प्रिय था)।
2. उदाहरण:
"पूत सपूत तौ क्यों धन संचय।
पूत कपूत तौ क्यों धन संचय॥"
(अन्वय भेद: यदि पुत्र सुपुत्र है तो धन संचय की आवश्यकता नहीं क्योंकि वह स्वयं कमा लेगा; यदि पुत्र कुपुत्र है तो भी संचय व्यर्थ है क्योंकि वह सब नष्ट कर देगा)।
In English (Question & Model Answer)
'लाटानुप्रास' को उदाहरण देकर समझाइए।
[Note for English Medium Aspirants]: As per official MPPSC Examination Rules, Paper 5 (General Hindi & Grammar / सामान्य हिन्दी एवं व्याकरण) must be attempted exclusively in Hindi (Devanagari script). The authentic Hindi model answer is provided below.
लाटानुप्रास अलंकार की परिभाषा एवं सोदाहरण व्याख्या:
1. परिभाषा: जब किसी पद्य में समान शब्द या वाक्य खंड (पद-समूह) की आवृत्ति उसी अर्थ में हो, किन्तु अन्वय (तात्पर्य/संबोधन) का भेद होने से कुल अर्थ में भिन्नता आ जाए, वहाँ 'लाटानुप्रास अलंकार' होता है (यह शब्दानुप्रास का प्रमुख भेद है, जो लाट/गुजरात देश के कवियों को प्रिय था)।
2. उदाहरण:
"पूत सपूत तौ क्यों धन संचय।
पूत कपूत तौ क्यों धन संचय॥"
(अन्वय भेद: यदि पुत्र सुपुत्र है तो धन संचय की आवश्यकता नहीं क्योंकि वह स्वयं कमा लेगा; यदि पुत्र कुपुत्र है तो भी संचय व्यर्थ है क्योंकि वह सब नष्ट कर देगा)।