मुख्य›MPPSC Mains (हिन्दी)›सामान्य हिन्दी एवं व्याकरण›सामान्य हिन्दी एवं व्याकरण›रस एवं छंद›रूपक अलंकार की विशेषता बताइए।

रूपक अलंकार की विशेषता बताइए।

20231M
आदर्श उत्तर

रूपक अलंकार की विशेषता:

  • विशेषता: जहाँ अत्यधिक सादृश्यता (समानता) के कारण उपमेय और उपमान में कोई भेद न रखकर उपमेय पर उपमान का अभेद (प्रत्यक्ष) आरोप कर दिया जाता है, वहाँ रूपक अलंकार होता है (तद्रूपकमभेदो य उपमानोपमेययोः)। इसमें वाचक शब्दों का प्रयोग नहीं होता।
  • उदाहरण: "चरन-कमल बन्दौ हरिराई।" (चरणों को ही कमल मान लिया गया है)।

In English (Question & Model Answer)

रूपक अलंकार की विशेषता बताइए।

[Note for English Medium Aspirants]: As per official MPPSC Examination Rules, Paper 5 (General Hindi & Grammar / सामान्य हिन्दी एवं व्याकरण) must be attempted exclusively in Hindi (Devanagari script). The authentic Hindi model answer is provided below.

रूपक अलंकार की विशेषता:

  • विशेषता: जहाँ अत्यधिक सादृश्यता (समानता) के कारण उपमेय और उपमान में कोई भेद न रखकर उपमेय पर उपमान का अभेद (प्रत्यक्ष) आरोप कर दिया जाता है, वहाँ रूपक अलंकार होता है (तद्रूपकमभेदो य उपमानोपमेययोः)। इसमें वाचक शब्दों का प्रयोग नहीं होता।
  • उदाहरण: "चरन-कमल बन्दौ हरिराई।" (चरणों को ही कमल मान लिया गया है)।
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